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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा : स्वाध्याय, तपस्या और सरलता को अपनाकर विद्यार्थी अपने जीवन को सार्थक और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने योग्य बनाए

हरिद्वार। पतंजलि विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य वैश्विक चुनौतियों का समाधान, प्राचीन वैदिक ज्ञान और नवीन वैज्ञानिक अनुसंधान का समन्वय करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और समाज के समग्र कल्याण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दी। राष्ट्रपति ने जीवन-मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि स्वाध्याय, तपस्या और सरलता को अपनाकर विद्यार्थी अपने जीवन को सार्थक और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने योग्य बना सकते हैं। उन्होंने भगीरथ के प्रयास को आदर्श मानते हुए विद्यार्थियों को परिश्रम, समर्पण और नैतिक मूल्यों के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पतंजलि योगपीठ और पतंजलि विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने योग, आयुर्वेद और स्वदेशी के क्षेत्र में पूरे विश्व को दिशा दी है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से उत्तराखंड को आधुनिक शिक्षा, शोध और तकनीकी नवाचार से जोड़ा जा रहा है। देहरादून में साइंस सिटी की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे युवाओं को शोध और नवाचार के क्षेत्र में प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को ‘नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला’ बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। शिक्षा क्षेत्र में नकल माफिया को समाप्त करने के लिए देश का सबसे सख्त कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार सर्वश्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण के लिए संकल्पित है और इस दिशा में राज्य के हर नागरिक का सहयोग अपेक्षित है। कार्यक्रम में राज्यपाल ले. ज.(सेनि.) गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति  के पुनरुत्थान का केंद्र बन चुका है। स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने योग और आयुर्वेद के माध्यम से स्वदेशी आंदोलन को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति और चिकित्सा पद्धति आज भी सबसे अधिक प्रासंगिक है। यह देखकर प्रसन्नता होती है कि युवा आज योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक विद्या की ओर अग्रसर हो रहे हैं। ये युवा हमारे भविष्य के ब्रांड एंबेसडर हैं, जो विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत एक नई क्रांति के दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की शिक्षा तभी सार्थक होगी जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू की उपस्थिति से समारोह में गरिमामय और ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण रहा। पतंजलि विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रपति के आगमन पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पतंजलि हैलीपैड पर विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति मुर्मू अपने तीन दिवसीय प्रवास के दौरान सोमवार को उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को सुबह 11 बजे संबोधित करेंगी। इसके बाद शाम साढ़े पांच बजे नैनीताल राजभवन की स्थापना के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगी। मंगलवार सुबह वह कैंचीधाम स्थित बाबा नीब करौरी आश्रम में दर्शन करेंगी और अपराह्न तीन बजे कुमाऊं विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगी।

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