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प्रदेश में राजस्व लोक अदालतों का शुभारंभ, घर बैठे दर्ज होंगे भूमि विवाद

देहरादून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो कॉन्Úेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में राजस्व लोक अदालत का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाते हुए आम जनमानस को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस पहल को न्याय सुलभता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र की भावना का विस्तार है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राजस्व संबंधी विवाद केवल कागजी प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि इनके पीछे किसानों की भूमि, परिवारों की आजीविका एवं व्यक्तियों का आत्मसम्मान जुड़ा होता है।मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश में 400 से अधिक राजस्व न्यायालय संचालित हैं, जिनमें लगभग 50 हजार से अधिक प्रकरण लंबित हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार ने सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण एवं संतुष्टि के मूल मंत्र के साथ राजस्व लोक अदालत की अभिनव पहल शुरू की है। न्याय आपके द्वार की अवधारणा को साकार करते हुए प्रदेश के सभी 13 जनपदों में 210 स्थानों पर एक साथ इन अदालतों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रथम चरण में लगभग 6,933 लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा। इन अदालतों में भूमि विवादों के अतिरिक्त आबकारी, खाद्य, स्टाम्प, सरफेसी एक्ट, गुंडा एक्ट, सीआरपीसी, विद्युत अधिनियम, वरिष्ठ नागरिक अधिनियम एवं रेंट कंट्रोल एक्ट से संबंधित मामलों का भी पारदर्शी निस्तारण होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए रेवेन्यू कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक अब घर बैठे अपने प्रकरण दर्ज कर सकते हैं। प्रशासनिक सुधारों पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि अविवादित विरासत के मामलों में भू स्वामी की मृत्यु के पश्चात निर्धारित समयसीमा के भीतर नामांतरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने एक संवेदनशील सुझाव देते हुए कहा कि मृतक की तेहरवीं या पीपलपानी तक वारिसों के नाम नामांतरण की प्रक्रिया पूर्ण कर नई खतौनी परिवार को उपलब्ध करा दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विवादित भूमि की पैमाइश एवं कब्जों से संबंधित पुराने मामलों को एक माह के भीतर निस्तारित करने के निर्देश दिए।कार्यक्रम के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि मुख्यमंत्री के दिशा निर्देशों के अनुरूप राजस्व वादों के बैकलॉग को युद्ध स्तर पर समाप्त किया जाएगा। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अगले एक माह में प्राथमिकता के आधार पर लंबित प्रकरणों को निपटाएं और भूमि से जुड़े विवादों का समाधान करें। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध न्याय प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है। इस वर्चुअल बैठक में राजस्व सचिव रंजना राजगुरु सहित शासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और जनपदों से जिलाधिकारी भी उपस्थित रहे।

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