February 12, 2026

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देश में पहली बार जैव ईंधन सेें उड़ा विमान

देहरादून।  देश में पहली बार जैव ईंधन से चलने वाले विमान ने देहरादून से उड़ान भरी। विमानन कंपनी स्पाइस जेट के टर्बाेपोर्प क्यू 400 विमान को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरी झंडी दिऽाई। विमान दस मिनट तक मंडराता रहा। इसके बाद उसने दिल्ली के लिए सफर शुरू किया। बता दें कि रविवार को इसका टेस्ट हुआ था। सोमवार को इसने दिल्ली के लिए उड़ान भरी। विमान में नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), आइआइपी, नागरिक विमानन मंत्रलय और एयरलाइंस के वरिष्ठ अधिकारी सवार हैं।  इस साल जनवरी में आस्ट्रेलियाई कैरियर क्वांटास के ड्रीमलाइनर बोइंग 787-9 विमान ने लॉस एंजिलिस और मेलबर्न के बीच उड़ान भरी था। 15 घंटे की उड़ान के लिए मिश्रित ईंधन का उपयोग किया गया था। इसमें 10 प्रतिशत जैव ईंधन मिलाया गया था। साल 2011 में अलास्का एयरलाइंस ने जैव ईंधन से चलने वाले कुछ विमान शुरू किए थे जिसके ईंधन में 50 फीसद ऽाद्य तेल का इस्तेमाल किया गया था। भारत तेल आयात पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। इसीलिए जैव ईंधन को प्रचारित करने की मंशा है। 10 अगस्त 2018 को जैव ईंधन दिवस के मौके पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति जारी की थी। इसमें आनेवाले चार सालों में एथेनॉल का उत्पादन तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रऽा गया है। अगर ऐसा होता है तो तेल आयात के ऽर्च में 12 हजार करोड़ रुपये तक बचाए जा सकते हैं। जैव ईंधन सब्जी के तेलों, रिसाइकल ग्रीस, काई, जानवरों के फैट आदि से बनता है। जीवाश्म ईंधन की जगह इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल, एयरलाइंस इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आइएटीए) नामक ग्लोबल एसोसिएशन ने लक्ष्य रऽा है कि उनकी इंडस्ट्री से पैदा होने वाले कॉर्बन को 2050 तक 50 फीसद कम किया जाए। एक अनुमान के मुताबिक, जैव ईंधन के इस्तेमाल से एविएशन क्षेत्र में उत्सर्जित होने वाले कार्बन को 80 फीसद तक कम किया जा सकता है।

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