जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में ‘मनोवैज्ञानिक बढ़त’ के बाद कांग्रेस ने ‘डाले हथियार’
और भी दुष्कर हुई 2027 की कांग्रेसी राह,निर्वाचित जनप्रतिनिधियों एवं संगठन में एका बगैर बाउंस बैक असंभव
रुद्रपुर। जिला पंचायत उधम सिंह नगर की तीन प्रतिष्ठित सीटों पर धमाकेदार जीत हासिल करने से हासिल हुई मनोवैज्ञानिक बढ़त अंततः कांग्रेस के हाथों से फिसल गई ।जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की नामांकन तिथि आने तक हालात कुछ ऐसे बन पड़े कि, जो कांग्रेस जिला पंचायत की 12 सीटें जीतने के बाद एक समय भाजपा को सीधी चुनौती देती दिख रही थी, उसने जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दौड़ में हिस्सा ही नहीं लिया। नतीजतन भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष उम्मीदवार अजय मौर्या जिला पंचायत उधम सिंह नगर के अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित हुए। संपन्न पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने जिस तरीके से भाजपा से कुछ सीटें छीन ली थी और कुरैया, दुपहरिया और प्रतापपुर जैसी प्रतिष्ठा पूर्ण जिला पंचायत सीट पर भाजपा को पटखनी दी थी ,उससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल आसमान छूने लगा था और राजनीतिक हल्के में यह माना जाने लगा था कि जिला पंचायत की प्रतिष्ठा पूर्ण सीटों पर मिली जीत की यह संजीवनी 2027 के विधानसभा चुनाव की लड़ाई के लिए एक नया आत्मविश्वास और एक नई ताकत देगी,लेकिन निर्णायक समय आने तक कांग्रेस उन निर्दलीय जिला पंचायत सदस्यों को भी अपने साथ खड़ा नहीं रख सकी, जो शुरुआती दौर में कांग्रेस के साथ माने जा रहे थे। देखा जाए तो जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस के हथियार डालने की एक प्रमुख वजह यह रही कि, कांग्रेस की आशाओं के एकमात्र केंद्र तिलक राज बेहड़, महान भारतीय बल्लेबाज सुनील गावस्कर की ओपनिंग उतरने और अंत में नॉट आउट जाने जैसी पारी नहीं खेल सके। हालांकि किच्छा विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र की तीनों सीटें पार्टी की झोली में डालकर कांग्रेस की संभावनाएं उज्जवल जरूर कर दी थी, मगर स्थानीय पार्टी संगठन के सहयोग के अभाव और प्रदेश नेतृत्व द्वारा जिले के पंचायत चुनाव में रुचि न लेने के चलते, निर्णायक समय में वह भी कोई चमत्कार ना कर सके ।दरअसल, कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वर्तमान में कांग्रेस के पास जिला मुख्यालय में तिलक राज बेहड़ के अलावा ऐसा कोई नेता नहीं है, जो अपने दम पर किसी चुनाव का नतीजा पलट देने का माद्दा रखता हो ,लेकिन कांग्रेस का जिला संगठन बेहड़ के साथ खड़ा होने को तैयार नहीं है। जाहिर है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि और पार्टी संगठन में तालमेल और एक के अभाव में 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का बाउंस बैक कर पाना तनिक मुश्किल होगा। इसके अलावा पार्टी का जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बिना लड़े ही हथियार डाल देना पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल की दृष्टि से तो बेहद घातक है ही।
भाजपा में भी भीतर खाने कुछ सुलग रहा
रूद्रपुर। भारतीय जनता पार्टी ने उधम सिंह नगर जिला पंचायत के अध्यक्ष का पद भले ही अपने कब्जे में ले लिया हो, लेकिन स्थानीय भाजपा में भी भीतर खाने कुछ सुलग-सा रहा है और इसके प्रमाण कहीं ना कहीं अब स्पष्ट नजर आने लगे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के भाजपाई उम्मीदवार अजय मौर्या के नामांकन दािखल करने और निर्विरोध निर्वाचित होने पर विजय प्रमाण पत्र लेने तक के समूचे घटनाक्रम में रुद्रपुर विधायक और रुद्रपुर मेयर के बीच अंदर खाने चल रहे शीत युद्ध की झलक साफ देखने को मिली। भाजपा प्रत्याशी के नामांकन के दौरान मौजूद रहने वाले रुद्रपुर विधायक, भाजपा प्रत्याशी द्वारा विजय प्रमाण पत्र लेने और सोशल मीडिया चौनल को बाइट देने के दौरान नजर नहीं आए। जबकि रुद्रपुर मेयर विकास शर्मा समूचे सेलिब्रेशन को लीड करते दिखे। मजे की बात तो यह है कि इस दौरान भाजपा के उत्साही कार्यकर्ता केवल पुष्कर सिंह धामी जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे, पार्टी को जिंदाबाद कहने का उन्हें ख्याल नहीं रहा।
