राज्यपाल ने हस्तशिल्पकारों, स्थानीय उत्पादों से जुड़े काश्तकारों, एवं स्वरोजगार से जुड़े प्रतिभागियों को किया सम्मानित
देहरादून । राज्यपाल लेफ्टनेंट जनरल गुरमीत सिंह ;से निद्ध ने सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव-2026 के शुभारम्भ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई। इस अवसर पर राज्यपाल ने प्रदेश में विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 10 समाजसेवकों को सम्मानित किया। माननीय राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों के काश्तकारों, शिल्पकारों और पारंपरिक शिल्पियों को एक सशक्त एवं व्यापक मंच प्राप्त हो रहा है, जिससे न केवल उनकी कला और उत्पादों को पहचान मिलती है,बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलती है। राज्यपाल जी द्वारा नैनीताल जनपद के श्री प्रेम प्रकाश बेलवाल जी को सामाजिक सेवा एवं जन-स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, अल्मोड़ा जनपद की सुश्री कामिनी कश्यप जी को दिव्यांग शिक्षा एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में, अल्मोड़ा जनपद की सुश्री मनोरमा जोशी जी को कृषि नवाचार एवं कीवी उत्पादन के क्षेत्र में, बागेश्वर जनपद के श्री भवान सिंह कोरंगा जी को पारम्परिक ताम्र शिल्पकला संरक्षण के क्षेत्र में, उत्तरकाशी जनपद की श्रीमती कृष्णा जी को पारम्परिक हथकरघा एवं ऊनी वस्त्र निर्माण के क्षेत्र में, पौड़ी जनपद के श्री श्याम चन्द्र टम्टा जी को बागवानी, जल-संचय एवं टपक सिंचाई के क्षेत्र में, बागेश्वर जनपद की सुश्री प्रेमा रावत जी को खेल ;अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटद्ध के क्षेत्र में, देहरादून जनपद के श्री कल सिंह राणा जी को सेब उत्पादन एवं कृषि नवाचार के क्षेत्र में, टिहरी जनपद के श्री कुन्दन सिंह पंवार जी को कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में तथा देहरादून जनपद के ब्रिगेडियर दिनेश कुमार बड़ोला जी को रक्षा एवं सैन्य सेवा के क्षेत्र में सम्मानित किया गया। उन्होंने आयोजन की भव्यता, अनुशासन और उद्देश्यपूर्ण स्वरूप की सराहना करते हुए सेवा संकल्प फाउंडेशन से जुड़े सभी सदस्यों को इस सफल आयोजन हेतु शुभकामनाएं दी। उनके प्रेरक उद्बोधन से महोत्सव को नई ऊर्जा, मार्गदर्शन और गरिमा प्राप्त हुई, जिससे आयोजन का यह चरण भी अत्यंत प्रभावशाली एवं स्मरणीय बन गया। उपस्थित जनमानस को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक आत्मा, सामूहिक चेतना और प्रकृति के साथ संतुलनपूर्ण जीवन-दृष्टि का प्रतीक है। राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी सूर्य के उत्तरायण होने के साथ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, ऊर्जा और प्रकाश का संदेश देती है। यह पर्व समाज को निराशा से संकल्प की ओर तथा जड़ता से प्रगति की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने उत्तरायणी को ऋतु-चक्र आधारित वैज्ञानिक चेतना और प्रकृति के साथ सामंजस्य का सजीव उदाहरण बताया। उत्तराखण्ड की कौथिक यानी मेलों की परम्परा को लोकजीवन की धड़कन बताते हुए उन्होंने कहा कि ये आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक निरंतरता और लोकस्मृति के जीवंत केंद्र रहे हैं। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और हस्तशिल्प उत्तराखण्ड की जीवंत, जाग्रत और गौरवशाली सांस्कृतिक परम्परा के प्रतीक हैं। राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव लोककला, लोकसंगीत, लोकनृत्य, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को नई पहचान देता है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को व्यवहारिक रूप से साकार करता है। उन्होंने युवाओं से नशे और व्यसनों से दूर रहने का आ“वान करते हुए कहा कि शिक्षा, खेल, कौशल और सेवा के माध्यम से ही सशक्त उत्तराखण्ड और सशक्त भारत का निर्माण संभव है। राज्यपाल ने सेवा संकल्प फाउंडेशन के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृति तभी जीवित रहती है, जब वह सेवा, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ी हो। इस अवसर पर ट्रस्टी संस्थापक सेवा संकल्प फाउंडेशन गीता धामी, प्रथम महिला गुरमीत कौर, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, आईएमए कमांडेंट लेफ्रिटनेंट जनरल नागेन्द्र सिंह सहित विभिन्न दायित्वधारी एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
