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लव जिहाद पर उत्तराखंड में फिर छिड़ी बहस!

प्रदेश में ठोस कानून लागू करने की तैयारी,मुख्य सचिव को सौंपी रिपोर्ट
देहरादून(उद ब्यूरो)। देश के कई राज्य महिलाओं के प्रति क्रूरता की घटनाओं का सबब बन चुके है। आये दिन बेटियों को दरिंगी का शिकार होना पड़ रहा है जिस पर अंकुश लगाने के लिये ठोस कानून बनाने के साथ ही जनजागरूकता फैलाने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश के बाद अब देवभूमि उत्तराखंड में राज्य की त्रिवेंद्र सरकार ने भी अब उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम में अंतरधार्मिक प्रेम विवाह के खिलाफ कानून में संशोधन करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि देश के अधिकांश राज्यों में सामिजक वर्गो ने बेटियों की सुरक्षा के लिये कानून बनाने का स्वागत किया है और इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है। देश में पहली बार यूपी के सीएम योगी आदित्यानाथ ने सबसे पहले इस संवेदनशील मुद्दे के राजनीतीकरण पर विराम लगाते हुए लव जिहाद के खिलाफ ठोस कानून लागू करने का अभूतपूर्व फैसला ले लिया है। अधिकांश वर्ग इस कानून को प्रेम संबंधों के प्रति कठोर व्यवहार मान रहे हो परंतु आम लोगाें की राय में यह बहन और बेटियों को सुरक्षा देने वाले अधिकार के लिये मील का पत्थर साबित हो सकता है। प्रेम विवाह के प्रति सभी वर्गो में धार्मिक स्वतंत्रता के लिये संवौधानिक अधिकार भी दिये गये है। इस कानून में जिलाधिकारी से अनुमति के बाद ही विवाह को मान्यता दी जायेगी। बहरहाल उत्तराखंड में धर्म परिवर्तन कानून को और सख्त बनाने के साथ ही समाज कल्याण विभाग में अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन की व्यवस्था को बदलने पर प्रदेश सरकार ने विचार शुरू कर दिया है। समाज कल्याण सचिव एल फैनई ने अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव ओमप्रकाश को सौंप दी है। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तफ़ रिपोर्ट के साथ उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन के संबंध में लागू किए गए अध्यादेश का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद आगे कदम उठाए जाएंगे। अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर आगे फैसला लिया जाएगा। लव जिहाद को लेकर देश में छिड़ी बहस के बीच टिहरी जिले में अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन राशि के प्रावधान पर सवाल खडे़ करते हुए प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी ने प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। एक ओर मार्च 2018 में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम में जबरन, प्रलोभन, जानबूझकर विवाह या गुप्त एजेंडे के जरिये धर्म परिवर्तन को गैर जमानती अपराध घोषित किया गया है दूसरी ओर समाज कल्याण विभाग में अंतरधार्मिक विवाह को प्रोत्साहन देने को 50 हजार रुपये देने का प्रविधान है। बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराने के मामले में पकड़े जाने पर एक वर्ष से लेकर पांच वर्ष तक जेल भेजा जा सकेगा। अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के मामले में न्यूनतम दो वर्ष की जेल व जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। इन दोनों व्यवस्थाओं को लेकर निशाने पर आई प्रदेश सरकार ने समाज कल्याण सचिव को उत्तफ़ प्रकरण की जांच सौंपी थी। मुख्य सचिव ने समाज कल्याण सचिव से जांच रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि टिहरी के जिला प्रभारी समाज कल्याण अधिकारी के मामले में कार्रवाई पर फैसला रिपोर्ट के अध्ययन के बाद किया जाएगा। अंतरधार्मिक विवाह को प्रोत्साहन करने की व्यवस्था के बारे में भी उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम में संशेसन के साथ ही उत्तर प्रदेश में हाल ही में इस संबंध में लाए गए अध्यादेश का भी अध्ययन किया जा रहा है जिसमें गैरजमानती अपराध के साथ ही दस वर्ष तक जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।

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