किसकी ‘छाती’ में चुभ रहा है,त्रिशूल चौक का ‘त्रिशूल’ ? चबूतरे से उखाड़ दिया गया ‘चौक’ शब्द
रुद्रपुर। जान पड़ता है, जैसे रुद्रपुर के त्रिशूल चौक में स्थापित किए गए त्रिशूल को शहर के कुछ लोग पचा नहीं पा रहे हैं। शायद यही कारण है कि त्रिशूल चौक में स्थापित त्रिशूल और उसके चबूतरे और चबूतरे के आसपास लगाए गए फूलों के पौधों को नुकसान पहुंचाने के प्रयास लगातार हो रहे हैं। बीते रोज देखने में आया कि त्रिशूल चौक में त्रिशूल की स्थापना के लिए बनाए गए चबूतरे के दक्षिणी हिस्से में सुनहरी अक्षरों से लिखे गए त्रिशूल चौक से चौक शब्द उखाड़ दिया गया है। प्रथम दृष्टया यह किसी शरारती तत्व अथवा नशेड़ी की करतूत लगती है, पर इसके पीछे किसी इतर उद्देश्य की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हो सकता है कि त्रिशूल चौक के निर्माण को गले न उतार पाने वाले व्यक्तियों द्वारा अपनी कुंठा निकालने के लिए इस कृत्य को अंजाम दिया गया हो। इसके पीछे हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और शहर को अशांत करने की कुमंशा भी हो सकती है। लिहाजा, समुचित जांच के उपरांत यह तथ्य सामने लाया ही जाना चाहिए कि यह कृत्य करने वाले कौन थे और इसके पीछे उनका उद्देश्य क्या था? त्रिशूल चौक में स्थापित त्रिशूल के अनावरण के सप्ताह भर के भीतर ही, जिस प्रकार त्रिशूल चौक के चबूतरे से छेड़छाड़ की गई है, उससे यह पूरी तरह स्पष्ट है कि त्रिशूल चौक का त्रिशूल निश्चित रूप से किसी की छाती में चुभ रहा है। ऐसे लोगों को बेनकाब किया जाना निहायत जरूरी है। इसमें दो राय नहीं कि त्रिशूल चौक की देखरेख करने के लिए नियुक्त कार्यदाई संस्था त्रिशूल चौक के चबूतरे से उखाड़ दिए गए चौक शब्द को पुनः व्यवस्थित करेगी ,लेकिन साथ ही साथ इसकी एफआई आर भी करवाई जानी चाहिए ।पुलिस विभाग अगर चाहे तो संज्ञान लेकर स्वप्रेरणा से भी कार्यवाही कर सकता है, क्योंकि किन्ही शरारती तत्वों द्वारा शासकीय संपत्ति को क्षतिग्रस्त किया गया है। एक ऐसी शासकीय संपत्ति, जो त्रिशूल की स्थापना के बाद अब धार्मिक आस्था का प्रतीक बन गई है। इसके अलावा कोशिश यह भी होनी चाहिए कि अगर सनातन धर्म के प्रतीक कहीं स्थापित किए जाएं तो उनकी पर्याप्त देखरेख और सुरक्षा की व्यवस्था भी की जाए। साथ ही स्थापित धार्मिक प्रतीकों की पवित्रता का भी पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए। देखने में आया है कि सेल्फी लेने के चक्कर में कुछ लोग त्रिशूल की स्थापना के लिए बनाए गए चबूतरे पर चप्पल पहनकर चढ़ जाते हैं ।अगर त्रिशूल चौक में स्थापित त्रिशूल को भगवान शिव के त्रिशूल के मानिंद माना और प्रचारित किया जा रहा है ,तो उसकी पवित्रता का ख्याल भी रखा जाना चाहिए। इसके अलावा कार्यदाई संस्था अगर चाहे तो त्रिशूल चौक में सेल्फी लेने की प्रक्रिया में कुछ बंधन भी लगा सकती है । सेल्फी लेने की चाह में लोगों का त्रिशूल चौक में स्थापित त्रिशूल के चबूतरे तक पहुंचना रोका भी जा सकता है क्योंकि देखा जा रहा है कि सेल्फी लेने की प्रक्रिया में लोग चबूतरे के आसपास लगाए गए फूलों के पौधे एवं गमले को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं।
