प्रमुख फसलों में खरपतवार प्रबंधन पर किसानों को दिया प्रशिक्षण
पंतनगर । विश्वविद्यालय के सस्य विज्ञान विभाग की अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन शोध परियोजना के अंतर्गत गौलापार के ग्राम किशनपुर रैक्वाल गंगापुर में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत देवेंद्र बिष्ट के प्रक्षेत्र पर आयोजित इस किसान सभा में आसपास के छह गांवों के लगभग 80 महिला एवं पुरुष कृषकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को खरीफ की प्रमुख फसलों में खरपतवार नियंत्रण की आधुनिक विधियों से अवगत कराना था।प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन करते हुए परियोजनाधिकारी एवं सस्य विज्ञान विभाग के प्राध्यापक एस पी सिंह ने फसलों में खरपतवार से होने वाली हानियों और उनके प्रभावी नियंत्रण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मक्का, सोयाबीन, मूंग, उड़द और धान की फसलों में खरपतवारनाशियों के प्रयोग की उचित मात्रा और छिड़काव के सही समय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शाकनाशी के प्रयोग का सबसे सटीक समय तब होता है जब खरपतवार 2 से 4 पत्ती की अवस्था में हों। अक्सर किसान शाकनाशी की अधिक मात्रा और पानी का कम उपयोग करते हैं जिससे उचित नियंत्रण नहीं मिल पाता।वैज्ञानिकों ने छिड़काव की तकनीक पर जोर देते हुए बताया कि खरपतवार नाशियों के लिए हमेशा फ्रलेंट फेन कट नॉजल या बूम नोजल का ही प्रयोग करना चाहिए। इस अवसर पर परियोजना की ओर से उपस्थित सभी किसान भाईयों और बहनों को विभिन्न खरीफ फसलों में प्रयोग होने वाले नए शाकनाशियों का निःशुल्क वितरण भी किया गया। किसानों ने अपनी समस्याओं को साझा किया और विशेषज्ञों से उनका समाधान जाना। कार्यक्रम में वरिष्ठ शोधार्थी आर पी सिंह, धर्मेंद्र कुमार, राजीव और प्रक्षेत्र सहायक सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
