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बीच बाजार में रूका रहा परिवहन मंत्री का काफिला,कौंन काटेगा चालान!

दिनेशपुर, 5सितम्बर। यातायात व्यवस्था सुचारू करने और शहरों में वाहनों के बढ़ते दवाब के कारण जाम की समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन सक्रिये है। पुलिस कर्मियों को इसके लिए अलग से ट्रेनिंग भी दी जा रही है। सड़क व यातायात नियमों के पालन के लिए पुलिस जनता को विविध माध्यमों से जागरूक कर रही है। लेकिन यदि पुलिस और जिम्मेदार लोग ही नियमों का पालन नहीं करेंगे तो जनता से क्या उम्मीद की जाये? मंगलवार की शाम दिनेशपुर में कुछ ऐसा ही हुआ। लगभग पैंतालिस मिनट तक परिवहन मंत्री का काफिला बीच बाजार सड़क पर ही ऽड़ा रहा। जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान पुलिस आम लोगों पर तो सख्ती करती रही, लेकिन मंत्री जी के काफिले को उचित जगह पार्क नहीं कराया गया। बता दें कि मंगलवार की शाम दिनेशपुर में पुलिस की बड़ी चहलकदमी थी। चौराहे पर फल की दुकान के किनारे एक चार पहिया वाहन आधा सड़क पर और आधा फुटपाथ पर ऽड़ा था। एक महिला दारोगा टायर की हवा निकाल रही थी। वाहन चालक की गलती पर पुलिस को चालन काटने और वाहन सीज करने का पूरा हक है और किया भी जाना चाहिए। लेकिन पहिये की हवा निकालना समझ से परे है। पता चला कि कुछ ही देर में परिवहन मंत्री यशपाल आर्या नगर में एक धार्मिक कार्यक्रम में आने वाले हैं। इसलिए पुलिस यातायात सुचारू कर रही है, सड़क किनारे ऽड़े वाहनों के टायर की हवा निकाल कर। यह कौन सा तरीका है पुलिस का? जबकि इस मामले में हाईकोर्ट का साफ आदेश है कि वाहन की हवा निकालना पुलिस का काम नहीं है। यह पुलिस के लिए भी अशोभनीय है। थेड़ी ही देर में मंत्री जी का काफिला टू—-टू—–करता हुआ उसी चौराहे से मुख्य बाजार में दािऽल हुआ। बाजार के बीचों-बीच व्यापार मण्डल अध्यक्ष के प्रतिष्ठान पर सड़क के ऊपर ही गाड़िया रुक गयीं। काफिले में छुटभैया नेताओं की गाड़ियां भी थीं और पुलिस की गाड़ी भी। लगभग पौन घंटे तक गाड़ियां सड़क पर ही ऽड़ी रहीं। रात का समय होने के कारण गुजरने वाले राहगीरों और वाहनों को ऽासा परेशानी तो नहीं हुई, लेकिन क्या यह वी आई पी कल्चर जायज है? अब मंत्री जी की गाड़ी और उनके काफिले में चलने वाली गाड़ियों का चालान कौन काटेगा पुलिस जी?ऐसे समय में ही तो दिल्ली की पूर्व पुलिस अधिकारी किरन बेदी जी की याद आती है, जिन्होंने इंदिरा गांधी जी तक की गाड़ी क्रैन से उठा कर सीज कर दी थी। यह वाकया नगर में चर्चा का विषय बन गया। लोगों का कहना है कि पुलिस और नेताओं को अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए। हालांकि बाद में पत्रकार वार्ता में यह सवाल मंत्री जी से किया गया तो उन्होंनेइसे अपनी भूल माना और आगे से ध्यान रऽने की बात कही।

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