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जबरन बना दिया सैनिक : रूस यूक्रेन जंग के मोर्चे पर बंदूक थामे खड़ा है राकेश मौर्य, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

शक्तिफार्म। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर के तहसील सितारगंज के शक्तिफार्म मे स्थित कुसमोठ गांव का 26 वर्षीय राकेश मौर्य कभी इंजीनियर बनने का सपना देखता था। कुछ ही दिनों बाद उसकी शादी होनी थी, मां-बाप की आंखों में बेटे की नई जिंदगी के सपने सज रहे थे। लेकिन अचानक सबकुछ बदल गया। अब वही राकेश रूस- यूक्रेन जंग के मोर्चे पर बंदूक थामे खड़ा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए उसके वीडियो ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। यह कहानी शुरू होती है 30 अगस्त से। उस दिन राकेश ने अपनी मां सोनी देवी से फोन पर कहा था फ्मां, तीन महीने बाद आऊंगा फिर शादी करूंगा।य् मां ने बेटे की आवाज सुनकर तसल्ली की सांस ली थी। पिता राजबहादुर मौर्य भी बेटे की नौकरी और भविष्य को लेकर खुश थे। लेकिन किसे पता था कि यह बातचीत आखिरी सुखद लम्हा बन जाएगी। कुछ ही दिनों बाद परिजनों को खबर मिली कि राकेश रूस पहुंच गया है। इसके बाद अचानक एक वीडियो सामने आया जिसमें राकेश रूस की सेना की वर्दी पहने, हथियारों से लैस नजर आ रहा है। वीडियो में उसकी कांपती आवाज कह रही है कि उसे जबरन सैनिक बना दिया गया है और यूक्रेन के खिलाफ मोर्चे पर उतार दिया गया है। यह सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। राकेश की जिंदगी हमेशा से संघर्षों से भरी रही। उसने कक्षा 1 से 5 तक बदायूं में पढ़ाई की, फिर शक्ति फार्म में इंटर तक की शिक्षा ली। खटीमा कॉलेज से बीएससी पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए हल्द्वानी चला गया। वहीं रहते हुए उसने ऑनलाइन जॉब शुरू किया और अक्सर हिमाचल-शिमला के चक्कर लगाता रहा। माता-पिता को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह जॉब उसे सीधे रूस पहुंचा देगा। परिवार में राकेश सबसे बड़ा बेटा है। छोटे भाई में एक बेंगलुरु में नौकरी करता है, जबकि दूसरा बीटेक की तैयारी कर रहा है। मां-बाप की उम्मीदों का सहारा और परिवार की जिम्मेदारी राकेश के कंधों पर ही थी। उसकी मंगेतर भी वीडियो सामने आने के बाद से गहरे सदमे में है। हालत यह है कि पूरे गांव में मातम का साया है। राकेश के घर पर आने-जाने वालों का तांता लगा है। हर कोई यही सवाल कर रहा है कि आखिर भारत का नौजवान कैसे जंग के दलदल में जा फंसा? क्या उसे जॉब के नाम पर ठगा गया, या फिर कोई संगठित गिरोह भारतीय युवाओं को फंसा रहा है? राकेश के परिजन अब बस प्रशासन से एक ही फरियाद कर रहे हैं फ्हमारे बेटे को किसी भी कीमत पर भारत वापस लाया जाए। उसने बंदूक नहीं, किताबें उठाने का सपना देखा था। उसका भविष्य मत छीनिए। यह कहानी सिर्फ एक युवक की नहीं, बल्कि उस दर्द की दास्तान है जो हजारों परिवारों को हिला सकती है। सितारगंज का यह मामला अब विदेश मंत्रालय और सरकार के लिए चुनौती बन चुका है। सवाल उठता है कि क्या भारत अपने उस बेटे को मौत के साए से निकाल पाएगा, जिसने मां से वादा किया था कि फ्तीन महीने बाद शादी करूंगा।

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