Uttaranchal Darpan

Hindi Newsportal

आखिर कौन-कौन से व्यक्ति ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत अथवा जिला पंचायत का निर्वाचक होने और पंचायत चुनाव लड़ने के हैं पात्र ?

प्रत्याशियों के गले की फांस बन सकता है निर्वाचन सचिव का आदेश,कानून के जानकारों के अनुसार राज्य निर्वाचन सचिव राहुल कुमार गोयल का ताजा आदेश एकांगी,अस्पष्ट एवं आधा अधूरा
रुद्रपुर। उत्तराखंड में गतिमान पंचायत चुनाव प्रक्रिया में प्रतिभाग कर रहे ऐसे उम्मीदवार , जिन्होंने 6 माह पहले राज्य में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव में मतदान किया है, निर्वाचन आयोग के सचिव राहुल कुमार गोयल द्वारा जारी ताजा आदेश के बाद अगर यह खुशफहमी पाले हुए हैं, कि उपरोक्त आदेश के बाद किसी विरोधी द्वारा चुनौती दिए जाने पर उनका निर्वाचन पत्र अब निरस्त नहीं होगा, तो ऐसी खामख्याली पालना उनके लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। वह इसलिए क्योंकि, विधि विशेषज्ञों के अनुसार बीते रोज निर्वाचन आयोग सचिव राहुल कुमार गोयल द्वारा जारी आदेश उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम 2016 के निर्वाचक अर्हता संबंधी समस्त प्रावधानों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता। इसके अतिरिक्त यह एकांगी होने के साथ-साथ पंचायत अधिनियम में वर्णित निर्वाचक अनहर्ता की भी अनदेखी करता है तथा उच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने की दशा में यह बिल्कुल भी नहीं ठहर पाएगा। काबिले गौर है कि राज्य निर्वाचन सचिव ने बीते रोज एक आदेश जारी कर यह स्पष्ट किया था कि गतिमान पंचायत राज चुनाव में प्रत्याशियों के नामांकन पत्रें की जांच के संबंध में उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 10 (ख)(1) ( प्रधान हेतु) धारा 9(3) धारा (54)3 धारा 91(3) के प्रावधान लागू होंगे। यहां पर हम अपने पाठकों को बता दें कि उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम 2016 की उपरोक्त सभी धाराएं केवल यह बताती हैं कि कौन-कौन से व्यक्ति ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत अथवा जिला पंचायत का निर्वाचक होने और पंचायत चुनाव लड़ने के पात्र हैं। उपरोक्त धाराओं से संलग्न वर्णित उपबंध यह नहीं बताते कि कौन व्यक्ति निर्वाचक नामावली में अपना नाम नहीं दर्ज करा सकेगा तथा कौन से व्यक्ति पंचायत चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे । यहां पर यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि उपरोक्त सभी धाराओं के अन्य उपबंधों में, जिनका कि राज्य निर्वाचन सचिव के आदेश में उल्लेख नहीं है, यह स्पष्ट उल्लिखत है कि कौन-कौन से व्यक्ति पंचायत चुनाव में प्रतिभाग नहीं कर सकेंगे। उदाहरण के लिए अधिनियम की धारा 10 (ख)(1) यह बताती है कि जिन व्यक्तियों का नाम ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में है वे प्रधान का चुनाव लड़ सकेंगे। इसी धारा में आगे यह स्पष्ट रूप से कहां गया है कि उक्त प्रावधान तभी लागू होंगे जब तक अन्यथा उपबंधित ना हो। अर्थात पंचायत अधिनियम का कोई अन्य प्रावधान, उन व्यक्तियों को जिनका नाम ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में है ,पंचायत का चुनाव लड़ने से रोकता है तो वह चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इसी प्रकार अधिनियम की धारा (54)3 यह बताती है कि कौन व्यक्ति क्षेत्र पंचायत का निर्वाचक होगा और चुनाव लड़ सकेगा। खास बात तो यह है कि इसी धारा का उपबंध 54(7) यह स्पष्ट प्रावधान करता है कि कोई भी व्यक्ति प्रादेशिक निर्वाचन नामावली में दो अलग-अलग स्थान में अपना नाम दर्ज करने का अधिकारी नहीं होगा। साथ ही धारा का उपबंध 54(8) यह भी बताता है कि वे व्यक्ति क्षेत्र पंचायत का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे, जिनका नाम नगर निगम नगर पंचायत अथवा छावनी परिषद क्षेत्र में दर्ज है। बात उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम के जिला पंचायत निर्वाचन संबंधी प्रावधानों की करें, तो अधिनियम की धारा 91(3) यह बताती है कि कौन जिला पंचायत क्षेत्र का मतदाता हो सकेगा और कौन चुनाव लड़ सकेगा, लेकिन इसमें भी एक परंतु है, जिसमें श्अन्यथा उपबंधित के सिवायश् वाक्य स्पष्ट रूप से वर्णित है। इसी धारा के उपबंध 91 (7) में यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी व्यक्ति राज्य की निर्वाचक नामावली में दो स्थानों पर निर्वाचक होने का पत्र नहीं होगा। इसी तरह धारा 91(8) स्पष्ट रूप से यह बताती है कि वे व्यक्ति जिनका नाम नगर निगम नगर पंचायत अथवा छावनी परिषद में दर्ज हैं ,जिला पंचायत का चुनाव लड़ने के अधिकारी नहीं होंगे। स्पष्ट है कि राज्य निर्वाचन सचिव राहुल कुमार गोयल के ताजा आदेश के बावजूद, ऐसे व्यक्ति प्रधान क्षेत्र पंचायत सदस्य अथवा जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे ,जिनका नाम नगर निगम निर्वाचित नगर पंचायत अथवा छावनी परिषद की मतदाता सूची में दर्ज है। राज्य निर्वाचन सचिव के ताजा आदेश की विसंगति को और भी स्पष्ट करने के लिए हम अपने पाठकों को बताना चाहेंगे कि वर्ष 2019 उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम की धारा 9 में संशोधन किया गया था तथा धारा 9(6) एवं धारा 9(7) जोड़कर ऐसे लोगों को, जिन लोगों के नाम नगर निकाय या शहरी क्षेत्रें की मतदाता सूची में हैं और वे वहां से अपना नाम कटाये बगैर अगर ग्राम सभाओं की वोटर लिस्ट में भी अपना नाम लिखा रहे हैं, तो उनको चुनाव लड़ने से वंचित किये जाने का प्रावधान किया गया है । जाहिर है कि पंचायत चुनाव लड़ रहे ऐसे किसी प्रत्याशी, जिसका नाम प्रदेश की निर्वाचक नामावली में एक से अधिक स्थान पर दर्ज है अथवा वह व्यक्ति नगर निगम नगर पंचायत अथवा छावनी परिषद का भी वोटर है ,का नामांकन पत्र अगर आपत्ति के बावजूद भी वैध ठहरा दिया जाता है, तो ऐसी कार्यवाही उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम 2016 के अन्य प्रावधानों के आलोक में उच्च न्यायालय द्वारा अवैध घोषित की जा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *