बकाया का भुगतान न होने से ‘संकट’ में उत्तराखंड का ‘मिशन एप्पल’
चार साल के बकाया का भुगतान न होने से सेब की खेती करने वाले किसान हताश,आंदोलन प्रदर्शन एवं चार साल के लंबे इंतजार के बाद 35 करोड़ के स्थान पर जारी हुए केवल 11 करोड़ 75 लाख रुपए
देहरादून। उत्तराखंड में सेब की खेती को बढ़ावा देने के लिए आरंभ की गई एप्पल मिशन योजना पर, सेब की खेती करने वाले किसानों के बकाया का भुगतान न होने के कारण अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं ।चार साल की लंबी अवधि तक बकाया का भुगतान न होने के कारण प्रदेश के सेब उत्पादक खासा हताश हैं और सेब की खेती से मुंह मोड़ने का मन बना रहे हैं। बता दें कि राज्य में सेब उत्पादन का दायरा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा एप्पल मिशन योजना की शुरुआत की गई थी और प्रदेश के कुछ किसानों को सेब की खेती का प्रशिक्षण दिलाने के लिए हिमाचल प्रदेश भी भेजा गया था, मगर उद्यान विभाग में हुए घोटाले के बाद चल रही सीबीआई जांच के चलते सेब की खेती करने वाले किसानों का भुगतान रोकने की नौबत आ गई । रोके गए भुगतान को प्राप्त करने के लिए किसानों ने पर्वतीय कृषक कृषि बागवानी एवं उद्यमी संगठन के बैनर तले कई बार सरकार को ज्ञापन सौंपे और आंदोलन किए। यहां तक कि उद्यान मंत्री गणेश जोशी के आवास का घेराव भी किया। तब जाकर कहीं राज्य सरकार ने दो दिनों के भीतर सत्यापन कराकर भुगतान के आदेश देने का आश्वासन दिया। हालांकि पूरी प्रक्रिया में करीब एक महीने का समय लगा और जब आदेश जारी हुए तो राशि उम्मीद से कहीं कम निकली। उल्लेखनीय है कि एप्पल मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 के लिए किसानों को लगभग 35 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था, लेकिन शासन ने हाल ही में केवल 11 करोड़ 75 लाख रुपये जारी करने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं, जारी की गई इस राशि में भी फिलहाल सिर्फ पहली किश्त के तौर पर 50 प्रतिशत यानी 5 करोड़ 75 लाख रुपये ही दिए जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे किसान बेहद निराश हैं। सेब किसानों को राहत देने के नाम पर मिशन एप्पल योजना के तहत बकाया भुगतान का आदेश तो जारी कर दिया गया, लेकिन किसानों को यह आदेश ऊंट के मुंह में जीरा जैसा लग रहा है क्योंकि शासन द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृत 11 करोड़ 50 लाख रुपये में से पहले चरण में 5 करोड़ 75 लाख रुपये जारी किए जा रहे हैं। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि भौतिक सत्यापन के बाद भुगतान के लिए प्राप्त सूची सीबीआई को भेजी जाएगी। यदि जांच में किसी काश्तकार का नाम संदेह के दायरे में पाया जाता है तो उसका भुगतान रोका जा सकेगा। याद दिलाना होगा कि उद्यान विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया था, जिसमें सेब और कीवी के पौधों की खरीद-फरोख्त और गुणवत्ता को लेकर गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच चल रही है तथा तत्कालीन निदेशक हरमिंदर सिंह बवेजा को निलंबित भी किया जा चुका है। तभी से एप्पल मिशन के तहत किसानों का भुगतान अटका हुआ है।सेब उत्पादक किसानों का कहना है कि लंबे समय से किसान सरकार से भुगतान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। किसानों के अनुसार स्वीकृत पूरी धनराशि एक साथ जारी होनी चाहिए , लेकिन आधे से भी कम भुगतान होने से किसान हताश हैं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में किसान भविष्य में एप्पल मिशन या कीवी मिशन जैसी योजनाओं से कैसे जुड़ने का भरोसा कर पाएंगे।किसानों का मानना है कि यदि समय पर पूरा भुगतान नहीं हुआ तो बागवानी योजनाओं के प्रति उनका भरोसा टूट जाएगा।
