February 4, 2026

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भूमि विवाद मामले में डीजीपी से मिले विधायक पाण्डे

दूध का दूध-पानी का पानी करने के लिए ‘नार्काे टेस्ट’ की मांग
देहरादून/गदरपुर (उद संवाददाता)। जमीन कब्जाने के आरोपों और परिजनों पर हुए मुकदमे के बाद विवादों में घिरे भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री अरविंद पांडे ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय देहरादून पहुंचकर डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात की। विधायक ने इस पूरे मामले को अपने खिलाफ एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए डीजीपी से मांग की है कि सच सामने लाने के लिए दोनों पक्षों का नार्काे और पॉलीग्राफ टेस्ट कराया जाए। डीजीपी से मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए अरविंद पांडे ने बेहद कड़े शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा कि वह डीजीपी साहब से मुकदमा खत्म कराने की सिफारिश करने नहीं आए हैं, बल्कि वह चाहते हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो क्योंकि यह उन्हें ‘भू-माफिया’ साबित करने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने आत्म सम्मान के साथ कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक वह कागजों में ‘भू-माफिया’ ही हैं, इसलिए सत्यता का परीक्षण अनिवार्य है। विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनके परिवार का कोई भी सदस्य इस मामले में दोषी पाया जाता है, तो पुलिस उस पर कड़ी कार्रवाई करे लेकिन यदि यह साजिश है तो उसका पर्दाफाश होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि 20 जनवरी को बाजपुर पुलिस ने फर्जी तरीके से जमीन हड़पने के आरोप में गदरपुर विधायक के भाई देवानंद पांडे सहित चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। गांव बहादुरगंज निवासी शिकायतकर्ता संजय बंसल ने तहरीर दी थी कि मुंडिया पिस्तौर स्थित उनकी जमीन पर आरोपियों ने फर्जी किरायानामा बनाकर कब्जा करने की कोशिश की है। इसी क्रम में 21 अगस्त 2025 को जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण ने उक्त भूमि पर हो रहे निर्माण को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस दिया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब वह मौके पर पहुंचे, तो विधायक के भाई और उनके साथियों ने उन्हें कागजात फेंककर जान से मारने की धमकी दी और दोबारा वहां न दिखने की चेतावनी दी। अरविंद पांडे पिछले लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में सुिखर्यों में बने हुए हैं। पूर्ववर्ती सरकार में शिक्षा और खेल मंत्री रहे पांडे का धामी सरकार की दूसरी पारी में सफर काफी तल्ख रहा है और उन्होंने ऊधम सिंह नगर के कई मामलों पर शासन-प्रशासन के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाई है। राजनीतिक गलियारों में इस मामले को भाजपा के भीतर जारी आंतरिक खींचतान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उत्तराखंड दौरे पर थे, तब पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने अरविंद पांडे के साथ खड़े होकर एकजुटता का संदेश दिया था जिससे संकेत मिले थे कि यह विवाद अब दिल्ली दरबार तक पहुंच चुका है। विधायक पांडे ने साफ कर दिया है कि वह जांच से भागने वाले नहीं हैं और चाहते हैं कि नार्काे टेस्ट के माध्यम से सच्चाई जनता के सामने आए।

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