जल्द होगी ठुकराल की कांग्रेस में एंट्री! एक बार फिर सियासी हलचलें तेज : यशपाल आर्य के जरिए दिल्ली दरबार से बन रही राह
फिर शुरू हुई घेराबंदी, कांग्रेस के साथ अंदर खाने भाजपा नेता भी रोक रहे राह
रूद्रपुर । उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र बिंदु कहे जाने वाले तराई के रुद्रपुर शहर में एक बार फिर सियासी हलचलें तेज हो गई हैं। दो बार के विधायक रहे राजकुमार ठुकराल के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं ने शहर के राजनीतिक पारे को आसमान पर पहुंचा दिया है। सूत्रें के मुताबिक, राजकुमार ठुकराल की कांग्रेस में एंट्री का रास्ता लगभग साफ हो चुका है और इसकी पटकथा हाई लेवल पर लिखी जा चुकी है। बताया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के माध्यम से ठुकराल की दिल्ली दरबार में पहुंच हुई है, जिसके बाद उनके हाथ थामने की औपचारिक घोषणा कभी भी हो सकती है। हालांकि, इस संभावित जॉइनिंग ने न केवल भाजपा बल्कि कांग्रेस के भीतर भी खलबली मचा दी है। बता दें राजकुमार ठुकराल ने वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव में भाजपा से टिकट कटने के बाद बगावत का बिगुल फूंक दिया था और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे थे। भले ही उस चुनाव में वह तीसरे स्थान पर रहे, लेकिन उन्हें मिले भारी मतों ने साबित कर दिया था कि जनता के बीच उनका आधार अब भी मजबूत है। पिछले चार वर्षों में कई बार उनके भाजपा में वापसी या कांग्रेस में जाने की अटकलें लगती रही हैं। लगभग एक वर्ष पूर्व निकाय चुनाव के समय भी उन्होंने मेयर पद के लिए ताल ठोकी थी, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आश्वासन के बाद वह पीछे हट गए थे। उस समय माना जा रहा था कि भाजपा उनकी घर वापसी कराएगी, लेकिन समय बीतने के साथ वे तमाम चर्चाएं बेमानी साबित हुईं। ठुकराल के कांग्रेस में जाने का रास्ता भी कई कांग्रेसियों ने पिछले लम्बे समय से रोक रखा है। कुछ समय पहले जब कांग्रेस में शामिल होने का उनका रास्ता लगभग साफ हो चुका था तब उनकी आडियो क्लीपिंग ने मुश्किलें खड़ी कर दी और ठुकराल की कांग्रेस में एंट्री रूक गयी। अब मौजूदा समय में आगामी विधाानसभा चुनाव की शुरू हो रही सरगर्मियों के बीच एक बार फिर ठुकराल की कांग्रेस में ज्वाइनिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कांग्रेस को रुद्रपुर सीट पर एक ऐसे दमदार चेहरे की तलाश है जो भाजपा को कड़ी टक्कर दे सके। वर्तमान में कांग्रेस के पास फिलहाल इस क्षेत्र में कोई ऐसा बड़ा नाम नहीं दिख रहा जो सीधे तौर पर भाजपा के दुर्ग को चुनौती दे पाए। राजकुमार ठुकराल की ताकत यह है कि वह सत्ता से बाहर और बिना किसी पद के रहने के बावजूद धरातल पर लगातार सक्रिय हैं। जनहित के मुद्दों पर उनकी आक्रामक शैली और बेबाक अंदाज आज भी बरकरार है, जो कांग्रेस के दिग्गजों को एक उम्मीद दे रहा है। अगर ठुकराल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं, तो रुद्रपुर में पार्टी के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होगा और यह भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है। दूसरी ओर, ठुकराल की राह में रोड़े अटकाने वालों की भी कमी नहीं है। कांग्रेस का एक धड़ा उनके आगमन से अपने वर्चस्व को खतरे में देख रहा है। यही कारण है कि उनकी पुरानी ऑडियो क्लिपिंग को एक बार फिर हथियार बनाकर उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। विपक्षी और विरोधी खेमा किसी भी सूरत में ठुकराल की एंट्री को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। ठुकराल के आने से जहां भाजपा को एक मजबूत विपक्ष का डर सता रहा है, वहीं कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेता अपनी राजनीतिक जमीन खिसकते देख असहज महसूस कर रहे हैं। ठुकराल के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमे को आज इसी की परिणति माना जा रहा है, फिलहाल, गेंद दिल्ली दरबार के पाले में है और आने वाले कुछ दिन रुद्रपुर की राजनीति की नई दिशा तय करेंगे।
