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भवाली। कोरोना काल में दो साल तक स्थगित रहे कैंची धाम के स्थापना दिवस पर इस बार भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही कैंची धाम में भक्तों की कतारें लग गयी। स्थापना दिवस पर कैंची धाम में मंदिर को रंग बिरंगे बिजली झालरों से सजाया गया है। मंदिर समिति व प्रशासन स्थापना दिवस की तैयारियों में पिछले कई दिनों से जुटा हुआ था। मेले में सुबह चार बजे से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे। दोपहर बाद तक यह संख्या लाखों में पहुंच गयी। देर शाम तक श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहेगा। बाबा के जयकारों के साथ बाबा के भत्तफों ने कतारबद्ध होकर मंदिर परिसर में प्रवेश किया। मालपुए का प्रसाद लेकर बाबा के जयकारों के साथ पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।मेले के मद्देजनर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये हैं। मेले की सुरक्षा के लिए मंदिर परिसर के हर तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। कैंची धाम को जीरो वाहन जोन बनाया गया है। खैरना से आने वाले वाहन पनिराम ढाबे, भवाली से आने वाले वाहन जंगलात बैरियर तक ही पहुंचे। नई व्यवस्था के अनुसार हल्द्वानी से अल्मोड़ा- पिथौरागढ़ को जाने वाले भारी वाहन, यात्री वाहन व निजी वाहन 14 जून की शाम 5 बजे से खुटानी मोड़ भीमताल से, पदमपुरी, पोखराड़-कसियालेख-शीतला-मौना-ल्वेशाल होते हुए क्वाटब को डायवर्ट किये जा रहे हैं। जबकि नैनीताल से अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ को जाने वाले ऐसे ही वाहन भवाली के रामगढ़ तिराहे से मल्ला- तल्ला रामगढ़, नथुवाखान होते हुए क्वारब को डायवर्ट किये जा रहे हैं। इसी प्रकार अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ से हल्द्वानी की ओर आने वाले वाहन भी इसी मार्ग से लौट रहे हैं। दूसरी ओर रानीखेत से आने वाले ऐसे ही वाहनों को खैरना पुल से क्वाटब होते हुए मौना- ल्वेशाल-पदमपुरी से खुटानी बैंड के रास्ते भीमताल को डायवर्ट किया जा रहा है। कैंची धाम में जगह-जगह लंबा जाम लगने से श्रद्धालुओं को समस्या का सामना करना पड़ा। एसएसपी पंकज भट्ट को भी जाम में फंसे रहे। भवाली और खैरना की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को चार किमी की लाइन में लगकर कैंची धाम में प्रवेश मिला। श्रद्धालु बाबा नीम करौली महाराज के दर्शन के साथ मालपुए का प्रसाद पाकर खुश नजर आए। साथ ही श्रद्धालु बाबा के जयकारे के साथ मंदिर परिसर में प्रवेश करते रहे। मंदिर में मालपुए बनने का काम 12 जून से चल रहा था। बता दें वर्ष 1964 से कैंचीधाम में 15 जून को विशाल भंडारा लगता आ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भत्तफजनों को मालपुए दिए जाते हैं।

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