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योगी आदित्यनाथ ने कहा: सत्यमेव जयते,षडयंत्रकारी माफी मांगे,इकबाल अंसारी ने कहा-इस मामले को अब समाप्त करना चाहिए

लखनऊ। बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले का रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शिवसेना नेता संजय राउत समेत कई नेताओं ने स्वागत किया है। वहीं, बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने भी फैसले का स्वागत किया है। इकबाल अंसारी ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, हमने नवंबर के फैसले का सम्मान किया था और अब हम यहां भी वही कर रहे हैं। इस मामले को अब समाप्त करना चाहिए, इसके 28 साल हो गए हैं। आगे बढ़ना चाहिए।आरोपी बहुत बुजुर्ग हैं, यह फैसला उन्हें राहत भी देगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ की विशेष अदालत द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह, डा। मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 32 लोगों के किसी भी षडड्ढंत्र में शामिल न होने के निर्णय का मैं स्वागत करता हूं। इस निर्णय से यह साबित हुआ है कि देर से ही सही मगर न्याय की जीत हुई है। वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सत्यमेव जयते के अनुरूप सत्य की जीत हुई है। यह फैसला स्पष्ट करता है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर वोट बैंक की राजनीति के लिए देश के पूज्य संतों भारतीय जनता पार्टी के नेताओं, विश्व हिंदू परिषद से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों को बदनाम करने की नीयत से से उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर बदनाम किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस षडड्ढंत्र के लिए जिम्मेदार देश की जनता से माफी मांगे। वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, किंतु पराजित नहीं। आज एक बार फिर सत्य की जीत हुई है। भारतीय न्यायपालिका की जय।
जिलानी ने कहा,हाईकोर्ट में जाएगा मामला
नई दिल्ली। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा है कि अदालत ने साक्ष्यों को नजरअंदाज कर दिया और सभी अभियुत्तफों को बरी कर दिया। उन्होंने साथ ही कहा कि अब इस मामले को उच्च न्यायालय में ले जाया जाएगा। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने मामले में आए फैसले को मजाक बताया है. उन्होंन ट्वीट कर कहा कि यह न्याय का मजाक है. बाबरी मस्जिद के विध्वंस का आपराधिक अभियोग जिन लोगों पर था वे सब बरी हो गए. एक मस्जिद खुद गिर गई? उस समय की सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने इसे कानून का भयावह उल्लंघन बताया था।अब ये फैसला! शर्मनाक. वहीं एआईएमआईएम नेता ओवैसी ने एक शेर ट्वीट किया है -वही कातिल, वही मुंसिफ अदालत उस की. वो शाहिद बहुत से फैसलों में, अब तरफदारी भी होती है।

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