February 11, 2026

Uttaranchal Darpan

Hindi Newsportal

पेपर लीक आंदोलन में लगे फलीस्तीन समर्थक नारे

सरकारी नौकरी और पारदर्शिता की मांग के बीच राजनीतिक रंग लेने लगा आंदोलन
देहरादून। परेड ग्राउंड स्थित धरना स्थल पर पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन में रविवार को बड़ा मोड़ देखने को मिला। अब तक जहां आंदोलन केवल परीक्षा रद्द करने और आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग तक सीमित था, वहीं शनिवार को दिशा नामक एक संगठन की एंट्री ने माहौल बदल डाला। आरोप है कि इस संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान ‘फलीस्तीन जिंदाबाद’ के नारे लगाए। इससे पहले भी यहां ‘हमें चाहिए आजादी’ और उत्तराखंड में नेपाल जैसे हालात होकर रहेंगे जैसे नारे लगाए गये थे। इससे साफ हो गया है कि आंदोलन में अब केवल अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि बाहरी संगठन भी सक्रिय भूमिका निभाने लगे हैं। धरना स्थल पर लगे नारों और उत्तेजक बयानों से अभ्यर्थी दुविधा में हैं। उनका कहना है कि वे सिर्फ पेपर लीक प्रकरण की सीबीआई जांच, परीक्षा रद्द करने और आयोग की पारदर्शी व्यवस्था जैसी मांगों को लेकर बैठे हैं। लेकिन कुछ संगठनों ने मंच का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए शुरू कर दिया है। हम परीक्षा में निष्पक्षता चाहते हैं, राजनीति नहीं। फलीस्तीन समर्थक नारों ने आंदोलन को अचानक राजनीतिक रंग दे दिया। इससे पूरे माहौल में तनाव की स्थिति बन गई। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां इस घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए हैं। सूत्रें के मुताबिक, धरना स्थल पर जुटने वाले हर समूह और संगठन की गतिविधियों की बारीकी से निगरानी की जा रही है ताकि आंदोलन को किसी तरह से भटकने न दिया जाए। इधर, उत्तराखंड संस्कृति साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्टð ने युवाओं से आंदोलन की आड़ में किसी भी प्रकार के देश विरोधी या राज्य विरोधी गतिविधियों से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक प्रकरण पर युवाओं की चिंता जायज है, लेकिन किसी भी कीमत पर इसका इस्तेमाल गलत एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि बीते चार वर्षों में लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और चिकित्सा सेवा चयन आयोग के माध्यम से 25 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से राज्य में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतर चुका है। इससे अब तक 81 हजार से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। धरना स्थल पर जिस तरह से नारेबाजी और राजनीतिक रंग देखने को मिल रहा है, उसने आंदोलन की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां अभ्यर्थी अब भी निष्पक्ष परीक्षा और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं बाहरी संगठनों की सक्रियता से आंदोलन का मूल मुद्दा कहीं दबता नजर आ रहा है। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के बीच यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह विरोध अपनी असली दिशा बनाए रख पाता है या फिर पूरी तरह राजनीति की भेंट चढ़ जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *