गदरपुर के गदर में पकती सियासत! चार दिग्गजों की मौजूदगी से उत्तराखंड भाजपा में नए समीकरणों की सुगबुगाहट
उधम सिंह नगर/गदरपुर।उत्तराखंड की राजनीति इन दिनों गरमाई हुई है। गदरपुर विधानसभा क्षेत्र अचानक प्रदेश की राजनीति का केंद्र बन गया है। जहां एक ओर विधायक अरविंद पांडे प्रशासनिक कार्रवाइयों और विवादों के चलते सुिखर्यों में हैं, वहीं दूसरी ओर उनके आवास पर प्रदेश के चार बड़े चेहरों का एक साथ पहुंचना राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। काशीपुर के किसान सुखवंत आत्महत्या मामले में सीबीआई जांच की मांग करने के बाद अरविंद पांडे के खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा कसता नजर आया। एक के बाद एक चार-पांच जमीन से जुड़े प्रकरण सामने आए, वहीं दो साल पुराने अतिक्रमण हटाओ नोटिस का उनके आवास पर चस्पा होना भी राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा में रहा। इन्हीं परिस्थितियों के बीच विधायक किशन सिंह चुफाल का उनके घर पहुंचना और गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद अनिल बलूनी और हरिद्वार विधायक मदन कौशिक का एक साथ गदरपुर पहुंचना सियासी तापमान को और चढ़ा रहा है। वसंत पंचमी के अवसर पर गूलरभोज में ठाकुरदृब्राह्मण समाज का विशेष घी-िखचड़ी भोज आयोजित किया जा रहा है, जिसकी मेजबानी खुद अरविंद पांडे कर रहे हैं। जहां हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हुए हैं।आम तौर पर ऐसे आयोजन सामाजिक परंपरा माने जाते हैं, लेकिन इस बार बड़े नेताओं की मौजूदगी इसे विशुद्ध सामाजिक कार्यक्रम से कहीं आगे ले जा रही है। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी,पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व कैबिनेट मंत्री व विधायक मदन कौशिक का एक साथ गदरपुर आना कई सवाल खड़े कर रहा है। वहीं लंबे समय से हाशिये पर रहे मदन कौशिक की इस चौकड़ी में मौजूदगी को उनकी राजनीतिक पुनः सक्रियता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अरविंद पांडे और मदन कौशिक दोनों ही पिछले चार वर्षों से पार्टी के भीतर अपेक्षाकृत शांत दौर में रहे हैं। लेकिन कुछ समय से श्री पांडे सुिखर्यों में बने हुए हैं। अब ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं का उनके घर पहुंचना भाजपा के अंदर किसी नए संतुलन, संभावित राहत या आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम की पटकथा की ओर इशारा कर रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यह मुलाकात महज शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि संगठन और सत्ता के भीतर चल रही खींचतान को साधने की कोशिश हो सकती है।इस बीच दिल्ली में रची साजिश को लेकर प्रदेश की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन और अंदरूनी खेमेबंदी की चर्चाएं सामने आ चुकी हैं। अब उसी कड़ी में गदरपुर का यह आयोजन कई सवालों को और धार दे रहा हैकृक्या दिल्ली में बनी रणनीति जमीन पर उतारी जा रही है? क्या अरविंद पांडे को लेकर पार्टी के भीतर नया रुख तय हो रहा है? या फिर यह मुलाकात आने वाले बड़े राजनीतिक फैसलों से पहले शक्ति प्रदर्शन भर है? भले ही यह खिचड़ी कार्यक्रम कुछ समय का हो , लेकिन इसके राजनीतिक मायने कहीं गहरे बताए जा रहे हैं। अब सबकी निगाहें इसी पर टिकी हैं कि गदरपुर की इस खिचड़ी से उत्तराखंड की राजनीति को आिखर कौन-सा नया स्वाद मिलने वाला है।
