साहिबजादों का बलिदान विश्व के इतिहास में अद्वितीयः धामी
मुख्यमंत्री ने वीर बाल दिवस पर नैनीताल के मल्लीताल गुरुद्वारे में मत्था टेका
नैनीताल(उद संवाददाता)। नैनीताल के दो दिवसीय भ्रमण पर पहुंचे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीर बाल दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय नैनीताल के मल्लीताल स्थित गुरुद्वारे में पहुंचकर मत्था टेका और दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह जी तथा उनके चारों वीर साहिबजादों-बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की महान शहादत को श्रद्धापूर्वक नमन किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों का बलिदान न केवल भारतीय इतिहास, बल्कि सम्पूर्ण विश्व इतिहास में साहस, धर्मनिष्ठा, त्याग और अदम्य वीरता का अनुपम उदाहरण है। अल्पायु में ही धर्म, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए उन्होंने जिस अद्वितीय साहस का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साहिबजादों की शहादत को सम्मान देने के उद्देश्य से 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा, उनके सर्वाेच्च बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है। यह निर्णय साहिबजादों की शौर्यगाथा को देश ही नहीं, बल्कि विश्व पटल पर भी जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के वीर साहिबजादों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी अपने धर्म और मूल्यों से समझौता नहीं किया। उनका जीवन और बलिदान आज की युवा पीढ़ी को साहस, राष्ट्रभक्ति, नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देता है तथा हमें सत्य और न्याय के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।इस अवसर पर नैनीताल विधायक सरिता आर्या, उत्तराखंड सरकार में दायित्वधारी डॉ- अनिल कपूर डब्बू, नवीन वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, गुरु सिंह सभा के प्रधान सरदार जोगेंद्र सिंह आनंद, सचिव अमरप्रीत सिंह नोनू सहित संदीप सिंह, गुरुप्रीत सिंह, जीत सिंह आनंद, जगजीत सिंह, गगनदीप सिंह, जसमीत सिंह, सतनाम सिंह, हरनमन सिंह एवं अजीत सिंह उपस्थित रहे।कार्यक्रम में आयुक्त कुमाऊँ दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ- मंजूनाथ टीसी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। गुरुद्वारे में धार्मिक वातावरण एवं श्रद्धा का भाव व्याप्त रहा और सभी ने साहिबजादों के बलिदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
