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उत्तराखंड में जनसेवा का नया अध्याय लिखते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून/धराली। उत्तराखंड जब अपने गठन के 25 वर्ष पूर्ण करने की ओर बढ़ रहा है, तब एक ऐसा नेतृत्व उभरकर सामने आया है जिसने जनसेवा को नया आयाम दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिनका व्यक्तित्व जितना सरल है, निर्णय उतने ही दृढ़ और परिणामकारी -आज वे न केवल उत्तराखंड के, बल्कि देश के सबसे सक्रिय और संवेदनशील मुख्यमंत्रियों की कतार में शुमार हो चुके हैं। जब प्रदेश एक के बाद एक आपदाओं से जूझ रहा है, तब धामी का नेतृत्व संकट में साहस, संवेदना और समाधान का प्रतीक बन गया है। धराली में जब आपदा ने विकराल रूप लिया, तो सबसे बड़ा सवाल था दृ फ्पहुँचा कैसे जाए?य् सड़क मार्ग अवरुद्ध थे, मौसम खराब, और दुर्गमता हावी। लेकिन धामी ने वही किया जो एक जनसेवक और योद्धा करता है – वे खुद मौके पर पहुँचे। उन्होंने वायुसेना,आईटीबीपी, बीआरओ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संवाद किया। सेना और प्रशासन के बीच ऐसा समन्वय बना, जिसकी प्रशंसा खुद केंद्रीय एजेंसियों ने की। मुख्यमंत्री धामी का सोचना था कि हम हर संसाधन का प्रयोग करेंगे, लेकिन किसी भी पीड़ित को अकेला नहीं छोड़ेंगे। मुख्यमंत्री के निवेदन पर भारतीय वायुसेना के चिनूक व एमआई-17 हेलीकॉप्टर से ऑपरेशन तुरंत शुरू हुआ। धराली जैसे दुर्गम क्षेत्र में, जहाँ जमीनी पहुँच असंभव हो गई थी, वहीं आसमान से राहत पहुँची। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बीमार बुजुर्गों को प्राथमिकता पर एयरलिफ्रट किया गया। यह सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं था – यह एक स्पष्ट संदेश था कि राज्य सरकार संकट में अपने नागरिकों के साथ खड़ी है – हर हाल में। धामी देश के सबसे युवा मुख्यमंत्रियों में से एक हैं। लेकिन उनकी सोच परिपक्व और कार्यशैली अत्यंत व्यावहारिक है। धराली में राहत शिविरों की स्थिति देखकर उन्होंने तत्काल निर्णय लिए और शिविरों में अतिरिक्त डॉक्टरों की तैनाती,राशन की आपूर्ति का वैकल्पिक मार्ग,मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग के निर्देश और हर पीड़ित परिवार के लिए फॉलोअप टीम का गठन करवाया। मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली राज्य के चौमुखी विकास के लिए उत्तराखंड वासियों के लिए उम्मीद की किरण है। उत्तराखंड अब केवल एक पर्यटन या तीर्थ प्रदेश नहीं, बल्कि एक सशक्त नेतृत्व और मानवीय संवेदनाओं का उदाहरण बन चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह दिखा दिया कि राजनीति केवल कुर्सी का खेल नहीं, बल्कि जनता की पीड़ा से जुड़कर, उनके आंसू पोंछने की सेवा भी है।

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