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‘शराब’ के लिए अब कहां से आया पैसा? ‘कोरोना टैक्स’ वसूलेगी त्रिवेंद्र सरकार!

उत्तराखंड में सस्ती शराब मिलने की उम्मीदों पर फिर पानी
-उत्तरांचल दर्पण ब्यूरो-
देहरादून। उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों मे लाॅकडाउन 9 की गाईडलाईन के अनुसार खुली शराब की दुकानों पर उमड़ी लोगों की भीड़ को लेकर तरह तरह की चर्चायें भी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि लाॅकडाउन से हुए राजस्व की नुकसान की भरपायी के लिये उत्तराखंड में शराब के ठेकों पर ‘कोरोना’ टैक्स की वसूली होगी। पिछले 40 दिन से अपने अपने घरों में कैद शराब के शौकीनों का तांता लगने से जहां कोविड संक्रमण की आशंका बढ़ रही है तो वहीं राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाये जा रहे है। इतना ही नहीं प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष ने भी शराब की दुकानों पर भीड़ पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। जबकि उन्होंने राज्य सरकार से भी अपील की है कि शराब से पहले स्वास्थ्य की चिंता की जाये। वहीं दूरी तरफ सोशल मीडिया पर भी शराब की दुकानों पर उमड़ी भीड़ की कई वीडियो वायरल हो रही है। इस भीड़ को लेकर सामाजिक संगठनों के लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि कोरोना सक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है सरकार को शीघ्र दुकाने बंद करानी चाहिये। वहीं कई लोगों ने शराब उपलब्ध कराने के लिये कार्ययोजना बनाने की मांग की है। शराब की दुकानों पर जांच के लिये स्वास्थ्यकर्मियों के साथ पुलिसकर्मियों की टीम तैनात करने की भी मांग की जा रही है जिससे भीड़ को काबू किया जा सके। उल्लेखनीय है कि सम्पूर्ण लाॅकडाउन की घोषणा के बाद अधिकांश क्षेत्रो में लोगों को राशन और और भेजन की चिंता सताने लगी थी जिसके लिये सरकार ने जहां खाद्यान योजना के तहत राशन उपलब्ध कराया गया है तो दूसरी तरफ अनेक राजनीतिक,धार्मिक एवं समाजसेवी संगठन पकाया हुआ भोजन उपलब्ध करवा रहे है। ऐसे में सवाल खड़े किये जा रहे है कि आखिर इन लोगों को राशन के लिये आर्थिक परेशानी नहीं हुई जितनी शराब खरीदने के लिये बेचैन थे। कुछ दिन पूर्व ही रेड जोन से आॅरेंज जोन में आये राजधानी देहरादून के शराब ठेकों व नैनीताल जिले के हल्द्वानी में उमड़ी भीड़ देखकर हर कोई अचंभित है। जबकि ऊधमसिंहनगर जिले में भी शराब खरीदने की होड़ मची रही। हांलाकि शराब की बिक्री के लिये विक्रेताओं सोशल डिस्टेंसिंग,फेस मास्क और सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम कराने के लिये जिला प्रशासन ने अनिवार्य रूप से गाईडलाईन जारी की है। उत्तराखंड में शराब कारोबार पर कोरोना टैक्स वसूलने के तैयारी है। इसके लिए शराब के दामों में 50 से 60 फीसद तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। लॉकडाउन में 40 दिन बाद मिली छूट के दौरान सोमवार को उत्तराखंड में सभी जगह शराब की दुकानों में लंबी कतारें लगीं रहीं। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार अब दिल्ली सरकार की तरह यहां भी शराब पर कोविड टैक्स लगाने की तैयारी में है। इससे जहां शराब की कीमतों में बढ़ोतरी होगी, वहीं कोरोना महामारी के बीच दुकानों में बढ़ रही भीड़ भी कम होगी। सरकार का मानना है कि इससे राजस्व में भी इजाफा हो सकता है। इधर प्रदेश के शासकीय प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के अनुसार केंद्र सरकार की गाईडलाइन के अनुरूप अन्य दुकानों के साथ देशी विदेशी शराब व बीयर की दुकानें भी खोलने की अनुमति दे दी गई है। 40 दिन बाद लोग जरूरी वस्तुओं की खरीदारी को बाहर निकले, जिससे कुछ भीड़ भी नजर आई। एक-दो दिन में परिस्थितियां सामान्य हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से हुए नुकसान के बाद की परिस्थितियों से भी उबरने की चुनौती है। इस क्रम में आगे केंद्र की जो भी गाईडलाइन आएंगी, उसी के अनुरूप कदम उठाए जाएंगे। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा आबकारी नीति में किये गये बदलाव कर सस्ती शराब उपलब्ध कराने के साथ राज्यव बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। जबकि लोग नये वित्तीय सत्र से प्रदेश में सस्ती शराब मिलने की उम्मीद लगाये हुए थे। कोरोना महामारी की रोकथाम के लिये देशव्यापी लाॅकडाउन के बीच जहां शराब की दुकाने खुलने से सरकार राजस्व जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं। वहीं शराब के दाम बढ़ाने की चर्चाओं से यह उम्मीद भी अब टूटने के संकेत दे रही है। वर्तमान में प्रदेश में शराब की 628 दुकानें स्वीकृत हैं। इस वित्तीय वर्ष में सरकार ने 3600 करोड़ रुपये के आबकारी राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक 451 दुकानों की नीलामी हो चुकी है। शेष दुकानों की नीलामी शीघ्र होगी। वहीं विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने राज्यभर में शराब की दुकानों में खरीदारी के लिए लोगों के उमडने पर चिंता जताई। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में शराब की दुकानों के बाहर के नजारे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से शराब के विरोधी रहे हैं। वह अपने आवास से विधानसभा स्थित कार्यालय पहुंचे तो रास्ते में दो-तीन स्थानों पर शराब की दुकानों के बाहर लगी लंबी कतारें लगी थीं। लोग शारीरिक दूरी के मानकों का अनुपालन करते हुए खड़े थे, मगर यह नजारा बदली परिस्थितियों में सोचनीय विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि कल तक तमाम लोग सरकार से, जनप्रतिनिधियों से, एनजीओ से राशन की मांग कर रहे थे। जब इन लोगों के पास राशन को पैसा नहीं था, तो अब शराब के लिए पैसा कहां से आया। यह अचंभित करने वाला है।

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