संसद में गूँजा गढ़वाल में बढ़ते जंगली जानवरों के हमलों का मुद्दा
सांसद अनिल बलूनी और महेंद्र भट्ट ने केंद्र सरकार से की त्वरित कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली/देहरादून। पौड़ी गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों, विशेषकर गढ़वाल में लगातार बढ़ रहे जंगली जानवरों के हमलों का मुद्दा शुक्रवार को लोकसभा में गंभीरता से उठाया। उन्होंने कहा कि भालू और गुलदार के हमले तीव्र गति से बढ़ रहे हैं, जिसके कारण आम जनमानस भय के साये में जीने को मजबूर है। सांसद ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में वन्यजीवों के हमलों के चलते नागरिकों की मौतें और घायल होने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोगों का घर से बाहर निकलना, बच्चों का स्कूल जाना और महिलाओं का जंगल की ओर जाना जोखिम भरा हो गया है।उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में व्याप्त मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए त्वरित एवं प्रभावी रणनीति बनाई जाए और ठोस कदम उठाए जाएँ।अनिल बलूनी ने बताया कि कुछ दिन पूर्व उन्होंने इस मुद्दे को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के समक्ष भी रखा था, ताकि बढ़ते हमलों पर तत्काल नियंत्रण के उपाय किए जा सकें। सांसद ने उत्तराखंड वन विभाग के पीसीसीएफ से भी आग्रह किया है कि जंगली जानवरों के हमलों की स्थिति की नियमित समीक्षा की जाए और प्रतिदिन की रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, ताकि हालात पर नियंत्रण रखा जा सके। उन्होंने कहा, फ्जनसुरक्षा सर्वोपरि है। इस विषय पर ठोस और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मैं लगातार प्रयासरत हूँ।य् वहीं राज्य सभा सांसद महेंद्र भटट ने भी राज्यसभा में वन्य जीवों के हमलों को लेकर मुद्दा उठाया। महेंद्र भटट ने राज्यसभा के शून्य काल के दौरान उत्तराखंड में वन्यजीवों ;गुलदार, बाघ, भालूद्ध के अत्यधिक हमलों से हो रही मानव क्षति की ओर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से वन्य जीवों से लोगों की सुरक्षा हेतु विशेष कार्य योजना तैयार करने व वन्यजीवों के हमले से मृत लोगों के परिजनों को राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्रीय सहायता का प्रावधान किये जाने तथा घायलों के संपूर्ण उपचार के लिए केंद्र सरकार द्वारा निशुल्क उपचार की नीति बनाये जाने की मांग की।

