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नहीं रहे उत्तरांचल दर्पण के मुखिया हरनाम दास सुखीजा

उत्तरांचल दर्पण ब्यूरो
रूद्रपुर। उत्तरांचल दर्पण परिवार के मुखिया एवं शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी श्री हरनाम दास सुखीजा का मंगलवार देर शाम निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी। विभिन्न राजनैतिक सामाजिक संगठनों एवं मीडिया से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। वरिष्ठ समाजसेवी हरनाम दास सुखीजा पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। मंगलवार शाम को अचानक उनकी तबियत बिगड़ गयी। उन्हें उपचार के लिए मेडिसिटी अस्पताल ले जाया गया। जहां उनका निधन हो गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी। निधन का समाचार मिलते ही श्याम टाकीज रोड स्थित उनके निवास पर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लग गया। बुधवार को रामबाग श्मशान घाट पर गमगीन माहौल में स्व0 सुखीजा का अंतिम संस्कार किया गया। उनकी शव यात्रा में सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। उनकी चिता को बड़े पुत्र श्याम श्याम सुंदर सुखीजा ने मुखाग्नि दी। इस दौरान स्व0 सुखीजा को श्रद्धांजलि देने वालों में विधायक राजकुमार ठुकराल, पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़, मेयर रामपाल सिंह, स्वामी शिवानन्द महाराज, सुरेश गंगवार,बलवीर सुखीजा, विकास सुखीजा, राजीव आहूजा, किशन लाल आहूजा, राजेन्द्र कक्कड़, अर्पित राज कक्कड़, मनीष बतरा, अक्षय गुम्बर, शुभम गुम्बर, मोहित सुखीजा, कपीस सुखीजा, सारांश सुखीजा, वेद ठुकराल, विजय भूषण गर्ग, गुलशन छाबड़ा, सीए अशोक सिंघल, रोहताश बत्रा, हरीश पनेरू, विनीत बत्रा, पुष्कर जैन, राजेश ग्रोवर, आशीष छाबड़ा, सुभाष छाबड़ा, सोनू अनेजा, जगदीश तनेजा, राजेश जग्गा, विजय सुखीजा, सुरेन्द्र जग्गा, रजीव जग्गा, मनीष अग्रवाल, गुरमीत सिंह, संजय ठुकराल, बलवंत अरोरा, राजीव सुखीजा, राजीव कामरा, दिनेश भाटिया, राकेश भुड्डी, राजेन्द्र सुखीजा, संजीव सुखीजा, हरवंश लाल सुखीजा, इन्द्रजीत सिंह, जिला सूचना अधिकारी बीसी तिवारी, संजय कुमार, बब्बन सिंह, राकेश कालड़ा, अशोक कालड़ा, हंसराज घई, नरेश राय, सुशील गावा, राजकुमार फुटेला, भाष्कर पोखरियाल, मुकेश गुप्ता, संदीप जुनेजा, डा0 संजीव शर्मा, डा0 अजय अरोरा, सन्नी छाबड़ा, रोहित आहूजा, रूपेश कुमार सिंह, अजय चड्डा, राजीव चावला, ललित शर्मा, देवेन्द्र शर्मा, रमेश धींगडा बॉबी, सुरेन्द्र गिरधर, केवल कृष्ण बतरा, सुरेन्द्र तनेजा, आनन्द शर्मा, बंटी कोली, राज सक्सेना, दिलीप अधिकारी, जगमोहन अरोरा, संजीव अरोरा, कस्तूरी लाल तागरा, अनुभव चैधरी, अजय नारायण सहित सैकड़ों लोग शामिल थे। स्व0 सुखीजा के निधन पर जिलाधिकारी डा0 नीरज खैरवाल ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा उनके निधन से पत्रकार जगत मे अपूर्ण क्षति हुई है। उनके निधन पर सूचना कार्यालय मे 2 मिनट का मौन रखकर उनके शोक संतृप्त परिवार को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की। शोक संवेदना मे बी0सी0तिवारी, संजय कुमार, बब्बन राम, विजय कुमार, प्रेम प्रकाश, पूनम आर्या आदि उपस्थित थे।
जीवन भर धार्मिक और सामाजिक कार्यो में लगे रहे स्व0 सुखीजा
पर्यावरण और गौ सेवा के लिए रहे समर्पित
रूद्रपुर। 72 वर्षीय श्री हरनाम दास सुखीजा जीवन के अंतिम क्षणों तक धर्म कर्म और समाजसेवा के कार्यो में लगे रहे। पर्यावरण के प्रति उनका विशेष लगाव साथ ही गौ सेवा को भी उन्होंने अपने जीवन का हिस्सा बनाया था। स्व0 सुखीजा अपने पिता श्री ज्वाला राम के साथ भारत विभाजन के बाद अपने परिवार के साथ गदरपुर के सरदारनगर में आकर बस गये थे। युवावस्था से ही उनमें संघर्ष का जज्बा था। खेती किसानी के बाद उन्होंने कपड़े का व्यापार शुरू किया। सरदारनगर से आकर वह परिवार के साथ गूलरभोज रोड में आकर बस गये और यही पर कपड़े का कारोबार शुरू किया। वर्ष 1984 में गदरपुर को छोड़कर वह रूद्रपुर के इंदिरा कालोनी में आकर बस गये। इस बीच उन्होंने कई पत्र पत्रिकाओं में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में सेवायें दी और इसके साथ साथ सब्जी मण्डी के पास कपड़े का कारोबार भी शुरू किया। तीन बेटियों और दो बेटों की शादी के बाद वह पिछले कई वर्षों से परिवार के साथ श्याम टाकीज रोड पर ही रह रहे थे। लेखन में रूचि होने के कारण वह अपनी स्वयं की पत्रिका