बनभूलपुरा में रेलवे भूमि से हटेंगे हजारों कब्जेदार : सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष को माना,पुनर्विास के लिए पीएम आवास योजना में करें आवेदन
बेदखली पर रोक लगाने से इनकार,19 मार्च को आ सकता है फैसला
नई दिल्ली। हल्द्वानी के बहुचर्चित बनभूलपुरा में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा आदेश दिया है। सर्वाेच्च अदालत ने कथित रेलवे की जमीन से बेदखली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने राज्य की तरफ से अधिवक्ताओं के तर्क को सुना। इसके साथ ही याचिका डालने वाले अधिवक्ताओं को भी सुना। राज्य की तरफ से पुनर्वास की बात कही गई और प्रधानमंत्री आवास सहित अन्य योजनाओं के बारे में बताया गया। कोर्ट ने जिला प्रशासन से कहा कि 19 से 31 मार्च के बीच बनभूलपुरा में शिविर लगाकर पात्रों को तलाशा जाए। इसके बाद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में अगले डेर सबमिट करना होगा। राज्य सरकार ने अपना हलफनामा भी पेश किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हल्द्वानी में रेलवे के विस्तार की वजह से बेदखली का सामना कर रहे लोगों को उसी जगह पर पुनर्वास का कोई अधिकार नहीं है। चूंकि हजारों परिवारों के बेघर होने की संभावना है इसलिए अधिकारियों को पीएम आवास योजना के तहत उनकी योग्यता का परीक्षण करते हुए उनके पुनर्वास में मदद करनी चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की बेंच ने हल्द्वानी में कथित रेलवे की जमीन से बेदखली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि सर्वाेच्च अदालत ने माना कि हजारों परिवारों के बेघर होने की संभावना है, इसलिए राज्य को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रभावित लोगों की योग्यता की पुष्टि करनी चाहिए ताकि वे योजना के तहत घर के लिए अप्लाई कर सकें। अदालत ने अगली सुनवाई से पहले एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट भी मांगी। इसमें अदालत को बताया जाएगा कि हाउसिंग योजना के तहत कितने परिवार योग्य हैं। वहीं बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुतबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हल्द्वानी में रेलवे के विस्तार की वजह से बेदखली का सामना कर रहे लोगों को उसी जगह पर पुनर्वास के लिए जोर देने का कोई अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में नैनीताल, हल्द्वानी के कलेक्टर और रेवेन्यू अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को पीएम आवास योजना के आवेदन फार्म उपलब्ध कराने का निर्देश दिया ताकि योजना के तहत उनका नामांकन आसान हो सके। सर्वाेच्च अदालत ने जिला प्रशासन से योजना से जुड़ी प्रक्रिया को आसानी से लागू करने के लिए लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को पूरा सहयोग देने के लिए भी आदेश दिया। याचिका कर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि प्रभावित होने वालों की कुल संख्या 50 हजार है। कम ही लोग प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता में हैं। शेष परिवारों के पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। संबंधित भूमि राज्य सरकार की है और 60 से 70 साल से बसे लोगों की बस्तियों के नियमितिकरण पर विचार होना चाहिए। अगली सुनवाई में पुनर्वास, मुआवजा और भूमि स्वामित्व के कानूनी पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। अदालत ने उत्तराखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी ;एसएलएसए को 18 मार्च से साइट पर पुनर्वास कैंप लगाने को कहा। अथॉरिटी के मेंबर सेक्रेटरी को कैंप शुरू होने के बाद लोकेशन पर मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने उम्मीद जताई कि यह काम 31 मार्च तक पूरा हो जाएगा।
क्यों बहुचर्चित हुआ हल्द्वानी के बनभूलपुरा का अतिक्रमण ?
