January 22, 2026

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11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान,वीआईपी नेताओं पर कार्रवाई की मांग

अंकिता बेटी को न्याय दिलाने के लिए देहरादून में सड़कों पर उतरा जन सैलाब, सरकार के खिलाफ लोंगो में भारी आक्रोश
देहरादून। उत्तराखंड मे बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच और सोशल मीडिया पर नाम सार्वजनिक हुए वीआईपी नेताओं पर कार्रवाई की मांग के लिए रविवार को जनसैलाब दून की सड़कों पर उतर आया। विभिन्न सामाजिक संगठन और विपक्षी राजनीतिक दलों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया। इस दौरान अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी की जांच नहीं होने पर लोगों में भारी आक्रोश दिखा। हजारों की संख्या में रैली में शामिल हुए लोगों और पुलिस जवानों की झड़पों के बीच पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को हाथीबड़कला पर बैरिकेडिंग लगा रोक दिया। इस बीच पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर झड़प भी हुई। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही बैठ सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में भारी संख्या में महिलाओं और पुरुषों के साथ युवाओं ने भी भाग लिया। सभी ने एक सुर में अंकिता को न्याय देने की मांग की और सीबीआई जांच नहीं कराए जाने पर नाराजगी जताई। प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के मोहित डिमरी ने एलान करते हुए कहा है कि 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद रहेगा। इसके लिए सभी व्यापार संगठन, सामाजिक संगठनों से वार्ता की जाएगी। वहीं उन्होंने सरकार को सप्ताहभर का समय देते हुए कहा, वीआईपी को जांच के दायरे में लाया जाए और सभी वीआईपी के नाम सार्वजनिक करें, जिन पर भी आरोप लगे हैं। वहीं, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा, सरकार को जल्द सीबीआई जांच की संस्तुति करनी चाहिए। राजधानी में रविवार को उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, सीपीआई, बेरोजगार संघ, उत्तराखंड मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति, गढ़वाल सभा महिला मंच और अलग-अलग सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए। यहां से विशाल रैली निकालते हुए लोग मुख्यमंत्री आवास कूच के लिए बढ़े। जैसे ही प्रदर्शनकारी हाथीबड़कला पहुंचे, पुलिस ने सभी को बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने कहा, अंकिता हत्याकांड में नए आरोपों के बाद अब इस मामले की नए सिरे से जांच होनी जरूरी है। अंकिता भंडारी की हत्या कोई साधारण अपराध नहीं था बल्कि संरक्षण में पनपे अपराध तंत्र का परिणाम है। उन्होंने कहा, पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी की ओर से कथित वीआईपी का नाम सामने आने के बावजूद सरकार इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इस मामले में नए आरोप सामने आने के बाद संलिप्त लोगों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए। उधर सामाजिक और विपक्षी राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों ने कहा, सरकार शुरुआत से ही वीआईपी को बचाने का प्रयास कर रही है। ऐसे में इस मामले की पूरी तरह से सीबीआई जांच होनी चाहिए। सत्ता पक्ष इतना मदहोश है कि उन्हें सामाजिक और जन संगठनों की आवाज सुनाई नहीं दे रही है। मुख्यमंत्री आवास कूच करने निकलने प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हाथीबड़कला बैरिकेडिंग पर रोका तो बड़ी संख्या में लोग सड़क पर बैठ गए। इस बीच कुछ लोगों ने सड़क पर बैठकर गीत शुरू कर दिए। काफी समय तक लोग सड़क पर बैठ कर गीत गाते रहे। प्रदर्शन के दौरान युवाओं में खासा गुस्सा दिखा। एक युवा रैली में अपने कंधे पर घड़ा लेकर पहुंचा उसमें सरकार के खिलाफ कई तरह के स्लोगन लिखे। इसके बाद जब हाथीबड़कला पहुंचे तो बैरिकेडिंग पर ही युवक ने घड़ा फोड़ दिया। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के खिलाफ लोगों का आक्रोश फिर से सड़कों पर दिखने लगा है। जन सैलाब के रूप में लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं इस मामले की शीघ्र सीबीआई से जांच कर वीआई का खुलासा करने की मांग उठाई जा रही है।ै सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने कहा कि अंकिता केस में नए आरोपों के बाद अब इस मामले की नए सिरे से जांच होनी जरूरी है। लोगों ने कहा कि, अंकिता भंडारी की हत्या कोई साधारण अपराध नहीं था। बल्कि संरक्षण में पनपे अपराध तंत्र का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी की ओर से कथित वीआईपी का नाम सामने आने के बावजूद सरकार इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इस मामले में नए आरोप सामने आने के बाद संलिप्त लोगों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए। सामाजिक और विपक्षी राजनीतिक दलों के लोगों ने कहा कि सरकार शुरुआत से ही विआईपी को बचाने का प्रयास कर रही है। ऐसे में इस मामले की पूरी तरह से सीबीआई जांच होनी चाहिए। आज अपनी ही भूमि पर उन्हें दिवंगत अंकिता को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सत्ता पक्ष इतना मदहोश है कि उन्हें सामाजिक और जन संगठनों की आवाज सुनाई नहीं दे रही है। प्रदर्शन में भाग ले रहे लोगों ने सरकार से नए आरोपों के बाद फिर से इस मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग उठाई है।



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