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नगर निगम ने डीएम के आदेश को ठेंगा दिखा निकाले करोड़ों के टेंडर

8 ठेकेदारों के 13 करोड़ से ऊपर का देनदार है नगर निगम, फिर भी निकाल दिए करोड़ों के टेंडर

रुद्रपुर। करोड़ों के कर्जे के बोझ के नीचे दबे नगर निगम ने डीएम के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए करोड़ों के टेंडर निकाले हैं। नगर निगम प्रशासन द्वारा नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डो में विकास कार्यों हेतु 26 अगस्त को समाचार पत्रों म करोड़ों के टेंडर प्रकाशित कराए गए हैं। नगर निगम द्वारा निविदा सूचना में विभिन्न वार्डों से संबंधित 32 निर्माण कार्यों की निविदा निकाली गई है, जो सीसी रोड, नाली और सौंदर्यकरण के कार्यों से संबंधित है। मजे की बात तो यह है कि नगर निगम पर पूर्व में कराए गए विकास कार्य की 13 करोड़ से ऊपर की देनदारी है, इसके बावजूद नगर निगम द्वारा 6 करोड़ से ऊपर के विकास कार्य के लिए पुनः निविदा निकाल दी गई है जबकि जिलाधिकारी का स्पष्ट आदेश है कि जब तक नगर निकायों के पास बजट की व्यवस्था ना हो तब तक कोई भी कार्य आदेश जारी ना किया जाए,इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन ने जिलाधिकारी के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में विकास कार्यों के लिए 6 करोड़ से ऊपर की निविदा निकाली गई है। अपर जिलाधिकारी ;वित्त/राजस्वद्ध डॉ0 ललित नारायण मिश्रा द्वारा जिले की सभी नगर निकार्यो को भेजे गये अपने पत्र संख्या-12096/ न्याय अनु0-षष्ठम- ग्ग्प्-विविध ;पत्र0 सं0- 11, 2022 -23 दिनॉक 25 जुलाई 2022 में स्पष्ट आदेशित किया जा चुका है कि प्रायः नगर निकार्यो द्वारा बजट न होने पर भी टेण्डर प्रक्रिया की जा रही है। तत्पश्चात बजट की प्रत्याशा में कार्यादेश भी निर्गत हो जाता है। जिसमें भुगतान किये जाने में तकनीकि समस्या उत्पन्न होती हें तथा भुगतान न होने की शिकायते आती रहती है। अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) डॉ0 ललित नारायण मिश्रा ने पत्र में स्पष्ट किया हुआ है कि उक्त सम्बन्ध में जिलाधिकारी महोदय द्वारा निर्देशित किया गया है कि जब तक बजट प्राप्त न हो जाये तब तक किसी भी नगर निकाय द्वारा कोइ्र भी कार्यादेश निर्गत न किया जाये। बजट उपलब्ध होने पर ही कार्यादेश निर्गत किये जाये। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन ने जिलाधिकारी के आदेश को ठेंगा दिखाते हुये करोड़ों के टेण्डर निकाल दिये। कहने को तो राज्य वित्त से नगर निगम रूद्रपुर को प्रत्येक तीन माह में 7 करोड़ का बजट प्राप्ता होता है। जिसका आधे से ज्यादा लगभग 4 करोड़ रूपये निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन के लिये आरक्षित हो जाता है और शेष 3 करोड़ रूपये ठेकेदारों के पुराने भुगतान में चला जाता है। बताया जाता है कि वर्तमान में नगर निगम पर ठेकेदारों की 13 करोड़ रूपये से अधिक की देनदारी है। इनमें से अधिकांश ठेकेदारों ने बैंक और बाहर से कर्जा लेकर नगर निगम के कार्य किये है और आज भुगतान पाने के लिये दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो रहे है। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा पुनः 6 करोड़ रूपये से अधिक की निविदा निकाली जा चुकी है। जिसमें अधिकांश कार्य सेटिंग- गेंटिंग के नजर आ रहे है। बहरहाल ठेकेदारों के करोड़ों रूपये के कर्जे के बोझ से दबे नगर निगम द्वारा निकाले गये टेण्डर किसी के गले नही उतर रहे और उनका मानना है कि नगर निगम को पहले अपने पूर्व के भुगतान को निपटाना चाहिये और उसके बाद ही इन कार्यो को कराना चाहिये।

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