जब आप हल्द्वानी रेलवे स्टेशन पर पहुंचते और उतरते हैं तो पास में मुस्लिम समुदाय की भीड़ समेटे कथित अवैध बसावट वाला एक इलाका देखते होंगे यही है बनभूलपुरा बस्ती । इसकी गफूर बस्ती जिसे ढोलक बस्ती भी कहते है, यहां की बदबू और गंदगी बिना एक पल गंवाए ये एहसास करा देती है कि ये जगह किसी नरक बस्ती से कम नहीं। जहां बाहरी राज्यों से आए हुए लोग सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करते हुए बस्ते चले गए। बनभूलपुरा बस्ती हल्द्वानी के लिए आज ये सबसे बड़ी चिंता बनता जा रहा है, और इसके कई कारण हैं। यह सिर्फ एक थाना क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए एक सुरक्षा, प्रशासन और सामाजिक और जनसांख्यिकी संतुलन का सवाल बन चुका है। सबसे पहले, बनभूलपुरा में अवैध और अनियंत्रित बसावट की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। सरकारी जमीनों पर दशकों से बिना अनुमति घर और दुकानें बनती रही, गलियाँ सिकुड़ती गईं, और शहर के नक्शे में गड़बड़ी पैदा हुई। प्रशासन कई बार कार्रवाई करने गया, लेकिन हमेशा मुस्लिम फ्संवेदनशील इलाकाय् कहकर पीछे हटना पड़ा। इस वजह से इलाका धीरे-धीरे कानून के दायरे से बाहर लगता गया। स्मरण रहे ये पूरा क्षेत्र कांग्रेस का पुश्तैनी वोट बैंक है। जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर लगातार होती रही है। कांग्रेस के साथ साथ समाजवादी पार्टी ने भी बनभूलपुरा को एक वोटबैंक की तरह इस्तेमाल किया। उत्तराखंड के सबसे ज्यादा अपराध और अपराधियों की पनाह लेने वाला बनभूलपुरा थाना क्षेत्र माना जाता है, खनन तस्करी,लकड़ी चोरी, ड्रग्स, से जुड़े अपराधों के अलावा यहां हर तरह के चोर ,अपराधी पनाह लेते रहे है और पुलिस प्रशासन के लिए सरदर्द बनते रहे है। बनभूलपुरा अब शहर के बाकी हिस्सों से अलग पॉकेट जैसा बन गया है। पुराने रहने वाले मुस्लिम खुद को वहां फ्अजनबीय् महसूस करने लगे हैं। जब किसी इलाके में आबादी का संतुलन बिगड़ता है, तो संवाद कम और असुरक्षा की भावना ज्यादा बढ़ती है। बाहरी राज्यों से आए मुस्लिम लोगों ने यहां के पुराने वाशिंदों को भी असहज किया है।जब तक यहां की आबादी कुछ हजार थी हल्द्वानी में अमन चौन का माहौल था जबसे बाहरी राज्यों के लोगों ने यहां आकर सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण किया तब से यहां हालात बिगड़ते चले गए। तीसरी चिंता प्रशासनिक कमजोरी है। जब कोई भी कदम उठाने से पहले यह सोचना पड़े कि इससे विवाद या हिंसा बढ़ सकती है, तो इलाका धीरे-धीरे फ्नो-गो जोनय् जैसा महसूस होने लगता है। 2024 में अतिक्रमण हटाने की कोशिश के दौरान हुई हिंसा ने यह साफ कर दिया कि अब मामला सिर्फ जमीन का नहीं रहा, बल्कि कानून- व्यवस्था की चुनौती बन गया है। बनभूलपुरा की समस्या पूरे शहर पर मनोवैज्ञानिक असर डाल रही है। लोग डरने लगे हैं कि उनका इलाका सुरक्षित नहीं है और भविष्य में इसी तरह अन्य हिस्सों में भी तनाव फैल सकता है। यह चेतावनी है कि अगर समय रहते धामी सरकार ने अवैध निर्माण, डेमोग्राफिक असंतुलन और प्रशासनिक ढील पर कड़ा कदम नहीं उठाया गया, तो हल्द्वानी जैसे शहरों में स्थिति और गंभीर हो सकती ।बनभूलपुरा रेलवे जमीन पर अवैध बस्ती अतिक्रमण का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। पुराने रहने वाले मुस्लिम मानते है कि बाहरी क्षेत्रों से आए मुस्लिमों ने यहां अवैध कब्जे किए जिसका खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ रहा है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 24 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में जजों की खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया कि ये सरकारी भूमि पर अतिक्रमण है और इसे हटाया जाएगा। धामी सरकार,रेलवे मंत्रालय और भारत सरकार इस मामले में अपना पक्ष रख चुके है। अतिक्रमण करने वाले भी सलमान खुर्शीद प्रशांत भूषण जैसे बड़े वकील लेकर अपना पक्ष कोर्ट में रख चुके है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस पक्ष को भी माना है कि वो अवैध रूप से कब्जेदार को पात्रता के आधार पर पीएम आवास जैसी योजनाओं का लाभ दे सकती है और जो पात्र नहीं है उन्हें दो हजार रु महीना छ माह तक दे सकती है। रेलवे और राज्यसरकार के वकीलों ने कोर्ट में कहा है कि जो बाहरी राज्यों से आए अतिक्रमण करने वाले लोग है वो अपने राज्य में जाकर आवेदन करे। कोर्ट ने 19 मार्च से 31 मार्च तक जिला विधिक प्राधिकरण और जिला प्रशासन की देखरेख में बनभूलपूरा क्षेत्र में कैंप लगा कर आवास योजना के लाभार्थियों लिए आवेदन लिए जाने और उनका परीक्षण किए जाने को निर्देशित किया है। जिसके लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट 19 मार्च के बाद यानि ईद के बाद अपना फैसला सुनाएगा , इसी का इंतजार सभी को है।
