दहशत का पर्याय बना तेंदुआ पिंजरे में कैद
काशीपुर (उद संवाददाता)। द्रोणसागर किले और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों में लंबे समय से दहशत का पर्याय बना तेंदुआ आिखरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। प्रशासन और वन विभाग की टीम द्वारा कल रात चलाए गए सतर्कता अभियान के दौरान इस खूंखार वन्यजीव को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया गया। तेंदुए के पकड़े जाने से किले के कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों ने बड़ी राहत महसूस की है। गौरतलब है कि ऐतिहासिक द्रोणसागर किले पर पिछले काफी समय से तेंदुओं की सक्रियता बनी हुई थी। वन्यजीवों की आवाजाही के कारण न केवल पुरातत्व विभाग के कर्मचारियों में भय व्याप्त था, बल्कि आसपास की बस्तियों के लोग भी शाम ढलते ही घरों में दुबकने को मजबूर थे। पूर्व में भी कई बार तेंदुए के दिखाई देने की शिकायतें वन विभाग को मिली थीं, जिसके बाद किले परिसर में पिंजरा लगाया गया था। कल रात चले इस सफल रेस्क्यू अभियान में पुरातत्व विभाग के सुपरिटेंडेंट डॉ- मोहन चंद्र जोशी, संरक्षण सहायक प्रभारी दिनेश कुमार शर्मा और वन विभाग के रेंजर देवेन्द्र सिंह की रणनीति रंग लाई। घंटों की कड़ी मशक्कत और सावधानी के बाद तेंदुए को पिंजरे में कैद किया गया। अभियान में वन कर्मी यशपाल सहित अन्य फील्ड कर्मचारियों ने भी अहम भूमिका निभाई। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पकड़े गए तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद उसे सुरक्षित रूप से घने जंगलों में छोड़ दिया जाएगा। हालांकि, एक तेंदुआ पकड़े जाने के बावजूद विभाग अभी भी क्षेत्र में सतर्कता बरत रहा है ताकि अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी होने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।
