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नैनीताल जिले में भाजपा को झटका: मंत्री-विधायकों की साख पर भी लगा सवालिया निशान

जिपं की केवल सात सीटों पर मिली सफलता,2027 के सेमीफाइनल में संकट के संकेत
हल्द्वानी(उद संवाददाता)। नैनीताल जिले में जिला पंचायत चुनाव के नतीजे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए करारा झटका साबित हुए हैं। जिला पंचायत की 27 सीटों में से जिन 23 पर भाजपा ने अपने प्रत्याशियों को समर्थन दिया था, उनमें से केवल सात सीटें ही पार्टी के खाते में आई हैं। इनमें से भी चार सीटों पर पार्टी के बागी प्रत्याशी विजयी रहे हैं, जबकि 15 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर भाजपा की रणनीति को ध्वस्त कर दिया।नैनीताल जिले की त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सबसे हॉट सीट रही 21- रामड़ी आनसिंह(पनियाली) जिला पंचायत सदस्य पर निर्दलीय उम्मीदवार छवि कांडपाल ने बीजेपी की अधिकृत प्रत्याशी, बेला तोलिया को 2411 हराया। चुनाव परिणामों ने न सिर्फ संगठन की तैयारियों पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया है, बल्कि क्षेत्रीय मंत्रियों, विधायकों और दायित्वधारियों की साख को भी गहरा धक्का पहुंचाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों की दिन-रात की मेहनत के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए। भाजपा ने जिले की 23 सीटों पर अपने समर्थित प्रत्याशी उतारे थे, हालांकि इन्हें पार्टी का चुनाव चिन्ह नहीं दिया गया था। चुनाव प्रचार में केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, डॉ- मोहन सिंह बिष्ट, सरिता आर्या, दीवान सिंह बिष्ट, राम सिंह कैड़ा, जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट सहित तमाम पदाधिकारियों ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन परिणाम उनके दावों के विपरीत रहे। चुनाव परिणामों के विश्लेषण में पांच प्रमुख कारण सामने आए हैं जो भाजपा की हार के लिए जिम्मेदार माने जा रहे हैं। संगठन के कई पदाधिकारियों द्वारा प्रत्याशियों से दूरी बनाए रखना।, जिला प्रशासन द्वारा लिए गए जनविरोधी फैसले, नेताओं का अति आत्मविश्वास, टिकट वितरण में समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और 5- प्रत्याशी चयन में चूक। को प्रमुख कारण माना जा रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा को जिले में हार का सामना करना पड़ा है। इससे पूर्व जनवरी में हुए निकाय चुनाव में भी पार्टी को केवल हल्द्वानी नगर निगम की सीट पर संतोष करना पड़ा था। अन्य निकायों में निर्दलीय और कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी बाजी मार ले गए थे। हालांकि पार्टी जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर अभी भी आशान्वित है। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट के अनुसार, चुनाव जीतने वाले निर्दलीय व बागी सदस्यों से बातचीत हो चुकी है और अध्यक्ष पद के लिए उनका समर्थन लिया जाएगा। बिष्ट ने कहा कि कई सीटों पर भले ही भाजपा ने अधिकृत समर्थन नहीं दिया हो, लेकिन वहां भी भाजपा से जुड़े प्रत्याशी ही विजयी हुए हैं। बहरहाल इस पंचायत चुनाव को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था, ऐसे में भाजपा के लिए यह नतीजे न सिर्फ चिंताजनक हैं, बल्कि सांगठनिक समीक्षा की आवश्यकता भी स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

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