पंजाबी समाज के पैरोकारों पर ही उठने लगे सवाल
अशोभनीय टिप्पणी करने वालों को बचाने के लिए पर्दे के पीछे खेला जा रहा खेल
रुद्रपुर। भाजपा पार्षद राधेश शर्मा और अन्य लोगों द्वारा पंजाबी समाज को लेकर की गई कथित अशोभनीय टिप्पणी के बाद समाज में तीव्र आक्रोश व्याप्त है। इस मामले को लेकर सोमवार को शहर के पांच मंदिर में समाज के लोगों की एक बैठक आयोजित की गई, लेकिन बैठक में केवल पांच सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लेकर मामले पर लीपापोती करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। पंजाबी समाज के अधिकांश लोगों का कहना है कि पांच मंदिर में आयोजित यह बैठक वास्तव में समाज की नाराज़गी को शांत करने और भविष्य में जनप्रतिनिधियों पर उठने वाले सवालों से बचने के लिए पूर्व-नियोजित रणनीति थी।
बैठक में औपचारिक रूप से पार्षद की टिप्पणी पर रोष जताया गया, वहीं कुछ वक्ताओं द्वारा पांच सदस्यीय समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया। हालांकि बैठक के बाद कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या यह फैसला पहले से तय नहीं था। उनका आरोप है कि समाज के लोगों को बुलाकर केवल औपचारिक सहमति लेने की कोशिश की गई, ताकि यह दर्शाया जा सके कि मामला अब समिति के हवाले कर दिया गया है और आगे कोई तीखा रुख न अपनाया जाए।
बैठक के दौरान कुछ वक्ताओं ने यह तर्क भी दिया कि आरोपी पार्षद द्वारा माफी मांग ली गई है, इसलिए विवाद को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। बताया गया कि सोमवार की सुबह विभिन्न धार्मिक संस्थाओं की बैठक में भी इसी बात पर सहमति बनी थी। इसी आधार पर बैठक को समाप्त करने की कोशिश किए जाने पर कई लोग असंतुष्ट नजर आए।
बैठक में शामिल कुछ प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पंजाबी समाज से जुड़े कुछ नेताओं को आगे कर यह पूरी कवायद की गई, ताकि राजनीतिक स्तर पर किसी प्रकार की आंच न पहुंचे। उनका कहना है कि यदि हर बार किसी समाज के खिलाफ टिप्पणी कर माफी मांगकर बच निकलने की परंपरा बन गई, तो इससे न केवल गलत संदेश जाएगा, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों पर सवाल उठाने की गुंजाइश भी कमजोर पड़ जाएगी। आक्रोशित लोगों का दावा है कि यह बैठक वास्तव में न्याय या कठोर कार्रवाई की मांग के लिए नहीं, बल्कि विवाद को ठंडा करने और जिम्मेदारी तय होने से पहले ही मामला दबाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। उनके अनुसार समिति गठन का निर्णय भी इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि तत्काल किसी पर सीधी कार्रवाई की मांग न उठे और पूरा प्रकरण लंबी प्रक्रिया में चला जाए। हालांकि आयोजकों या संबंधित नेताओं की ओर से इन आरोपों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पंजाबी समाज के भीतर इस बात को लेकर तीखी चर्चा चल रही है कि यह बैठक वास्तव में समाज की भावनाओं के अनुरूप थी या फिर राजनीतिक नुकसान को कम करने का प्रयास। अब सभी की निगाहें उस समिति पर टिकी हैं, जिसकी आगामी कार्रवाई यह तय करेगी कि प्रक्रिया पारदर्शी होगी या आरोप सही साबित होंगे। बैठक में
हरीश जलहोत्रा,राजकुमार फुटेला, जगदीश तनेजा, निर्मल हंसपाल, संजय जुनेजा, अभिमन्यु ढींगरा,अशोक कालड़ा, सुरेंदर मिडडा, दिलीप अधिकारी, परिमल राय, पवन गाबा,
विजय जग्गा,सुशील गाबा, विजय फुटेला, मोहनलाल खेड़ा केवल कृष्ण बतरा, हरविंदर सिंह हरजी, संजय ठुकराल, नरेश शर्मा, सुखदेव सिंह भल्ला, मनीष गगनेजा, मनोज मदान, सचिन मुंजाल, मोहन अरोरा राजेश पप्पल, कुलबीर सिंह ढिल्लों, गौरव गांधी,राकेश सुखीजा, परमपाल सुखीजा, अरुण अरोरा, सोनू खुराना, हैप्पी रंधावा, आकाश भुसरी,जोमी चाण्डा, अमित साहनी, राजेश पुंशी, अमनदीप सिंह,अनमोल विर्क, राजकुमार मिगलानी, समीर अरोरा, सीए अमित गंभीर, सीए निशांत ग्रोवर,सुरेंद्र रज्जी, गगन बाधवा,दीपक गुगलानी,हरीश सुखीजा, पंकज सुखीजा, सचिन तनेजा, गौरव तनेजा, आशीष मिढा, सचिन खुराना, सचिन गुंबर, सोनू खुराना, मोहित सुखीजा आशीष छाबड़ा सहित सैकड़ो की संख्या में पंजाबी समाज से जुड़े लोग मौजूद थे।

