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कांग्रेसी में छिड़ा संग्राम : हरक ने कहा हरीश रावत को राजनीति में सब कुछ मिला,उनके पास केवल प्रधानमंत्री का पद ही बचा है !

नेतृत्व का सर दर्द बनती जा रही है कांग्रेस की पुनरुत्थान की कवायद ,सतह पर आ रहे हैं वरिष्ठ कांग्रेसियों के अंतर्विरोध
— अर्श–
देहरादून ।आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपना कुनबा बढ़ाने की कोशिश में जुटी कांग्रेस के लिए बाहरी नेताओं का कांग्रेस प्रवेश एक बड़ा सिर दर्द बनता जा रहा है। रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजकुमार ठकुराल के कांग्रेस प्रवेश पर कांग्रेस की वरिष्ठ महिला नेत्री मीना शर्मा का गुस्सा अभी ठंडा भी नहीं हो पाया था, कि अब वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी कांग्रेस से निष्कासित संजय नेगी की कांग्रेस में वापसी के मसले को ठंडे बस्ते में डालने से कुपित होकर 15 दिन के अवकाश में चले गए हैं। याद दिलाना होगा कि पिछले विधानसभा चुनाव में संजय नेगी को रामनगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी महेंद्र पाल के विरुद्ध निर्दलीय प्रत्याशी की हैसियत से चुनाव लड़ने के कारण कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था। दरअसल, कांग्रेस ने 2022 में महेंद्र पाल को प्रत्याशी बनाया था। जबकि उन दौरान कांग्रेस नेता रहे संजय नेगी खुद कांग्रेस का टिकट चाहते थे। लेकिन टिकट न मिल पाने के कारण उन्होंने पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। जिसके बाद कांग्रेस ने पार्टी अनुशासनहीनता के आरोप में संजय को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। ज्ञात हो कि 2022 में रामनगर सीट से टिकट को लेकर हरीश रावत और रणजीत रावत दोनों के बीच काफी खींचतान हुई थी। रणजीत रावत ने खुद को रामनगर सीट से मजबूत दावेदार बताया था। लेकिन हरीश रावत ने महेंद्र पाल को टिकट देने की पैरवी की थी। हालांकि संजय नेगी भी हरीश रावत गुट के ही माने जाते हैं। ऐसे में रणजीत रावत के साथ ही महेंद्र पाल भी संजय नेगी की पार्टी में वापसी का विरोध कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में कांग्रेस में प्रविष्ट हुए नेताओं के साथ ही संजय नेगी की भी कांग्रेस में एंट्री होने वाली थी, लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं की नाराजगी के चलते कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी शैलजा ने संजय नेगी को अगले लॉट में शामिल करने की बात कह दी थी। जिसका नतीजा यह हुआ कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत खफा होकर 15 दिन के अवकाश पर चले गए। हरीश रावत के 15 दिनों की छुट्टी पर जाने के निर्णय के बाद कांग्रेस में बयान बाजी का दौर शुरू हो गया और कांग्रेसी नेताओं के आपसी मतभेद सतह पर आने आरंभ हो गए । पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की नाराजगी और उनके समर्थन में आए बयानों पर पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए, न केवल रावत के करीबियों को आईना दिखाया, बल्कि पार्टी के भीतर पनप रहे व्यक्तिवाद पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर मुझे यह वहम हो जाए कि हरक सिंह नहीं होगा तो कांग्रेस की सरकार नहीं आएगी, तो यह मेरी भूल है। हरक ने आगे चुटकी लेते हुए कहा कि हरीश रावत को राजनीति में सब कुछ मिला है। वे ब्लॉक प्रमुख, विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री रहे हैं। अब उनके पास केवल प्रधानमंत्री का पद ही बचा है, ऐसे में उनकी नाराजगी के मायने समझ से परे हैं ।उधर पूर्व सांसद महेंद्र पाल ने संजय नेगी की वापसी का पुरजोर विरोध कर मामले को और पेचीदा बना दिया है, जिससे साफ है कि भीतर ही भीतर कांग्रेस अभी भी उबल रही है। इस पूरे प्रकरण में एक तरफ हरीश रावत के खास करीबी एवं विश्वासपात्र गोविंद सिंह कुंजवाल और वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप इसे परिवार के मुखिया की पीड़ा बताकर दिल्ली दरबार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, वहीं हरक सिंह के तेवरों ने साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा अब रावत केंद्रित राजनीति को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। हरक के रावत पर मुखर होते ही पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल खुलकर रावत के समर्थन में आ गए और कहा की पार्टी का एक वरिष्ठ नेता (हरीश रावत) अगर किसी निर्विवादित व्यक्ति को पार्टी हित में जोड़ना चाह रहा है, तो किसी भी सूरत में विरोध नहीं होना चाहिए था। उधर पार्टी में के भीतर भड़की आग पर पानी डालने की कोशिश करते हुए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा यह कोई मुद्दा ही नहीं है, मैंने पहले भी कहा है- रावत जी की जो बात कही है, वह पार्टी फोरम पर विचारणीय है। नाराजगी जैसी कोई बात नहीं है। इस मुद्दे का हम मिलकर शीघ्र समाधान निकाल लेंगे। इसमें नाराजगी वाली कोई बात नहीं है।

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