रंगोत्सव में सीएम धामी ने जमकर उड़ाया गुलाल, फाग के गीतों से कलाकारों ने बांधा समां
काशीपुर। निगम प्रशासन द्वारा आयोजित ‘रंगोत्सव’ कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थानीय नागरिकों के साथ जमकर होली खेली। उन्होंने कहा कि होली का त्यौहार प्रेम एकता और भाईचारे का संदेश देता है। रंगों का यह पर्व आपसी गिले शिकवे भुला कर एक दूसरे को गले लगाने का अवसर होता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता इसी धर्म के सहारे हमें समूचे राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इस रंगोत्सव में मिनी इंडिया की झलक नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ नाच गाने और रंग लगाने का त्यौहार नहीं बल्कि सबको मिलाने का पर्व है। यह पर्व सामाजिक ताने बाने को और मजबूती और सम्बंधों को गहराई देने वाला पर्व है। यह पर्व हमें यह भी याद दिलाता है कि जीवन की सच्ची खुशियां अगर किसी में है तो अपनापन बढ़ाने में हैं। सीएम ने कहा कि यदि हम ही हम हैं तो क्या हम हैं, हम भी हैं तुम भी हो, तब जीवन सार्थक है। सीएम ने कहा कि जैसे उत्तराखंड की लोक संस्कृति परंपरा व पर्व हमारी सांस्कृतिक पहचान है। इसी तरह होली हमारी संस्कृति और विरासत को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम है। हम कई बार आपस में वैचारिक भिन्नताओं के कारण अलग-अलग भी हो जाते हैं लेकिन होली हमें आपस में मिलाने का काम करती है। यह एकता समरता और संगठन का प्रतीक है। सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी परंपराएं सांस्कृतिक धरोहर को लगातार आगे बढ़ाने का काम हो रहा है। आज पूरी दुनिया भारत का यशगान कर रही है तो उसके पीछे भारत की सांस्कृतिक विरासत है। जो लगातार आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में हम सबकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि हम अपनी लोक संस्कृति को केवल उत्सवों तक सीमित न रहने दें बल्कि उसे अपने जीवन का हिस्सा बनायें। विशेष रूप युवा पीढ़ी आधुनिकता को अपनायें लेकिन अपनी जड़ों से भी जुड़ाव रखें। अपनी परंपराओं को जानें उनको औपचारिक ना मानकर उन पर गर्व करना सीखें। सीएम ने कहा कि काशीपुर क्षेत्र के विकास के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। काशीपुर में 133 एकड़ क्षेत्र में ईलेक्ट्रोनिक पार्क पार्क बनाया जा रहा है जिसमें हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। काशीपुर में कई बड़े प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ाये जा रहे हैं। काशीपुर किसी भी मामले में पीछे नहीं रहेगा। चौती मंदिर को मानस खण्ड कॉरिडोर में शामिल कर उसे विकसित करने का भी काम किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि काशीपुर आस्था की नगरी के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाये। सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड आज हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है। उत्तराखण्ड ने विकास के नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। रंगोत्सव कार्यक्रम में उत्तराखंड की लोक-संस्कृति को आगे बढ़ाते आ रहे लोक गायक इंद्र आर्या, गोविंद दिगारी, खुशी जोशी, पूर्वांचल के गायक आलोक कुमार के अतिरिक्त फूलों की होली के लिए विख्यात ब्रज के रास कलाकारों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गरिमामय उपस्थिति में सुन्दर व मनोहारी प्रस्तुति देकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर लिया । रंगोत्सव कार्यक्रम में हजारों की तादाद में उमड़े जन समुदाय ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में अबीर गुलाल उड़ाकर जोरदार अभिनंदन किया।

आयोजन के दौरान सांसद अजय भट्ट, विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा, पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा, जसपुर के पूर्व विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल, रुद्रपुर महापौर विकास शर्मा, महापौर दीपक बाली, जिलाध्यक्ष भाजपा काशीपुर मनोज पाल, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या, दर्जा राज्य मंत्री अनिल डब्बू, मुकेश कुमार, सायरा बानो, जिला प्रभारी भाजपा पुष्कर सिंह काला, प्रदेश मंत्री भाजपा गुंजन सुखीजा, पीसीयू अध्यक्ष राम मेहरोत्र, ब्लॉक प्रमुख काशीपुर चंद्रप्रभा, पूर्व प्रदेश महामंत्री खिलेंद्र चौधरी, आशीष गुप्ता, उषा चौधरी, पूर्व दर्जा मंत्री राजेश कुमार, उर्वशी बाली,अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, एसएसपी अजय गणपति व सीडीओ देवेश शासनी समेत स्थानीय जनप्रतिनिधियों में पंकज टंडन, अमन बाली, राजू सेठी, प्रमोद मिश्रा, महेश अग्रवाल, मुक्ता सिंह, संजय अग्रवाल, अश्वनी छाबड़ा विकास जिंदल समेत बड़ी संख्या में सामाजिक व व्यापारिक संगठनों से जुड़े लोगों के अलावा स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। काशीपुर के इतिहास में निगम प्रशासन द्वारा होली के मौके पर यह पहला अवसर है जब इतने बृहद स्तर पर रंगोत्सव मनाया गया। पखवाड़े भर पूर्व से इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही थी। रंगोत्सव में शामिल होने के लिए काशीपुर नगर क्षेत्र के हजारों परिवारों को निगम प्रशासन द्वारा बाकायदा आमंत्रण पत्र भेजा गया। कार्यक्रम में शामिल होने वाले आगंतुकों के लिए दोपहर भोज की विशेष व्यवस्था की गई थी।
