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भंगा जिला पंचायत सीट पर दो बड़े दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर

बरा। भंगा जिला पंचायत सीट का चुनाव यू तो पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू गंगवार के इर्द-गिर्द घूम रहा है किंतु वास्तव में यह चुनाव दो बड़े दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। कोई मंच पर सार्वजनिक रूप से भले ही कुछ ना बोल रहा हो किंतु बंद कमरों में यह चर्चा है कि यह चुनाव उत्तराखंड के दो दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उधम सिंह नगर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी का रास्ता बरा से होकर निकलता है। बता दें कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से हुए पंचायत चुनाव के बाद से ही उधम सिंह नगर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर गंगवार परिवार का कब्जा रहा है पर इस चुनाव में मौजूदा हालात कुछ और ही है बता दे की भंगा जिला पंचायत सीट का लगभग 90% हिस्सा सितारगंज विधानसभा सीट का हिस्सा है और सितारगंज विधानसभा सीट से मौजूदा कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा विधायक हैं लिहाजा यह कहने में कोई गुरेज नहीं हे कि इस चुनाव के परिणाम का असर उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा कि सियासत पर भी सीधे तौर पर पड़ेगा । यहां पर गौर करने की बात यह भी है कि उधम सिंह नगर जनपद में भंगा जिला पंचायत सीट पर भाजपा द्वारा अधिकृत प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है। क्षेत्र की राजनीति को करीब से जानने वाले नेताओं को यह भली भांति जानकारी है कि इस सीट पर भाजपा ने अपना समर्थन किसी भी प्रत्याशी को क्यों नहीं दिया है। यह हाल तब है जब बीते दो विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा अब नजर डालते हैं भंगा जिला पंचायत सीट के मौजूदा चुनावी हालातो पर यहां कांग्रेस ने छात्र नेता रहे शाहनवाज की पत्नी बुसरा को मैदान में उतार रखा है इसे कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा माना जाए क्योंकि इस जिला पंचायत सदस्य सीट पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक फैसला ले सकते हैं जबकि दूसरी ओर नैनीताल उच्च न्यायालय की अधिवक्ता शिवांगी मोहन गंगवार भी मैदान में है। यह जगजाहिर है कि शिवांगी मोहन गंगवार निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ रही हैं जबकि उनका सियासी नाता भारतीय जनता पार्टी से है और तीसरी दमदार उम्मीदवार पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू गंगवार पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में है। भंगा जिला पंचायत सीट का बारीकी से सर्वेक्षण करने के बाद यह तो तय मना जा रहा है कि यह चुनाव रेनू गंगवार के इर्द-गिर्द घूम रहा है या यूं कह लीजिए कि इस चुनाव में जिसका भी मुकाबला होगा उसका मुकाबला रेनू गंगवार से ही होगा । यह हैरानी की बात जरूर है किंतु सत्य है कि इस जिला पंचायत सीट पर देहरादून से भी नजर रखी जा रही है राज्य गठन के बाद से ही पंचायत चुनाव में अपने सियासी दुश्मनों को चारों खाने चित करने वाले सुरेश गंगवार के सियासी दुश्मन भी इस चुनाव पर नजर बनाए हुए हैं यही नहीं सुरेश गंगवार के पक्ष का सबसे मजबूत खेमा जो उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा दखल रखता है वह सुरेश गंगवार की पत्नी रेनू गंगवार के चुनाव को लेकर पूरी तरह सजग है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पर एक नजर
पहला चुनाव- एनडी तिवारी सरकार के दौरान सुशीला गंगवार जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं ।
दूसरा चुनाव-भुवन चंद खंडूरी भाजपा सरकार के दौरान फिर सुशीला गंगवार जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं ।
तीसरा चुनाव-हरीश रावत कांग्रेस सरकार के दौरान ईश्वरी प्रसाद गंगवार जिला पंचायत अध्यक्ष बने ।
चौथा चुनाव-त्रिवेंद्र रावत भाजपा सरकार के दौरान रेनू गंगवार जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं।

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