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बजट सत्र के पहले दिन विपक्ष का भारी हंगामा,अभिभाषण के बीच सदन से वॉकआउट

सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर कांग्रेस विधायकों ने दिया धरना
भराड़ीसैंण (उद संवाददाता)। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक पारा चरम पर रहा। एक ओर जहां राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अभिभाषण के माध्यम से सरकार का विजन रखा, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने सत्र की बेहद संक्षिप्त अवधि को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान ही सदन से वॉकआउट कर अपना विरोध दर्ज कराया। सत्र शुरू होने से पहले ही कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह, भुवन कापड़ी, हरीश धामी, मनोज तिवारी और अनुपमा रावत विधान भवन की सीढ़ियों पर धरने पर बैठ गए। विधायकों ने हाथों में पट्टिðकाएं पकड़कर सरकार विरोधी नारेबाजी की। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार ने पहले से ही दो दिन की अवधि तय कर लोकतांत्रिक परंपराओं का गला घोंटा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई, बेरोजगारी और पलायन जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है और प्रश्नकाल को सीमित कर जनता की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। सदन के बाहर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी नेताओं को मनाने के लिए कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा पहुंचे। उन्होंने विधायकों से वार्ता की और सत्र को सुचारू रूप से चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के विकास और बजट पर सार्थक चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष का अड़ियल रुख जनहित में नहीं है। सदन के भीतर कांग्रेस का विरोध था, तो बाहर सड़कों पर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं ने दिवालीखाल में मोर्चा संभाला। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी। विपक्षी दलों का संयुक्त आरोप है कि यदि सरकार के पास ठोस एजेंडा होता, तो सत्र की अवधि कम से कम एक सप्ताह की जानी चाहिए थी। फिलहाल, सत्र के पहले ही दिन हुए इस घमासान ने सदन की आगामी कार्यवाही के और अधिक हंगामेदार होने के संकेत दे दिए हैं।

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