युवा शक्ति ही विकसित उत्तराखंड का आधारः मुख्यमंत्री ने मेधावियों को किया सम्मानित
देहरादून (उद संवाददाता)। मुख्य सेवक सदन में रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में शिक्षा विभाग द्वारा सम्मान, पुरस्कार एवं छात्रवृत्ति वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान के अंतर्गत संस्कृत के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। बालिकाओं के प्रोत्साहन हेतु ‘गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति’ तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को ‘डॉ. भीमराव अम्बेडकर छात्रवृत्ति’ प्रदान की। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के विद्यार्थियों को केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि उन्हें स्वावलंबी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि संस्कारों का समावेश भी है। देवभूमि के बच्चे अपनी संस्कृति से जुड़े रहकर आधुनिक विज्ञान और तकनीक में भी देश का नेतृत्व करें, यही हमारा लक्ष्य है।उन्होंने घोषणा की कि राज्य के मेधावी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की राशि में निरंतर वृद्धि की जा रही है ताकि आर्थिक तंगी किसी भी प्रतिभा के मार्ग में बाधा न बने। उन्होंने मुख्यमंत्री मेधावी छात्रवृत्ति योजना के सफल क्रियान्वयन पर संतोष जताया। सीएम ने कहा कि आज के छात्र ही वर्ष 2047 के उस विकसित भारत के निर्माता होंगे जिसका सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देखा है। उन्होंने छात्रें से श्विकल्प रहित संकल्पश् के साथ आगे बढ़ने का आ“वान किया। मुख्यमंत्री ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी की प्रशंसा की और कहा कि हर जिले में बेटियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब देवभूमि का कोई भी होनहार छात्र धन के अभाव में अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ेगा। मुख्यमंत्री मेधावी छात्रवृत्ति योजना के तहत दी जा रही सहायता राशि को सीधे छात्रें के बैंक खातों में भेजा जा रहा है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। सीएम ने जोर दिया कि हमारी सरकार नई शिक्षा नीति के अनुरूप कौशल आधारित शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रही है। विद्यालयों को केवल डिग्री देने वाले संस्थान के बजाय कौशल केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनें। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के संकल्प को उत्तराखंड में धरातल पर उतारा गया है। उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेटियों को विशेष कोचिंग और वित्तीय मदद दी जा रही है। उन्होंने नकल विरोधी कानून का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में अब परीक्षाओं में धांधली के लिए कोई जगह नहीं है। मेधावी छात्रें को उनकी मेहनत का पूरा फल मिले, इसके लिए देश का सबसे सख्त कानून उत्तराखंड में लागू है। मुख्यमंत्री ने बताया कि दुर्गम क्षेत्रें के स्कूलों में ‘वर्चुअल क्लास’ और स्मार्ट लैब की स्थापना की जा रही है। डिजिटल गैप को खत्म करने के लिए छात्रें को मुफ्त टैबलेट और आधुनिक तकनीक से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों का आ“वान करते हुए कहा कि वे छात्रें के केवल मार्गदर्शक नहीं बल्कि उनके रोल मॉडल हैं। उन्होंने शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने और स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने के लिए शिक्षकों के समर्पण की सराहना की। सीएम ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के सबसे दूरस्थ गांव में बैठे अंतिम छात्र तक शिक्षा की लौ पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्रवृत्ति और पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया को और अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाया जाए। प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ- धन सिंह रावत ने विभाग की उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड ने शिक्षा जगत में कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रें के विद्यालयों को स्मार्ट क्लास से जोड़ा जा रहा है। अब गांव का बच्चा भी वही शिक्षा प्राप्त कर रहा है जो शहरों में उपलब्ध है।उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की पहल पर मेधावी छात्रें को भारत भ्रमण पर भेजा जा रहा है, ताकि वे देश की विविधता और प्रगति को स्वयं देख सकें।डॉ. रावत ने कहा कि शैलेश मटियानी पुरस्कार जैसे आयोजनों से हम अपने गुरुओं का मान बढ़ा रहे हैं, जो शिक्षा की आधारशिला हैं। उन्होंने नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में से एक बताया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनपदों से आए मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। छात्रवृत्ति की धनराशि कई लाभार्थियों के खातों में सीधे डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई। इस अवसर पर विद्यालयी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक और अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और छात्रें द्वारा बनाए गए विज्ञान मॉडलों की सराहना की।
