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उत्तराखंड को 1200 करोड़ का पैकेज निराशाजनक : हरीश रावत ने पीएम मोदी के राहत पैकेज को बताया ऊंट के मुंह में जीरा

राज्य के 433 से ज्यादा ऐसे गांव हैं जो किसी भी समय भीषण आपदा की जद में आ सकते हैं
देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून पहुंचकर आपदा प्रभावितों के लिए 1200 करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया। लेकिन इस राहत पैकेज को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने निशाना साधना शुरु कर दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सीएम हरिश रावत ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा बताया। प्रदेश सरकार द्वारा मांगी गई राशि के सापेक्ष काफी कम वित्तीय सहायता उत्तराखंड को मिली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 सितंबर यानी कल देहरादून पहुंचकर जहां एक और आपदा प्रभावित लोग, आपदा प्रभावित वीर के दुख दर्द और पीड़ा को समझते हुए उनसे बातचीत की। उन्होंने तत्काल प्रभाव से 1200 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता की घोषणा भी की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो- दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार देने का ऐलान किया। लेकिन वहीं दूसरी पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने इसे नकाफी बताते हुए ऊंट के मुंह में जीरा बताया है। पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि पीएम के उत्तराखंड दौरे से आपदा पीड़ितों के लिए उचित राहत पैकेज और पुनर्वास की घोषणा की उम्मीद थी लेकिन केंद्र सरकार ने महज 1200 करोड़ की तात्कालिक राहत पैकेज का ऐलान कर खानापूर्ति की है। उत्तराखंड के प्रति मोदी जी के प्रेम और लगाव की पोल भी खुल गई है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, पौड़ी सहित धराली, थराली, कपकोट, पाबो कई क्षेत्रों में आपदा आई । जनता निराश है सरकार के राहत कार्यों से भी संतुष्ट नहीं है  जबकि कई आपदा पीड़ितों को आहेतुक राशि भी नहीं दी गई। पूर्व सीएम ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में आपदा पीड़ितों के लिए पुनर्वास और पुनर्निमाण के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाई गई लेकिन अब हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र सरकार को विशेष नीति बनाने की जरूरत है। हर वर्ष आपदा से प्रदेशवासी जूझ रहे है। जन हानि के साथ राज्य के संसाधनों और सड़कों को भारी क्षति पहुंच रही है। विकास कार्यो के साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी आवश्यक होती है। राज्य सरकार को आपदा प्रबंधन के साथ लोगों की आजीविका को व्यवस्थित करना होगा। इस आपदा में लोगों के खेत व आजीविका के साधन नष्ट हो गए हैं । कांग्रेस ने मांग की है कि आपदा की घड़ी में सरकार को लोगों के ऋण माफ करने चाहिए औऱ जलवायु परिवर्तन के हिसाब से मध्य हिमालय राज्यों के लिए केंद्र को एक अलग नीति बननी चाहिए।
केंद्र के पास क्या राष्ट्रीय रणनीति है, गांवों को पुनर्स्थापित करना चाहिए
पूर्व सीएम हरिश रावत का कहना है कि मध्य हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण जिस तरह से बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं उससे निपटने के लिए केंद्र के पास क्या राष्ट्रीय रणनीति है। आपदा में लोगों की संस्कृति, घर ,जंगल, खेत व आजीविका के साधन नष्ट हो गए हैं सरकार किस तरह से उन लोगों की आजीविका पुनर्स्थापित करेगी। 2014 की आपदा के बाद से मकान बनाने की लागत बढ़ गई हैं, और सरकार द्वारा आपदा राहत के तहत दी जाने वाली वितीय सहायताओं को भी बढ़ना चाहिए। उत्तराखंड में आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां ग्रामीण पीठ पर सामान लाद कर ले जाने को मजबूर हैं। राज्य के 433 से ज्यादा ऐसे गांव हैं जो किसी भी समय भीषण आपदा की जद में आ सकते हैं परंतु सरकार के पास 50 गांव बसाने की भी जमीन नहीं है। सरकार को जमीन का इंतजाम करके उन गांवों को पुनर्स्थापित करना चाहिए।

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