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कोश्यारी की अनिच्छा से अन्य दावेदारों की बढ़ी इच्छा

रुद्रपुर। नववर्ष का आगमन हो चुका है और इसके साथ ही वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का बिगुल अब बस बजने ही वाला है। पूरे देश ही नहीं वरन पूरे विश्व की निगाह इस बार भारत में होने वालेे लोकसभा चुनाव पर है। एक ओर जहां भाजपा का पूरा दारोमदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केन्द्रित रहेगा वहीं कांग्र्रेस समेत तमाम अन्य विपक्षी दल महागठबंधन बनाने की जुगत में लगे हुए हैं ताकि इस महागठबंधन के जरिए लोकसभा चुनाव की वैतरिणी पार की जा सके। लेकिन यह लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए भी आसान नहीं होगा। क्योंकि हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनाव दृष्टिगत रूप से अलग अलग होते हैं। जिस पर भाजपाई अब भी आशान्वित हैं कि 2019 का लोक सभा चुनाव भाजपा के पक्ष में जायेगा और पुनः देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी बनेंगे। पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में गयी थीं जिनमें नैनीताल उधमसिंहनगर सीट से पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी सांसद बनकर संसद में पहुंचे थे लेकिन अब वर्तमान सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने यह लोकसभा चुनाव लड़ने की अनिच्छा जता दी है। क्योंकि श्री कोश्यारी कद और पद दोनों ही लिहाज से अन्य भाजपा नेताओं से काफी वरिष्ठ हैं ऐसे में उनकी दावेदारी के रहते हुए सम्भवतः संगठन भी उन्हें नकार नहीं सकता था लेकिन अब श्री कोश्यारी ने चुनाव लड़ने की अनिच्छा जता दी है जिसका कारण संभवतः उनकी बढ़ती उम्र या स्वास्थ्य कारणों का हवाला है लेकिन श्री कोश्यारी के मैदान में न होने के चलते नैनीताल उधमसिंहनगर लोक सभा सीट से चुनाव लड़ने वालों की फेहरिस्त लम्बी होती जा रही है। इनमें पूर्व में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट,पूर्व सांसद बलराज पासी, रूद्रपुर विधायक राजकुमार ठुकराल, किच्छा विधायक राजेश शुक्ला, खटीमा विधायक पुष्कर सिंह धामी के नाम हवाओं में तैर रहे थे लेकिन अब श्री कोश्यारी के इंकार के बाद काबीना मंत्री और बाजपुर विधायक यशपाल आर्य ने भी नैनीताल उधमसिंहनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता दी है। चूंकि भाजपा नेताओं का मानना है कि नैनीताल संसदीय क्षेत्र का माहौल भाजपा के पक्ष में है और इस मर्तबा भी यह सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। यह बात अलग है कि इस संसदीय सीट से कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत,
नेता प्रतिपक्ष इन्दिरा हृदयेश,पूर्व स्वास्थ्यमंत्री तिलकराज बेहड़ और पूर्व सांसद महेंद्र पाल भी ताल ठोंक चुके हैं। पूर्व सीएम रावत लगातार नैनीताल क्षेत्र में कार्यकर्ताओं के साथ पहाड़ी व्यंजनों का लुत्फ उठाते हुए उन्हें सहेजने का प्रयास कर रहे हैं। इधर भाजपा के दावेदारों पर नजर डालें तो प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट विधानसभा का पिछला चुनाव अल्मोड़ा क्षेत्र से हार चुके थे और जिस प्रकार से वह नैनीताल संसदीय सीट से लगातार जुड़ते जा रहे हैं तो ऐसे में इन संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता कि श्री भट्ट भी इस सीट के प्रबल दावेदार हैं। पूर्व सांसद बलराज पासी ने इसी सीट से कांग्रेस के दिग्गज नारायण दत्त तिवारी को लोकसभा चुनाव में हराकर इतिहास रचा था और पुनः श्री पासी इस सीट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। जसपुर से लेकर खटीमा और रूद्रपुर से लेकर नैनीताल तक उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों की लम्बी फेहरिस्त है और श्री पासी लगातार कार्यकर्ताओं के सम्पर्क में रहते हैं। कार्यकर्ता भी उन्हें चुनाव लड़ाने को उत्साहित हैं। चूंकि श्री पासी का पार्टी ही नहीं वरन संघ में भी खासा प्रभाव है ऐसे में इंकार नहीं किया जा सकता कि वर्ष 2019 नैनीताल लोकसभा सीट से पासी सामने नजर आयेंगे। उधर जब पूर्व सीएम हरीश