अग्निकाण्ड में तीन घर राख,14 मवेशी जिंदा जले
तड़के हुआ अग्निकाण्ड,कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे आए तीन परिवार
उत्तरकाशी(उद संवाददाता)। जनपद के सीमांत क्षेत्र मोरी में आग का तांडव एक बार फिर सामने आया है। बुधवार तड़के मोरी तहसील के गुराड़ी गांव में हुए एक भीषण अग्निकांड ने तीन परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए। आग की लपटें इतनी भयानक थीं कि घरों के भीतर बंधे 14 मवेशियों को बाहर निकालने तक का मौका नहीं मिला और वे जिंदा जल गए। इस आपदा में पीड़ितों का राशन, बिस्तर और जीवन भर की जमा पूंजी राख के ढेर में तब्दील हो गई है। सुबह 5 बजे जब गहरी नींद में था गांव जानकारी के अनुसार, गुराड़ी गांव में बुधवार सुबह करीब 5ः19 बजे अचानक एक घर से आग की लपटें उठने लगीं। जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते, लकड़ी से बने पहाड़ी शैली के तीन आवासीय भवनों ने भीषण आग पकड़ ली। ग्राम प्रधान की सूचना पर राजस्व विभाग, फायर सर्विस, एसडीआरएफ, पुलिस और 108 की टीमें तत्काल मौके के लिए रवाना हुईं। स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन की टीम ने कड़ा संघर्ष कर सुबह करीब 7ः35 बजे आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक सब कुछ जलकर खाक हो चुका था। इस अग्निकांड में रामचंद्र पुत्र धर्म दत्त की 2 गाय और 1 बैल, भरत मणि पुत्र केदार दत्त की 5 बकरियां और 1 गाय तथा ममलेश पुत्र भरत मणि की 2 भेड़ें, 1 गाय और 2 बकरियां जिंदा जल गईं। तहसीलदार मोरी के मुताबिक, प्राथमिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। कड़कड़ाती ठंड के बीच इन परिवारों के पास अब न रहने को छत बची है और न ही खाने को अन्न। घटना के तुरंत बाद राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। प्रभावित तीनों परिवारों को फौरी राहत के तौर पर प्रति परिवार 5,000 रुपये नकद, 2 कंबल और 1 तिरपाल वितरित किए गए हैं। प्रशासन द्वारा नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है ताकि पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाया जा सके। मोरी क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से आग का साया मंडरा रहा है। गौर हो कि अभी कुछ दिन पहले 29 दिसंबर को भी मोरी के सट्टðा गांव में भीषण आग लगी थी, जिसमें चार घर जल गए थे और एक बुजुर्ग की जिंदा जलने से मौत हो गई थी। बार-बार हो रही इन घटनाओं ने पहाड़ी गांवों में अग्नि सुरक्षा और बिजली की लाइनों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
