February 11, 2026

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संत महापुरूष देश के सांस्कृतिक योद्धाः राजनाथ सिंह

ब्रह्मलीन स्वामी सत्यामित्रनंद गिरि महाराज के श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह में अंतिम दिन जुटे दिग्गज
हरिद्वार। भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी सत्यामित्रनंद गिरि महाराज की पावन स्मृतियों को विराट स्वरूप प्रदान करने हेतु उनकी समाधि स्थली पर फ्श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोहय् का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन का शुक्रवार को समापन समारोह आयेाजित हुआ। इस दौरान केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, केंद्रीय मंत्री मोहनलाल खट्टðर सहित दिग्गज शामिल हुए। इस अवसर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय मंत्री मनेाहर लाल खट्टðर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखण्ड के सीएम पुष्कर सिंह धमी ने स्वामी सत्यमित्रनंद गिरि महाराज की मूर्ति का विध्वित अनावरण किया और उनकी प्राण प्रतिष्ठा के धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की। श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना के बाद आयोजन स्थल पर धर्म सभा शुरू हुई। कार्यक्रम में वैदिक आचार्यों द्वारा विशेष पूजन, मंगलाचार एवं गुरुचरण वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट, हरिद्वार की ओर से समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘समन्वय पुरस्कार’ भी प्रदान किया गया। इस वर्ष यह सम्मान स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसाइटी के डॉ- अनुज सिंघल एवं डॉ. तारा सिंघल को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। यह पुरस्कार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, केंद्रीय मंत्री मोहनलाल खट्टðर, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि आदि ने प्रदान किया। इस अवसर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भले ही स्वामी जी देह रूप में हमारे बीच नहीं है फिर भी उनकी साधना उनका तप उनका विचार आज भी हमारे बीच जीवित है। उनकी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा उनकी चेतना को जाग्रत करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि एक गुरू की परंपरा को उनके शिष्य आगे बढ़ा रहे हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी हरिद्वार आता हूं तो यहां दिव्यता का अनुभव होता है। हरिद्वार भारतीय चेतना का एक सजीव स्पंदनशील केन्द्र है। यह वह स्थान है जहां गंगा मैया पर्वतों को पार कर मैदान पर प्रवेश करती है। हरिद्वार भारत की सांस्कृतिक धारा का एक उदगम स्रोत है। ऐसी भूमि पर संतों के बीच आना सौभाग्य की बात है। रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा का अर्थ केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है राष्ट्र की सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा, सभ्यता की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी देश की सीमाओं की रक्षा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र तब तक सुरक्षित नहीं कहा जा सकता जब तक उसकी सांस्कृतिक नींव उसके मूल्य और उसकी पहचान सुरक्षित नहीं है। इतिहास गवाह है जिन राष्ट्रों ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को कमजोर होने दिया है वह कितने भी भी ताकतवर हो गये हों लेकिन उनका विघटन हुआ है दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें बचा नहीं पाई है। रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी भारतीय सस्कृति संग्रहालय में रखी हुई वस्तु नहीं है यह एक सजीव विकासशील समावेशी शक्ति है यह वह दर्शन है जो वसुधैव कुटुंबकम कहलाता है। यह वह जीवन पद्यति है जो प्रकृति के साथ सामंजस्य करना भी हमें सिखाती है। यह वह ज्ञान परंपरा है जिसने शून्य दिया। जिसने आयुर्वेद दिया, जिसने योग दिया जिसने विश्व को जीवन जीने की कला भी सिखाई। लेकिन आज यह संस्कृति हमारा रक्षा कवच एक अदृश्य युद्ध के मैदान में है। आज इस पर कई प्रकार के हमले हो रहे हैं। युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से दूर होती जा रही है। ग्लोबल कल्चर की चकाचौंध हमारी सांस्कृतिक विरासत को धुधली कर रही है । ऐसे में हमारे लिए सांस्कृतिक पुनरजागरण की ओर आगे बढ़ना अनिवार्यता है । यह समय की मांग है। इसके लिए समाज में संतों से योग्य कोई हो नहीं हो सकता है। संत समाज हमारे सांस्कृतिक योद्धा है और पुनरजागरण का केन्द्र है। आज संत समाज की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

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