जनसेवा शिविरों में विभिन्न जनपदों के 3.22 लाख से अधिक नागरिकों को मिला सीधा लाभ
देहरादून । उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम सुशासन और त्वरित जनसेवा का एक प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है। इस विशेष पहल के तहत प्रदेश के सभी 13 जनपदों में निरंतर जनसेवा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे आम जनता की समस्याओं का समाधान उनके घर के पास ही सुनिश्चित हो रहा है। 19 जनवरी 2026 तक प्रदेश भर में कुल 395 शिविर आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 3 लाख 22 हजार 585 से अधिक नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इन शिविरों में शासन और प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रहकर लोगों की शिकायतों को सुन रही है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन शिविरों के माध्यम से अब तक कुल 32 हजार 746 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 22 हजार 173 मामलों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण कर दिया गया है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए कुल 43 हजार 418 आवेदन प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस मुहिम के चलते विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 1 लाख 75 हजार 258 नागरिकों को सीधे तौर पर लाभान्वित किया गया है। यह अभियान शासन को जनता के निकट लाकर अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकारी लाभ पहुँचाने के लक्ष्य को साकार कर रहा है।जनपदवार भागीदारी की बात करें तो अल्मोड़ा, देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल और पिथौरागढ़ में नागरिकों का भारी उत्साह देखने को मिला है। देहरादून जनपद में 41 हजार 889 नागरिकों ने शिविरों में प्रतिभाग किया, जबकि हरिद्वार में यह संख्या 64 हजार 686 रही। इसी तरह उधम सिंह नगर में 24 हजार 421 और अल्मोड़ा में 24 हजार 771 नागरिकों को विभिन्न योजनाओं का सीधा फायदा मिला है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहल को जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुँचती है, तो समस्याओं के समाधान के साथ-साथ शासन के प्रति जनविश्वास भी मजबूत होता है। राज्य सरकार का यह अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा ताकि उत्तराखंड को जनकल्याण के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित किया जा सके।
