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घोटाले में ईओ,चेयरमैन सहित कई अधिाकारी और जनप्रतिनिधि दोषी

शक्तिफार्म।राजीव गांधी आवास योजना के लाभार्थियों को न देकर सरकारी धन का दुरूपयोग किये जाने के मामले में न्यायालय ने शक्तिगढ़ की ईओ बोर्ड चेयरमैन सहित तमाम अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और तत्कालीन बैंक मैनेजर को दोषी पाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे दिये हैं। शिकायत कर्ता प्रेम कुमार अरोरा और रमेश राय ने बताया कि राजीव गांधी आवास योजना में 504 लाभार्थी थे जिन्होंने स्वयं आवास का निर्माण करना था । यह योजना केंद्रं व राज्य सरकार की थी। इस योजना के तहत 298 आवासों का कार्य ठेकेदारों के जरिए बिना टेंडर के प्रारम्भ करा दिया गया लेकिन यह आवास कार्य पूरा नहीं हुआ और इसमें कई अनियमितताएं पायी गयीं जिसको लेकर उन्होंने कई बार धरना प्रदर्शन किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई जिस पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली।मामले को संज्ञान में लेते हुए न्यायालय ने 56 दिनों में इस मामले के निस्तारण के आदेश दिये थे। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं की गयी। जिस पर शिकायतकर्ता अरोरा और राय पुनः न्यायालय गये। जिस पर न्यायालय ने डीएम को जांच के आदेश दिये। न्यायालय के आदेशों के उपरान्त जांच कमेटी ने इस प्रकरण की विस्तृत जांच की। इस जांच में प्रथम दृष्ट्या नगर पंचायत शक्तिगढ़ की राजीव आवास योजना में प्रशासनिक, वित्तीय व तकनीकी अनियमितताएं पायी गयीं और जांच में नगर पंचायत शक्तिगढ़ के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी जयवीर सिंह राठी, वर्तमान अधिशासी अधिकारी सरिता राणा, बोर्ड चेयरमैन सुकांत ब्रह्म, लिपिक सुरेश सिंह बाबू, तत्कालीन अवर अभियन्ता रावेंद्र पाल सिंह, बोर्ड सदस्य वार्ड 1 श्रीमती सगुन गुप्ता, वार्ड 2 उपेंद्र सिंह, वार्ड 3 श्रीमती मीना सरकार,वार्ड 4 कालाचांद दास, संजीव गुप्ता पुत्र बद्रीप्रसाद गुप्ता, ठेकेदार कैलाश चन्द माहेश्वरी, रमेश मिश्रा, जसविंदर सिंह, सुनील अरोरा, हरविलास, अशोक कुमार और बैंक के तत्कालीन मैनेजर सिद्धार्थ कुमार को दोषी पाते हुए उत्तरदायित्व निर्धारित किया गया है। जांच कमेटी ने दोषियों के खिलाफ नियमानुसार धनराशि वसूल करने और कार्रवाई के आदेश दे दिये हैं।

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