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मजलूमों की मदद को सार्वजनिक करना शर्मनाक

द मनोज श्रीवास्तव
काशीपुर(उद संवाददाता)। लॉक डाउन की मार झेल रहे मजलूम बेसहारा व निर्धन परिवारों को खाने के पैकेट तथा राशन बांटते हुए फोटो सेशन कराए जा रहे हैं ताकि उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर वाहवाही लूटा जा सके जा सके। मजे की बात तो यह है कि संकट की इस घड़ी में असल दानदाता पर्दे के पीछे हैं। वह नेकी कर दरिया में डाल वाली तर्ज पर मानव सेवा में लगा है जबकि विकृत मानसिकता के लोग संकट की इस घड़ी को भी किसी न किसी तरह कैश कराने की फिराक में है। ज्ञातव्य है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए समूचे देश में 21 दिनों के लॉक डाउनके फरमान जारी किए गए हैं। लॉक डाउन से मजदूर तबके के समक्ष रोजी रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया। ऐसे में समाज सेवा से जुड़े कुछ लोगों ने मदद को हाथ आगे बढ़ाएं। लेकिन जिन लोगों ने भूख से बेहाल परिवारों तक खाने के पैकेट व राशन वितरण का जिम्मा लिया है वह इसे कहीं न कहीं राजनैतिक रंग देते देखे जा रहे हैं। या फिर समाज सेवा का दिखावा कर अपनी पीठ थपथपाने का काम किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि मुश्किल वक्त में जिन्हें भोजन की व्यवस्था की जा रही है वह भिखारी नहीं बल्कि हालात के सताए लोग हैं इसलिए खाने के
पैकेट अथवा राशन बांटते हुए फोटो खींचकर उसे सार्वजनिक करना शर्मनाक है। ज्ञातव्य यह भी है कि महामारी के नाजुक वक्त पर कुछ लोगों ने मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर खुद का घर भरना शुरू कर दिया है।
पटवारी और पार्षद पर धांधली का आरोप
काशीपुर(उद संवाददाता)। आर्थिक सहायता हेतु निर्धन परिवारों को चिन्हित करने के नाम पर राजस्व कर्मी (पटवारी)ग्राम प्रधान अथवा पार्षद से मिलकर व्यापक धांधली में लिप्त बताए जा रहे जा रहे हैं। वार्ड नंबर 11 टांडा उज्जैन मैं तैयार हो रही सूची में ऐसे तमाम नाम अंकित कराए जाने की सूचना है जो सरकारी कर्मचारी हैं अथवा भौतिक संसाधनों से लैस कोठियों वाले हैं। पार्षद के इस कृत्य से लोगों में रोष है। यह कोई एक वार्ड की बात नहीं है शहर के लगभग सभी वार्डों मैं पटवारी व पार्षद ने मिलकर मजलूमो का हक धन्ना सेठों की झोली में डाल दिया।
किरायेदारों से हो रहा है भेदभाव
काशीपुर(उद संवाददाता)। प्रशासन लोगों को आर्थिक सेवा पहुंचाने में भेदभाव कर रहा है। बता दें कि काशीपुर क्षेत्र में हजारों की तादाद में परिवार किराए की जिंदगी बसर कर रहा है। कोरोना वायरस की खतरे के कारण किराए की जिंदगी बसर कर रहे परिवारों पर भी संकट का पहाड़ टूटा। ऐसे परिवारों की ओर प्रशासन की निगाह नहीं है। लोगों का आरोप है कि खाने के पैकेट राशन वितरण अथवा आर्थिक सहायता देने के नाम पर किरायेदारों से भेदभाव का बर्ताव किया जा रहा है जबकि ऐसे नाजुक वक्त पर इंसानियत का तकाजा होना चाहिए।

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