रावत ने नैनीताल सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की तो किच्छा विधायक राजेश शुक्ला भी सक्रिय हो गये। चूंकि इस विधानसभा चुनाव में पूर्व सीएम रावत को राजेश शुक्ला ने शिकस्त दी थी। जिस कारण राज्य की राजनीति में श्री शुक्ला के कद में भी खासा इजाफा हुआ है और उन्होंने भी खम ठोंककर यह कह दिया है कि यदि पूर्व सीएम रावत नैनीताल संसदीय सीट से चुनाव में उतरेंगे तो भाजपा संगठन उनके सामने चुनावी मैदान में उतरने का मौका दें। वहीं पिछले कुछ दिनों से रूद्रपुर के दो बार विधायक रहे राजकुमार ठुकराल ने भी इस कतार में खुद को शामिल कर लिया है। हालांकि पहले वह लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार करते रहे लेकिन अब उन्होंने भी नैनीताल उधमसिंहनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता दी है और गत दिवस ही उन्होंने इस संबंध में देहरादून पहुंचकर राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल से मुलाकात की और इस संसदीय सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जतायी। श्री ठुकराल का मानना है कि यदि संगठन ने उन्हें आशीर्वाद दिया तो वह यह सीट भाजपा की झोली में डालेंगे। श्री ठुकराल रूद्रपुर विधानसभा सीट से दूसरी बार विधायक बने हैं और उन्होंने दोनों बार कांग्रेस के दिग्गज नेता तिलकराज बेहड़ को चुनाव में हराया है। जिस कारण उनके भी कद में खासा इजाफा हुआ है। वाकपटुता और अपनी कार्यशैली को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहने वाले विधायक ठुकराल यदि इस लोकसभा चुनाव में उतरते हैं तो यह देखना रोमांचक होगा कि छात्र जीवन की राजनीति से लेकर विधानसभा तक की राजनीति तक कभी भी चुनाव न हारने वाले ठुकराल क्या इस मर्तबा भी यह सिलसिला कायम रख सकेंगे? वहीं खटीमा के विधायक पुष्कर सिंह धामी बेहद शांत व सरल स्वभाव के माने जाते हैं और पूर्व मुख्यमंत्री तथा सांसद भगत सिंह कोश्यारी के सबसे पसंदीदा विधायकों में से हैं। पूर्व में भी श्री कोश्यारी श्री धामी को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर चुके हैं। विधायक धामी लगातार अपनी विधान सभा क्षेत्र के लिए कार्य करते हैं और कार्यकर्ताओं में भी खासे लोकप्रिय हैं। उनकी मधुर शैली और मृदुल स्वभाव के सभी कायल हैं। बतौर विधायक रहते हुए उन्होंने क्षेत्र में अनेक विकास कार्य कराये हैं। यदि श्री कोश्यारी के चुनाव न लड़ने के बाद संगठन यदि इस बाबत श्री कोश्यारी से उनकी राय लेगा तो निश्चित तौर पर माना जा रहा है कि श्री कोश्यारी अपने उत्तराधिकारी के रूप में श्री धामी को ही प्रमोट करेंगे। वहीं गत दिवस काशीपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में काबीना मंत्री और बाजपुर विधायक यशपाल आर्य ने भी नैनीताल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता दी है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी उन पर विश्वास करती है तो वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावी समर में वह उतरने को तैयार हैं। श्री आर्य का मानना है कि इस संसदीय सीट पर भाजपा विधायकों का वर्चस्व है और वह अपनी क्षमता का उपयोग लोकसभा चुनाव में कर सकते हैं। श्री आर्य का कहना है कि वह लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पूर्ण रूप से तैयार हैं। श्री आर्य बाजपुर सीट से विधायक हैं और सरकार में काबीना मंत्री हैं। उनका राजनैतिक कैरियर कई दशकों का रहा है और वह बड़े पदों पर भी विराजमान रहे हैं। ऐसे में संगठन श्री आर्य को भी एकदम से नहीं नकार सकता। कुल मिलाकर नैनीताल उधमसिंहनगर संसदीय सीट से जिस प्रकार से भाजपा के आला नेताओं ने अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है उससे हाईकमान की पेशानी पर बल पड़ना लाजमी है और आने वाले दिनों में देखा जा सकता है कि इस बहुप्रतीक्षित नैनीताल संसदीय सीट से भाजपा किस चेहरे को जनता के सम्मुख खड़ा करती है जो विशेषतया कार्यकर्ताओं और जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह से खरा उतर सके।

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