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परीक्षा आयोजन में लापरवाही बरतने पर दो अफ़सरों सहित चार निलंबित

देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। इस पेपर लीक कांड के तार सीधे तौर पर परीक्षा आयोजन में तैनात अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों की लापरवाही से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। जांच के शुरुआती दौर में हरिद्वार के परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक व सेक्टर मजिस्ट्रेट के-एन- तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही दो पुलिस कर्मियों को भी निलंबित किया गया है। वित्त सचिव दिलीप जावलकर द्वारा जारी निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रश्न पत्र के तीन पृष्ठ परीक्षा शुरू होने के कुछ ही समय बाद परीक्षा केंद्र से बाहर पहुंच गए, जो कि प्रशासनिक विफलता और संवेदनशीलता की घोर कमी को दर्शाता है। सिर्फ तिवारी ही नहीं, बल्कि इस मामले में टिहरी के अगरोड़ा डिग्री कॉलेज में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को भी निलंबित कर दिया गया है। वह इस परीक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं में किसी रूप में संलिप्त थीं और उन पर भी ड्यूटी में लापरवाही का आरोप लगा है। उधर, हरिद्वार के एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने भी तत्परता दिखाते हुए परीक्षा केंद्र में तैनात दो पुलिस कर्मियों सब इंस्पेक्टर रोहित कुमार और कांस्टेबल ब्रह्मदत्त जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दोनों पर परीक्षा ड्यूटी के दौरान न तो सतर्कता बरतने का आरोप है और न ही संवेदनशीलता का परिचय देने का। एसएसपी ने यह साफ कर दिया है कि पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पूरे घटनाक्रम की जांच अब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को सौंपी गई है। यह टीम हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कार्य करेगी और एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। इस पूरे प्रकरण में मुख्य आरोपी खालिद और उसकी बहन साबिया की गिरफ्तारी हो चुकी है। प्रारंभिक जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि परीक्षा शुरू होते ही कुछ ही मिनटों में प्रश्नपत्र के तीन पेज बाहर भेजे गए, जोकि एक संगठित षडयंत्र की ओर इशारा करता है।

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