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मुख्यमंत्री ने नहीं मनाया अपना जन्मदिन स्वयं पहुँचकर लिया हालात का जायजा : भारी वर्षा और भूस्खलन से प्रभावित देहरादून के मालदेवता और केसरवाला क्षेत्र में प्रभावित परिवारों से की मुलाकात

देहरादून(उद संवाददाता)। उत्तराखंड में देर रात्रि आपदा से कई क्षेत्रों में कर बरपा है। वहीं आज सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपना जन्मदिन भी नहीं मनाया और आपदाग्रस्त क्षेत्रों में पहुंचकर जनसेवा में जुटे रहे। सीएम धामी की कार्यप्रणाली की सराहना की जा रही है। ऐसे समय में जब अधिकतर लोग जन्मदिन जैसे अवसर को उत्सव और आयोजनों के साथ मनाते हैं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर यह साबित किया कि उनके लिए राजनीति सत्ता का नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है। सोमवार को अपने जन्मदिवस के दिन उन्होंने किसी भी प्रकार के समारोह से दूरी बनाते हुए दिनभर आपदा प्रभावित क्षेत्रोंका दौरा किया और जनता के बीच रहकर उनकी पीड़ा साझा की। लगातार हो रही भारी वर्षा और भूस्खलन से प्रभावित देहरादून के मालदेवता और केसरवाला क्षेत्रें में मुख्यमंत्री ने स्वयं पहुँचकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, उनका दुःख साझा किया और उन्हें हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया। स्थलीय निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासन को राहत व पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाए और जहां भूस्खलन की आशंका हो, वहां पर्यटकों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगाई जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित किया कि आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी विभाग पूर्णतः सतर्क और तत्पर रहें। केवल आदेश देना ही नहीं, बल्कि स्वयं घटनास्थल पर जाकर हालात की निगरानी करना मुख्यमंत्री की नेतृत्व शैली की एक विशेष पहचान बन गई है। जब उन्होंने प्रभावितों से सीधे बात की, तो लोगों के चेहरों पर विश्वास की एक नई रेखा उभर आई। स्थानीय निवासी रेखा देवी ने कहा कि जब हमने देखा कि मुख्यमंत्री खुद हमारे बीच हैं, तो लगा कि हम अकेले नहीं हैं। उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि सरकार हमारे साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह सिद्ध कर दिया है कि सच्चा नेतृत्व केवल विकास योजनाओं की घोषणाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह उन क्षणों में परखा जाता है जब जनता संकट में हो। उनका यह कर्मठ और समर्पित रूप, विशेषकर उनके जन्मदिवस जैसे व्यक्तिगत अवसर पर भी, जनता की सेवा को सर्वाेपरि रखने की भावना का जीवंत उदाहरण है।

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