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सैनिक कल्याण विभाग के ढांचे का होगा पुनर्गठनः पूर्व सैनिक सम्मेलन में मुख्यमंत्री धामी ने की कई कई घोषणाएं

रजत जयंती पर आयोजित सम्मेलन में भारी संख्या में जुटे पूर्व सैनिक
हल्द्वानी(उद संवाददाता)। राज्य स्थापना की रजत जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पूर्व सैनिक सम्मेलन का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर शुभारम्भ किया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पहुंचने पर मुख्यमंत्री धामी का भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने उपस्थित पूर्व सैनिकों पर पुष्पवर्षा कर उनका अभिवादन किया और राज्य निर्माण व राष्ट्र सेवा में उनके योगदान को नमन किया। इस अवसर पर पूर्व सैनिकों को और वीर नारियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उत्साह और देशभक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला। उपस्थित जनसमूह ने जय हिन्द और उत्तराखण्ड मातृभूमि की जय के नारों से सभागार गूंजा दिया। कार्यक्रम में सीएम धामी ने सैनिक कल्याण विभाग ढांचे का पुनर्गठन करने की घोषणा की साथ ही उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि जिला सैनिक कल्याण कार्यालय, हल्द्वानी, अल्मोड़ा एवं पौड़ी भवन निर्माण तथा जिला सैनिक कल्याण अधिकारी आवास का पुननिर्माण भी किया जायेगा। विभिन्न युद्धों एवं सीमांत झड़पों में शहीद हुए सैनिकों की वीर नारियों एवं युद्ध दिव्यांग सेवामुक्त सैनिकों को देय आवासीय अनुदान राशि दो लाख से बढ़ाकर पांच लाख की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री की घोषणाओं को भी समय सीमा के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिये। सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए सीएम धामी ने सभी को राज्य स्थापना के रजत जयंती उत्सव की बधाई दी। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों का यह कालखण्ड पूरा हो रहा है। आज जब हमारा प्रदेश रजत जयंती का उत्सव मना जा रहा है तब इस माटी के सच्चे रक्षक हमारे पूर्व सैनिकों के बीच में आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। जब भी आप सबके बीच आता हूं तो ऐसा लगता है कि मैं किसी कार्यक्रम में नहीं बल्कि अपने परिवार के बीच आ रहा हूं। इस अवसर की हमेशा मुझे प्रतीक्षा रहती है। बचपन से लेकर अब तक स्मृतियां स्मरण में आ जाती है। साल भर में दस बारह ऐसे कार्यक्रम जो बड़े स्तर पर होते हैं जिनमें पूर्व सैनिकों से मिलने का अवसर मिलता है। हम कभी नहीं भूल सकते कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन में हमारे वीर सैनिकों और उनके शहीद परिवारों ने अमूल्य योगदान दिया। आज राज्य जब 25 वर्ष पूरे कर रहा है इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि उत्तराखण्ड की पहचान उत्तराखण्ड की प्रतिष्ठा और उसकी आत्मा हमारे पूर्व सैनिकों के साहस समर्पण और वीरता में ही बसती है। आप केवल सेवानिवृत्त नहीं सैनिक नहीं बल्कि आप सब हमार समाज के प्रेरणास्रोत है। आपसे समाज को वीरता पराक्रम, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में चुनौतियों से लड़ने का हौंसला मिलता है। आप जहां भी हैं राष्ट्रप्रेम कर्तव्यनिष्ठा और सेवा की मिसाल कायम कर रहे हैं। सीएम धामी ने कहा कि सैनिक कभी पूर्व या भूतपूर्व नहीं होता सैनिक हमेशा एक सैनिक होता है।

आप सब भूतपूर्व नहीं हमारे लिए अभूतपूर्व हैं। और देश भक्ति के चिर स्थाई प्रतीक है। सीएम ने कहा कि जब जब देश पर संकट आया है तब तब हमारे सैनिकों ने हमेशा पहला वार सीने पर लिया है और चुनौती को सबसे पहले कबूल करते हुए उसका करारा जवाब देने का कायम किया है। हमारे जवानों ने कारगिल की उंची चोटियों से लेकर हर कठिन परिस्थितियों में अपना लहु बहाकर तिरंगे की शान को बढ़ाने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी देवभूमि केवल आध्यात्मिकता ही नहीं बल्कि शौर्य बलिदान, पराक्रम और कर्तव्य निष्ठा की भी भूमि है। यह वही धरती है जहां के हर घर से एक बेटा सीमा पर तैनात होता है। इसीलिए उत्तराखण्ड को देवभूमि के साथ साथ वीरभूमि भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं एक फौजी का बेटा हूं और बचपन से मैने फौजियों की वर्दी में बसने वाले अनुशासन को देखा है उनकी कर्तव्य निष्ठा को देखा है त्याग को देखा है और मातृ भूमि के लिए उनके समर्पण को बहुत नजदीक से अनुभव किया है। मैं सेना को देखते देखते बड़ा हुआ हूं। मैंने देखा है कि एक शहीद की मां अपने वीर बेटे के बलिदान पर अपने सीने में दर्द के साथ गर्व का भी अनुभव रखती है। एक पिता जो अपने बलिदानी बेटे को अश्रुपूरित नेत्रें से अंतिम सलामी देते समय अपना सीना चौड़ा करके खड़ा रहता है और उसके नन्हे बच्चे अपने शहीद पिता की तस्वीर को देखकर सैल्यूट करते हैं। सीएम ने कहा कि भारत देश भक्तों का देश है। मैंने मुख्य सेवक के रूप में काम करने के बाद यह संकल्प लिया कि पहले दिन से मेरा संकल्प था कि यह भाव हमारे हर काम और सरकार के हर निर्णय में दिखना चाहिए। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि एक सैनिक की शहादत का कोई मोल नहीं हो सकता। हमें एक बाद हमेशा याद रखनी चाहिए कि शहीद तो अमर हो जाते हैं पर उनका परिवार कभी अकेला न रह जाये, उनको कभी कोई परेशानी न हो इसलिए उनके हर सुख दुख की जिम्मेदारी भी समाज को लेनी चाहिए और सरकार को लेनी चाहिए। हम सबको उस जिम्मेदारी को मिलकर निभाना चाहिए। इसी को देखते हुए हमने निर्णय लिया कि शहीदों के परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को दस लाख से बढ़ाकर 50 लाख किया जाये। हमने ये सुनिश्चित किया कि भूतपूर्व सैनिक की मृत्यु के समय उनका सम्मानजनक अंतिम संस्कार हो, इसके लिए दस हजार की सहायता राशि का भी प्रावधान किया है। इसके अलावा हमने वीरता पुरस्कारों से सम्मानित होने वाले सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त और वार्षिक अनुदान राशि में भी ऐतिहासिक वृद्धि की है। हमने युद्ध विधवा एवं युद्ध अपंग सैनिकों को दो लाख रूपये की आवासीय सहायता प्रदान करने का भी निर्णय लिया है। इसी के साथ अब उत्तराखण्ड उन चुनिंदा रज्यों में से हैं जहां सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रूपये मूल्य की संपत्ति की खरीद पर स्टांप डड्ढूटी में 25 प्रतिशत की छूट दी जाती है।


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