विधानसभा चुनाव में ‘भूतों’ पर ही निर्भर रहेगा कांग्रेस का ‘भविष्य’ : बारह और नेताओं की कांग्रेस प्रवेश का ब्लूप्रिंट तैयार
विधानसभा चुनाव के पहले माहौल बंदी का नया कांग्रेसी पैंतरा,
देहरादून। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल बंदी की कोशिश में जुटी कांग्रेस की रणनीति को देखकर कभी-कभी ऐसा लगने लगता है, जैसे सत्ताइस के समर में कांग्रेस पार्टी के भविष्य की दशा दिशा भूत, अर्थात भूतपूर्व विधायक ,भूतपूर्व मेयर, भूतपूर्व नगर पालिका अध्यक्ष आदि ही तय करेंगे। वह इसलिए, क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने उत्तराखंड में अपना राजनीतिक माहौल बनाने के लिए अभी कुछ दिन पहले ही कुछ भूतपूर्व विधायकों, भूतपूर्व मेयर सहित भूतपूर्व नगर पालिका अध्यक्ष को कांग्रेस पार्टी में शामिल किया था और अब उत्तराखंड के कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोंदियाल का दावा है कि उत्तराखंड के बारह और वजनदार नेता शीघ्र ही कांग्रेस पार्टी में सम्मिलित होने जा रहे हैं। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का दावा तो यह भी है कि भाजपा के कुछ वर्तमान विधायक भी पाला बदलकर कांग्रेस में आना चाहते हैं, पर वह दल बदल कानून और बचे हुए कार्यकाल के कारण फिलहाल भाजपा में ही बने हुए हैं, मगर राजनीतिक हल्के में उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष के इस दावे को केवल राजनीतिक शिगूफा ही माना जा रहा है और यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं की अगली खेप में पूर्व की भांति ही भूतों की भरमार रह सकती है । याद दिलाना होगा कि अभी 28 मार्च को ही कांग्रेस ने दलबदल के पहले चरण में पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, पूर्व विधायक नारायण पाल, घनसाली विधानसभा से पूर्व विधायक भीमलाल आर्य, रुड़की के पूर्व मेयर गौरव गोयल समेत मसूरी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता, लाखन सिंह नेगी को पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। इसमें दो राय नहीं के कांग्रेस में शामिल हुए उपरोक्त नेताओं में से अधिकांश का संबंध कभी ना कभी भाजपा से रहा है और इनमें से अधिकांश को भाजपा ने ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया हुआ था। इसघटनाक्रम को कांग्रेस के लिए एक मनोवैज्ञानिक बढ़त के तौर पर भी देखा गया। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में आयोजित इस ज्वॉइनिंग कार्यक्रम के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल बना और यह संदेश देने की कोशिश की गई कि पार्टी चुनाव से पहले अपनी स्थिति मजबूत कर रही है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक समय ऐसा भी आया, जब पार्टी की अंदरूनी राजनीति चर्चा का विषय बन गई तथा वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के उपार्जित अवकाश लेने की बात सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। माना गया कि रामनगर के नेता संजय नेगी की ज्वॉइनिंग को लेकर नाराजगी के चलते हरीश रावत ने यह कदम उठाया। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर असहज स्थिति पैदा कर दी और ऐसा लगा कि पार्टी की रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, बाद में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने हरीश रावत से मुलाकात कर उन्हें मनाने की कोशिश की और स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया।अब जब मामला कुछ हद तक शांत हो चला है, तो कांग्रेस एक बार फिर अपनी राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ाने में जुट गई है और पार्टी अब दूसरी खेप के रूप में बारह और नेताओं को शामिल करने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अनुसार कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा रखने वाले नेताओं की कुल संख्या 18 थी, जिनमें से 6 नेता पहले ही सदस्यता ले चुके हैं। अब शेष 12 नेताओं की सूची तैयार कर हाईकमान को भेजी जा रही है। जैसे ही प्रदेश प्रभारी की सहमति मिल जाएगी, इन 12 नेताओं को भी जल्द ही कांग्रेस में शामिल कराया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर पार्टी बेहद सतर्कता बरत रही है। ताकि, पिछली बार की तरह कोई विवाद या असहमति सामने न आए। कांग्रेस की इस समूची कवायद के बीच कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा का उत्तराखंड दौरा भी बेहद अहम माना जा रहा है। कुमारी शैलजा 8 अप्रैल को पांच दिवसीय दौरे पर राज्य में आने वाली हैं, दौरे के दौरान वे विभिन्न क्षेत्रें का दौरा कर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस दौरे के दौरान ही इन 12 नेताओं में से कुछ की ज्वॉइनिंग करवाई जा सकती है, जिससे पार्टी को एक बार फिर मजबूती का संदेश देने का मौका मिलेगा। हालांकि सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि दूसरे दलों से कांग्रेस में आने वाले नेता ज्यादातर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट मिलने की शर्त पर ही कांग्रेस में आएंगे। ऐसे में कांग्रेस के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा व्याप्त हो सकती है और इसका खामियाजा अंततः कांग्रेस को ही भोगना पड़ सकता है।
