February 13, 2026

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क्या, ‘महल की कांग्रेस’ को जनता के बीच ला पाएंगी महानगर अध्यक्ष ममता?

रुद्रपुर। उत्तराखंड के कांग्रेसी कुनबे में प्रदेश स्तर से लेकर जिला स्तर तक हुए फेर बदल के बाद, रुद्रपुर महानगर के संदर्भ में यह प्रश्न अचानक ही सामयिक हो चला है, कि क्या कांग्रेस की नवनियुक्त महानगर अध्यक्ष ममता रानी महलों में कैद कांग्रेस को जनता के बीच ला पाएंगी? रुद्रपुर महानगर में बचे खुचे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच की आपसी लड़ाई और जनता के मुद्दों से कांग्रेसियों के कटाव तथा सांगठनिक विस्तार के अभाव एवं पार्टी के जिला स्तर के फैसले जमीनी कार्यकर्ताओं को विश्वास में लिए बिना, महल की चार दिवारी; जिला अध्यक्ष का निज आवासद्ध से थोपे जाने के चलते रुद्रपुर में कांग्रेस के बारे में यह उक्ति अक्सर ही कही जाती रही है, कि उधम सिंह नगर जिले की कांग्रेस महलों में कैद होकर रह गई है। जब कांग्रेस के भीतर नई नियुक्तियों को लेकर मंथन आरंभ हुआ था, तो ऐसा माना जा रहा था कि कांग्रेस नई नियुक्तियां के माध्यम से, उधम सिंह नगर में पार्टी के ऊपर चस्पा हो गए महलों में कैद होने के टैग को हटाने के लिए, किसी ऐसे संघर्षशील एवं तेज तर्रार नेता को सामने लाएगी, जो कांग्रेस को महल से निकलकर जनता के बीच ला सके और कांग्रेस का जन सरोकार से साक्षात्कार करा सके, लेकिन उधम सिंह नगर जिला में हुई नई नियुक्तियों को देखने के बाद ऐसा तनिक भी नहीं प्रतीत होता कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस दिशा में कोई गंभीर प्रयास किया है। ज्ञात हो के कांग्रेस द्वारा जिला अध्यक्ष के पद पर हिमांशु गाबा को बरकरार रखा गया है तथा महानगर अध्यक्ष पद पर सीपी शर्मा के स्थान पर ममता रानी की नियुक्ति की गई है। हालांकि ममता रानी को महानगर अध्यक्ष पद पर नियुक्त करके कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय एजेंडे के अनुसार महिला और दलित समीकरण को एक साथ संतुलित करने की कोशिश की है ,पर कांग्रेस का यह कदम तभी सार्थक हो पाएगा, जब कांग्रेस जिला एवं महानगर स्तर पर अपनी नई टीम का गठन जल्द से जल्द करे और कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता जनता के हितों की लड़ाई धरातल पर लड़ते नजर आए। देखा जाए तो धरातल पर आम लोगों की दुख तकलीफों से जुड़े तमाम मुद्दे बिखरे पड़े हैं, मगर सत्ता से बेदखली के बाद कांग्रेस आम लोगों की दुश्वारियों स्वयं को कुछ कम ही जोड़ पाई है, जिसका खामियाजा कांग्रेस को लगभग हर चुनाव में भुगतना पड़ा है। फिलहाल कांग्रेस की नई महानगर अध्यक्ष के समक्ष पार्टी में स्थानीय स्तर पर मौजूद विभिन्न गुटों एवं कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेताओं से तालमेल बिठाते हुए कांग्रेस को पुनर्जीवित करने की कठिन चुनौती है। सो, अब देखने वाली बात तो यह होगी कि निकट भविष्य में ममता अपनी क्षमता को कैसे प्रदर्शित करती हैं?

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