निकालना चाहते थे। वर्ष 1997 में उनके संरक्षण में उनके पुत्रों ने उत्तरांचल दर्पण समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया जो आज एक वट वृक्ष का रूप ले चुका है। स्व0 सुखीजा धार्मिक और सामाजिक होने के साथ साथ पर्यावरण प्रेमी भी थे। उनके सानिध्य में दर्पण परिवार पिछले कई वर्षों से कांवरियों की सेवा में भंडारा आयोजित करता आ रहा है। इसके अलावा समय समय पर गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग के साथ ही विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भी वह बढ़ चढ़कर भागीदारी करते थे। उनके अच्छे संस्कारों की बदौलत ही उनके पुत्रों ने भी समाज में एक अलग पहचान बनाकर धार्मिक और सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाते हुए पत्रकारिता जगत में एक अलग पहचान कायम की। वर्ष 2013 में बड़े पुत्र तिलकराज सुखीजा के आकस्मिक निधन के बाद स्व0 सुखीजा बुरी तरह टूट चुके थे। लेकिन फिर भी उन्होंने खुद को कमजोर नहीं होने दिया बल्कि पूरे परिवार को वह हिम्मत देते रहे। बड़े पुत्र तिलकराज सुखीजा से उन्हें विशेष लगाव था। निधन से पूर्व कई बार वह उत्तरांचल दर्पण कार्यालय में आकर अपने दिवंगत पुत्र को याद करके भावुक हो जाते थे। लेकिन उन्होंने कभी इस दुख को अपने उपर हावी नहीं होने दिया और धार्मिक सामाजिक कार्यों में हमेशा लगे रहे। दिवंगत हरनाम दास सुखीजा पर्यावरण से विशेष लगाव था फुर्सत के समय में पेड़ पौधों की सेवा करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। इसके अलावा गौ सेवा भी उनकी दिनचर्या में शामिल था। बिमार होने के बावजूद वह गायों की सेवा नहीं भूलते थे। अंतिम क्षणों में भी वह गायों की सेवा नहीं भूले।
जाते जाते सबको कह गये ‘राम-राम’
रूद्रपुर। उत्तरांचल दर्पण के मुखिया श्री हरनाम दास सुखीजा पिछले करीब एक वर्ष से अस्वस्थ थे लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी अपनी इच्छा शक्ति को कमजोर नहीं होने दिया। पिछले कुछ समय से वह ठीक से चलने फिरने में भी असमर्थ थे फिर भी वह हमेशा सुबह शाम घर के आस पास टहलने और अपने आस पड़ोस के लोगों से मिलने की जिद पकड़ लेते थे। उनकी जिद के चलते ही उन्हें सुबह शाम के समय उत्तरांचल दर्पण परिसर और उसके पास व्हील चेयर पर घुमाया जा रहा था। बुधवार को अंतिम सांस लेने से पहले शाम के समय भी वह रोजाना की तरह व्हील चेयर पर घूमने निकले थे। इस दौरान उन्होंने पड़ोस के कई लोगों से हाल चाल पूछा और राम-राम बोलकर विदाई ली। इसके कुछ घंटे बाद ही उनका निधन हो गया।
व्यवहार के कायल थे लोग
रूद्रपुर। हरनाम दास सुखीजा जी को जितने लोग भी करीब से जानते हैं वह उनके व्यवहार के कायल थे। हंसमुख और मिलनसार और सरल स्वभाव के चलते वह किसी का भी दिल जीत लेते थे। उत्तरांचल दर्पण परिवार के संरक्षक रूप में समय समय पर अपने पुत्रों के साथ साथ उत्तरांचल दर्पण के स्टाफ का मार्ग दर्शन भी उन्हें मिलता था। वह सभी को धर्म कर्म और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते थे।उत्तरांचल दर्पण को शिखर तक ले जाने में निभाई अहम भूमिका
रूद्रपुर। उत्तरांचल दर्पण को आज जन जन तक पहुंचाने में स्व. हरनाम दास सुखीजा की अहम भूमिका रही। उनके मार्ग दर्शन में उनके पुत्रों ने उत्तरांचल दर्पण को आज इस मुकाम तक पहुंचाया। उत्तराचंल दर्पण के अब तक सफर में कई बार उतार चढ़ाव आये। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण कई बार समाचार पत्र को बंद करने तक की नौबत आ गयी। लेकिन श्री हरनाम दास सुखीजा ने बड़ी से बड़ी मुसीबत में भी हौंसला न छोड़ने और ईश्वर पर भरोसा रखने की जो सीख दी थी वह संघर्ष में हमेशा काम आयी। संघर्ष के दौर में उन्होंने अपने पुत्रों का न सिर्फ हौंसला बढ़ाया बल्कि एक पिता की सराहनीय भूमिका अदा करते हुए अपने पुत्रों को ईमानदारी और सच्चाई की राह पर चलने की प्रेरणा दी।यही वजह है कि आज उत्तरांचल दर्पण उत्तराखण्ड का नंबर वन सांध्य दैनिक के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। अस्वस्थ रहने के बावजूद वह दर्पण के स्टाफ से समय समय पर मिलकर उनका हौंसला बढ़ाते थे। विशाल वृक्ष की छांव की तरह उत्तरांचल दर्पण को उनका सानिध्य हमेशा मिलता रहा। आज उनके निधन से उत्तरांचल दर्पण को जो क्षति हुई है उसकी भरपाई करना मुश्किल है। उनकी कमी उत्तरांचल दर्पण परिवार को हमेशा खलती रहेगी।

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