प्रहलाद पलसिया के पीड़ित परिवारों को मिला न्याय,16 दिन बाद धारना समाप्त
शक्तिफार्म। लगातार 16 दिनों से चल रहे प्रहलाद पलसिया के पीड़ित परिवारों के धरना-प्रदर्शन का अंत गुरुवार को हो गया। लंबी खींचतान और मैराथन वार्ताओं के बाद शासन-प्रशासन एवं एक्वा पार्क समिति ने पीड़ित परिवारों की सभी प्रमुख मांगें स्वीकार कर लीं। इसमें प्रत्येक परिवार से एक सदस्य को एक्वा पार्क में रोजगार तथा प्रत्येक परिवार को पक्का मकान का अलॉटमेंट दस्तावेज उपलब्ध कराने पर सहमति जताई गई। बैठक एक्वा पार्क स्थित सभा भवन में आयोजित हुई, जिसमें असिस्टेंट डायरेक्टर संजय छीमवाल, उपजिलाधिकारी रविंद्र कुमार, कोतवाल सुंदरम शर्मा, परियोजना अधिकारी सहित प्रशासनिक टीमें मौजूद रहीं। पीड़ित परिवारों की ओर से बंगाली कल्याण समिति के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामचंद्र राय, नगर पंचायत अध्यक्ष सुमित मंडल, और समिति के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप अधिकारी ने बातचीत का नेतृत्व किया। धरना स्थल पर सुबह से ही माहौल तनावपूर्ण बना रहा। पीड़ित परिवारों के समर्थन में नवतेज पाल सिंह, पूर्व पालिका अध्यक्ष हरीश दुबे, पूर्व विधायक नारायण पाल, राम नगीना, सतेंद्र कुमार, सुब्रत विश्वास, सुकुमार चक्रवर्ती सहित कई लोग नारेबाजी करते हुए उपस्थित थे। कथावाचक आचार्य रामचंद्र राय ने बीच का रास्ता निकालते हुए पीड़ित परिवारों और जनप्रतिनिधियों के साथ विस्तृत वार्ता की। तैयार किए गए मांग पत्र को प्रशासन के सामने रखा गया। लंबी चर्चा के बाद प्रशासन ने सभी मांगें मान लीं। बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि अलॉटमेंट का दस्तावेज मिलने से पहले कोई भी परिवार अपना मकान खाली नहीं करेगा। कुछ बिंदुओं पर असहमति के कारण पूर्व विधायक और अध्यक्ष जमीन पर बैठ गए, लेकिन मध्यस्थता के बाद सहमति बन गई और अनुबंध पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी हुई। इस दौरान शिवपद सरकार, समीर राय, परिमल राय, त्रिनाथ बिस्वास, उत्तम आचार्य, विनय विश्वास, सुकुमार चक्रवर्ती, सरस्वती बाला श्रीकांत, पूर्व पालिका अध्यक्ष हरीश दुबे, गुरसेवक सिंह, सतेंद्र कुमार, सुब्रत विश्वास सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। बता दें राजस्व विभाग ने साल 2022 में प्र“लाद पलसिया की करीब 41 एकड़ जमीन मत्स्य विभाग को हस्तांतरित की थी। विभाग ने एक साल पहले कार्रवाई कर कई एकड़ जमीन को कब्जे में ले लिया था। 13 नवंबर को मत्स्य विभाग, प्रशासन के साथ उक्त जमीन पर बने मकान को ध्वस्त कर कब्जा लेने गया। प्रभावित सात परिवारों में से चार परिवारों ने इसका कड़ा विरोध किया और उजाड़ने से पहले पुनर्वास की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।धरने को स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी समर्थन दिया। इसमें पूर्व सीएम हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, नानकमत्ता विधायक गोपाल सिंह राणा, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन, पूर्व विधायक नारायण पाल, पूर्व विधायक किरण मंडल, क्रांतिकारी सुब्रत विश्वास शामिल थे।
बेवजह मामले को तूल दे रहा था विपक्षः बहुगुणा
शक्तिफार्म। प्रहलाद पलसिया प्रकरण के समाधान के बाद कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि प्रभावित परिवारों के एक-एक सदस्य को रोजगार और प्रत्येक परिवार को रहने के लिए आवास उपलब्ध कराया जाएगा। मंत्री ने बताया कि यह आश्वासन मंच से भी दिया गया था और इसी आधार पर सहमति बनी है। मंत्री बहुगुणा ने कहा कि बावजूद इसके आंदोलन को जारी रखना अनावश्यक था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस मुद्दे को तूल देकर सरकार को बदनाम करने और समाज को बांटने की कोशिश की, लेकिन उनकी मंशा सफल नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि शक्तिफार्म और सितारगंज की जनता समझदार है, वे किसी के बहकावे में नहीं आएंगे और विकास के कार्यों में सहयोग करते रहेंगे।
