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रूद्रपुर के नंदलाल पर कांग्रेस ने खेला दांव

(सुनील राणा ) रुद्रपुर। इस बार के हो रहे नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण की फांस भाजपा और कांग्रेस के कई चेहरों को वर्षों तक सताती रहेगी। लम्बे अरसे से मेयर पद पर चुनाव लड़ने का सपना सजाये भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गजों को सिर्फ निराशा हाथ लगी है। इसका सिर्फ और सीधा कारण नजूल भूमि का मसला है कि नजूल भूमि पर काबिज कोई भी व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। वहीं सीटआरिक्षत होने के कारण भी कई दावेदारों के सपनों पर पानी फिर गया है। गत दिवस भाजपा ने तमाम मंथन के बाद एक नये चेहरे रामपाल सिंह को मेयर पद के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया था और आज कांग्रेस ने भी कदमताल करते हुए शहर के एक नये चेहरे नंदलाल को अपना मेयर पद का प्रत्याशी घोषित कर दिया है। अब नगर निगम चुनाव में जहां एक ओर भाजपा के रामपाल रामधुन बजायेंगे तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के नंदलाल  नंद के आनंद भयो गाते नजर आयेंगे। कांग्रेस के मेयर पद प्रत्याशी नंदलाल ने पंतनगर विश्वविद्यालय से बीटेक और एमटेक की शिक्षा प्राप्त की है। वह पेशे से व्यवसायी हैं और फुलसुंगा तथा अटरिया मंदिर के समीप उनका स्थायी निवास है। नंदलाल के पिता गोवर्धन प्रताप कांग्रेस के सदस्य रहे हैं और उनके भाई महेंद्र भी सभासद पद पर रह चुके हैं। शहर में कांग्रेस की राजनीति में नंदलाल एक नया चेहरा माना जा सकता है। पिछले कुछ माह से वह एकाएक कांग्रेस पार्टी में सक्रिय हुए और जल्द ही उन्होंने अपना जनाधार बना लिया। कांग्रेस द्वारा किये जाने वाले धरना प्रदर्शनों में वह बढ़चढ़कर भाग लेने लगे और जल्द ही सीढ़ियां लांघते हुए आगे बढ़ते चले गये। हालांकि रूद्रपुर नगर निगम की सीट आरक्षित होने के बाद कांग्रेस के जिन अन्य दावेदारों ने मेयर पद के लिए अपना नाम सामने किया था वह कांग्रेस पार्टी में लम्बे अरसे से सक्रिय हैं जिनमें प्रमुख रूप से चन्द्रसेन कोली, सुनील आर्या मेयर का चुनाव लड़ चुकी ममता रानी प्रमुख रूप से शामिल हैं। लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने लम्बी मशक्कत के बाद नंदलाल को रूद्रपुर कांग्रेस से मेयर पद के लिए अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। ऐसे में टिकट की होड़ में लगे दावेदारों के लिए यह करारा झटका साबित हुआ। लेकिन भाजपा और कांग्रेस के लिए यह जंग अंदरूनी रूप से आसान नहीं होगी क्योंकि दोनों ही दलों के नेता मेयर पद के लिए तिकड़म भिड़ाने में लगे थे और संभवतः दोनों ही दलों के वह दावेदार दोनों ही पार्टियों के पुराने कार्यकर्ता भी रहे लेकिन पहले भाजपा और बाद में कांग्रेस ने जिस प्रकार से उन्हें  दरकिनार करते हुए रूद्रपुर नगर निगम चुनाव में मेयर पद के लिए एक  नये चेहरे को सामने खड़ा किया है वह दोनों ही दलों के लिए आसान नहीं होगा क्योंकि इस चुनाव में उन्हें कहीं न कहीं भीतरघात का सामना करना पड़ेगा और कहीं न कहीं इस चुनाव में उन्हें जनता के साथ में जाकर नजूल भूमि को लेकर चल रहे मामले का विरोध भी झेलना पड़ेगा। हालांकि अब प्रमुख दलों ने अपने मेयर पद के प्रत्याशी घोषित कर दिये हैं और कहा जा सकता है कि रूद्रपुर में अब नगर निगम चुनाव का बिगुल फुुंक चुका है। माना जा रहा है कि आज भाजपा और कांग्रेस नगर के 40 वार्डों के शेष पार्षद प्रत्याशियों के नामों की लिस्ट भी जारी कर सकती है। उसके बाद से रूद्रपुर नगर निगम की यह जंग प्रारम्भ हो जायेगी।

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