कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलावों की जरूरतः पंतनगर विवि के 37वें दीक्षांत समारोह में 1395 विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां
पंतनगर (उद संवाददाता)। देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का 37वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को विश्वविद्यालय के गांधी हॉल में अत्यंत हर्षाेल्लास और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी और क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट भी मंचासीन रहे। दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 1395 मेधावी विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गई। राज्यपाल ने विभिन्न संकायों में सर्वाेच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से अलंकृत किया। इस अवसर पर एक छात्र को प्रतिष्ठित कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, जबकि कुलपति के 13 स्वर्ण, 12 रजत और 10 कांस्य पदक विभिन्न विषयों के उत्कृष्ट छात्र -छात्राओं को भेंट किए गए। दीक्षांत भाषण देते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने उपाधि प्राप्त करने वाले युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने देश की हरित क्रांति में जो भूमिका निभाई है, वह अविस्मरणीय है। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने देश की हरित क्रांति में जो ऐतिहासिक और अविस्मरणीय भूमिका निभाई है, उस पर पूरे राष्ट्र को गर्व है। उन्होंने कहा कि आज जब हम विकसित भारत के संकल्प की ओर बढ़ रहे हैं, तब इस संस्थान के युवाओं पर बड़ी जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने अपने संबोधन में आधुनिक तकनीक के समावेश पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आज का युग तकनीक का है और कृषि क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलावों की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों का आ“वान किया कि वे कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स जैसे आधुनिक नवाचारों को बढ़ावा दें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमारे विश्वविद्यालय में होने वाले उच्च स्तरीय शोध का वास्तविक लाभ और परिणाम लैब (प्रयोगशाला) से निकलकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचना चाहिए। जब तक तकनीक का लाभ आम काश्तकार को नहीं मिलेगा, तब तक शोध की सार्थकता अधूरी है। कृषि की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को भविष्य की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं, जिस पर युवाओं को गंभीरता से कार्य करना चाहिए। संबोधन के दौरान उन्होंने विशेष रूप से महिला शिक्षा और छात्रओं की उपलब्धियों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पदक प्राप्त करने वाली छात्रओं की बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि हमारी बेटियां हर क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। राज्यपाल ने डिग्री प्राप्त करने वाले युवाओं से अपील की कि वे केवल नौकरी पाने वाले न बनें, बल्कि एग्री-स्टार्टअप्स के माध्यम से रोजगार प्रदाता बनकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करें। विशिष्ट अतिथि कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें पंतनगर के वैज्ञानिकों व छात्रें का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। सांसद अजय भट्ट ने भी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। समारोह के दौरान विशेष पुरस्कारों की श्रृंखला में पूरण आनंद अदलखा अवॉर्ड, सरस्वती पांडा अवॉर्ड, नागम्मा शांताबाई अवॉर्ड, डॉ. राम शिरोमणि तिवारी अवॉर्ड और चौधरी चरण सिंह मेमोरियल इंटेलेक्चुअल अवॉर्ड भी प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय के कुलपति डा. मनमोहन सिंह ने प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रबंधन परिषद और विद्वत परिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापक, अभिभावक और भारी संख्या में छात्र-छात्रएं उपस्थित रहे।
