February 14, 2026

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आखिर बिना चेहरे के हार का बदला कैसे लेगी कांग्रेस?

प्रीतम का नेतृत्व बरकरार,सीएम बनने की चिंता छोड़े कांग्रेस के सभी नेताः धस्माना
देहरादून(उद ब्यूरो)। उत्तराखंड में कांग्रेस नेताओं में आपसी मतभेद सुलझाने की कवायद शुरू हो गई है। इतना ही नहीं आगामी 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व पार्टी में सीएम कैंडिडेट की लॉबिंग भी तेज हो गई है। कांग्रेस संगठन ने बागी नेताओं की घर वापसी का दांव खेला है। बागी नेताओं की वापसी को लेकर शुरू हुए घमासान के बीच जहां पार्टी में सीएम पद के लिये आपसी बयानबाजी शुरू हो गई जबकि चुनावी हार का जिम्मेदार खुद को मानते हुए पूर्व सीएम हरीश रावत समेत उनके समर्थक भी सोशल मीडिया के जरिये खुलकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विरोधियों को घेरने का प्रयास करने लगे है। सोशल मीडिया पर घमासान के बीच अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि कांग्रेस संगठन में किसी प्रकार का फेरबदल हो रहा है और न ही पार्टी अभी किसी को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने जा रही है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे है कि आखि कांग्रेस हार का बदला लेने के लिये किसका चेहरा सामने रखेगी। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के उत्तराखंड दौरे के बाद प्रदेश में सत्तासीन भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट दिखाई दे रही कांग्रेस के नेताओं में तब घमासान शुरू हो गया जब पार्टी नेतृत्व में बदलाव की मांग उठा दी गई। हांलाकि प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के समक्ष खुद प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने उनके नेतृत्व को बरकरार रखने का ऐलान कर दिया था। माना जा रहा है कि पार्टी में गुटबाजी को लेकर मचाया जा रहा घमासान दरअसल भाजपा को भांपने के लिये किया जा रहा है। जिस प्रकार कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की अलग अलग राह पर निकल रहे है उससे कहीं न कही कांग्रेस अपने मंसूबों को अंजाम तक पहुंचाने का प्रयास करती हुई दिख रही है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे किशोर उपाध्याय राज्य के लोगाें को अपने वनाधिकार कानून बनाये जाने के मुद्दो को उठाकर प्रभावित कर रहे है। जबकि दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह गढ़वाल मंडल के दौरे पर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर रणनीतियां बनाने में जुटे हुए है। इधर कुमांऊ मंडल में भी नेता प्रतिपक्ष डा- इंदिरा हृद्येश ने पहाड़ से लेकर तरायी के विधानसभा क्षेत्र में पहुंचकर कांग्रेस को एकजुट करने का खाका तैयार किया है। ऐसे में देखा जाये तो चुनाव से पूर्व कांग्रेस संगठन के नेताओं की जुगलबंदी कहीं न कही सत्तासीन भाजपा के विजय रथ को रोकने में कामयाब होने की जद्दोजहद भी मानी जा रही है। लिहाजा आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने बागी नेताओं की वापसी के सहारे कांग्रेस भाजपा का तख्तापलट करने की रणनीती बना रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो प्रचंड बहुमत से काबिज भाजपा को चुनौती देने के लिये कांग्रेस को भले ही चुनाव में एंटीइनकमबैक्सी का सहारा मिल सकता है लेकिन जि प्रकार आम आदमी पार्टी ने अपनी सियासी सक्रियाता बढ़ाई है उससे प्रदेश के राजनीतिक समीकरण बिगड़ सकते है। बहरहाल कांग्रेस के लिये अब गुटबाजी को थामने के लिये सभी नेताओं को एकराय होकर आगे बढ़ना होगा। इधर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि 2022 के चुनाव को लेकर कांग्रेस प्रदेश में पूरी तरह एकजुट है। चुनाव से पहले ही संगठन में वर्चस्व की जंग और गुटबंदी को लेकर मीडिया के सवालों के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री ने गुटबाजी से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। उनसे जुड़े हुए व्यत्तिफ़यों की भावना का वह सम्मान करते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस महासचिव हरीश रावत के नेतृत्व में 2022 का चुनाव लड़ने को लेकर दो दिन पहले उनके समर्थक नेताओं की ओर से दिए गए बयानों के बाद प्रदेश संगठन की ओर से धस्माना मीडिया के सामने आए। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि 2022 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने, सभी पार्टी कार्यकर्त्ताओं की यही भावना होनी चाहिए। मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसकी चिंता पार्टी हाईकमान पर छोड़ देनी चाहिए। अभी से यह बहस छेड़कर जनता में गलत संदेश जा रहा है कि सारी चिंता मुख्यमंत्री बनने की हो रही है। धस्माना की टिप्पणी को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ऽेमे पर पलटवार के रूप में देऽा जा रहा है। धस्माना ने कहा कि इस समय पार्टी संगठन का पूरा ध्यान जनता से जुड़े अहम मुद्दों बेरोजगारी व महंगाई के िऽलाफ व्यापक जन संघर्ष करने पर है। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह इसी उद्देश्य से पूरे राज्य का दौरा कर रहे हैं। राज्य का हर वर्ग आज त्रिवेंद्र सरकार की युवा, छात्र, महिला व किसान विरोधी नीतियों से आक्रोशित है। सब कांग्रेस से उम्मीद बांधे हुए हैं। प्रीतम सिंह की पहली प्राथमिकता जन उम्मीदों के अनुरूप कांग्रेस सरकार बनाना है।

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